बड़े से घर के आंगन में दो बच्चियाँ भाग-भाग कर एक-दूसरे को पकड़ती, छुड़वाती फिर पकड़ने का प्रयास करती ऐसे लग रही थीं जैसे किसी बाग में दो तितलियां एक-दूसरे का अनुसरण कर अटखेलियाँ करती नज़र आती हैं। इन दोनों बच्चों में से एक है “मुस्कान” जो कि सात बरस की होगी और दूसरी है […]
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पानी बचाओ..-21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां चंडीगढ़
मयंक घर पहुँचा तो बड़ा ही अनमना-सा लग रहा था। बैग रख सीधा बाथरूम में दौड़ा। “माँ- माँ”, उसकी आवाज़ सुनकर माँ दौड़ी आई। “क्या हुआ?” “माँ देखो हमारा नल लीक कर रहा है, और कई दिनों से कर रहा है। आपको पता नहीं माँ, हम कितना पानी वेस्ट कर चुके हैं। पता तब चलेगा […]
एक था सुखदेव-21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां चंडीगढ़
एक नगर में एक विधवा औरत रहती थी। उसका एक छोटा-सा पुत्र था। जिसका नाम सुखदेव था। सुखदेव सरकारी स्कूल में दूसरी कक्षा में पढता था। वह पढ़ने में अच्छा था। मगर गरीब होने के कारण उसके पास तरह-तरह के कपड़े, खिलौने नहीं थे और न ही उसके पास अपने साथियों की तरह टॉफी, चॉकलेट […]
कुमुदिनी- 21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां चंडीगढ़
चौधरी मेडिकल स्टोर से ही लोअर बाज़ार शुरू हो जाता था। पम्मी बड़े गर्व से बतलाता था कि यह उसकी दुकान है। हालाँकि स्कूल का रास्ता हाईवे से होकर जाता था, पर लोअर बाज़ार से जाना इसलिए जरूरी था कि मनसा राम की हट्टी रास्ते में पड़ती थी। उसकी भुनी हुई मूंगफलियाँ और गुड़ से […]
खिलौने वाली लड़की-21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां चंडीगढ़
हरियाणा के एक गाँव में एक 14 वर्ष की लड़की राधा रहती थी। वह अपनी माँ चन्दा और एक छोटे भाई पवन व एक छोटी-सी बहन मधु के साथ छोटे से घर में रहती थी। उसके पिता रामलाल का 2 साल पहले लम्बी बीमारी के कारण देहांत हो गया था। माँ चन्दा का भी स्वास्थ्य […]
मुनमुन और मेरु-21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां चंडीगढ़
आज मुनमुन दस वर्ष की हो जाएगी। अपनी पसंदीदा फ्रॉक निकालकर भागती-भागती अपनी माँ के पास गयी और बोली- “इसे अच्छे से धो दो।” माँ देखो, वहां थोडा दाग लगा है। माँ ने ध्यान से देखा और कहा, “अरे नहीं बेटा, मुनमुन ये दाग नहीं ये तो फ्रॉक का डिज़ाइन है। देखो ध्यान से।” “हाँ […]
उलझन-21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां चंडीगढ़
मनु को संगीत का बहुत शौक था। एक दिन उसने एक कलाकार को दूरदर्शन पर पानी से भरी कटोरियों पर लंबी सिलाईनुमा डंडियों के साथ चोट करते हुए संगीत बजाते हुए देखा तो बहुत प्रभावित हुआ। उसके पास वाद्ययंत्र तो नहीं थे पर घर के ड्राइंग रूम में रखी लकड़ी की मेज पर ढोलक बजाना, […]
दिव्या-21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां चंडीगढ़
दिव्या नाम है उसका- दस वर्षीय सुकन्या बड़ी ही खूबसूरत और प्यारी। उसकी माँ बताया करती थी जब वह पैदा हुई थी तो उसकी पलकों पर नीली झिलमिलाती लकीरें थी। मुस्कुराते स्वप्न थे। बड़ी हुई तो मोतियों से दाँत हंसते रहते। खिलखिलाती रहती। अपनी सखियों में सब से प्रिय होती। लड़कों के साथ भी उसकी […]
भीनी-भावक की गाँव यात्रा-21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां चंडीगढ़
भीनी भले ही छोटी थी, मगर इतनी भी नहीं कि “कोरोना” के बारे में न जानती। अरे वो तो बारह साल की थी, इस नामुराद बीमारी के बारे में तो छोटे-छोटे बच्चे भी जान गए थे। ये बात और है कि बहुत से या यूँ कहे कि लगभग सभी बच्चे पहले-पहल तो बहुत खुश हुए […]
चांदनी रात में घोनू भाई – 21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां चंडीगढ़
महाराना प्रताप डैम के बस-स्टेशन पर बस रूकी। राजन बस से उतर कर देखने लगा। शाम को झुटपुट था। आठ बज रहे थे। डैम की मुण्डेर पर खड़े हो कर उसने दूर तक नज़र दौड़ाई। कितना कुछ बदल गया है। तब डैम की खुदाई शुरू हुई थी। डैम अब कितना बड़ा बनेगा, आम आदमी को […]
