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गृहलक्ष्मी की कहानियां : देवदूत
Stories of Grihalakshmi

गृहलक्ष्मी की कहानियां : पल्लव आज की डाक में एक खूबसूरत से शादी के कार्ड काे खाेल ही रहा था, उसकी आईएएस बैचमेंट रिया का फोन आ गया। पल्लव, साॅरी मैं तुमसे शादी नहीं कर सकती। मैंने शिवम् से शादी करने का फैसला लिया है। महत्वाकांक्षी रिया ने पल्लव काे पसन्द किया था, क्याेंकि वह आईएएस परिवार से ही है।

दादाजी, पापा आैर दाेनाें भाई के साथ-साथ भाभी भी भैया के ही बैच की आईएएस है। ट्रेनिंग के दौरान रिया से हुई दाेस्ती काे देखकर, उसके दाेस्त आैर बैचमेंट विपुल ने उसे रिया की स्वार्थपरता काे इंगित किया था, पर वह समझ नहीं पाया। रिया ने अपने से जूनियर, राजनीतिज्ञ परिवार के शिवम् से शादी का फैसला लिया। हमारे देश में आईएएस से ज्यादा राजनीतिज्ञ का प्रभाव हाेता है। पल्लव बहुत अपसेट हाे गया। सर्वगुण सम्पन्न आईएएस का अपने जूनियर से हार जाना आैर रिया की अस्वीकृृति उस झकझोर रही थी। वह बहुत परेशान आैर निराश हाे गया, फिर से फोन की घण्टी बजने पर घरेलू सहायक पप्पू ने कहा, साब विपुल साब फोन पर बात करना चाहते हैं।

अनिच्छा से ही हैलाे कहा। विपुल बोला, पल्लव मेरी शादी तय हाे गई है, कार्ड तुझे भेज दिया है। एक दाेस्त का अनुरोध है, मेरे विवाह में तुझे जरूर आना है। तेरे लिये हाेटल बुक कर दिया है। मैं अपने दाेस्त का इंतजार करूंगा। यहां आसपास घूमने के लिये आेरछा, झांसी, खजुराहाे आैर भी कई जगह हैं कम से कम एक हफ्ते की छुट्टी लेना ताकि आसपास घूम सकाे। पल्लव ने अपने काे निराशा से मुक्त करने की सोच विपुल की शादी में जाने की साेची।

पल्लव ने दिल्ली से अपनी गाड़ी से ही सफर करना तय किया। सड़क का सफर, समय के साथ-साथ, बहुत सारी असुविधाआें से बचाता है। पल्लव मध्यप्रदेश के छोटे से शहर में प्रवेश कर चुका था। एक राहगीर से हाेटल आमंत्रण के बारे में पूछा, उसने कहा, भैया जी आप कलेक्टर साब की शादी में आये हैं? हां! राहगीर ने रास्ता बता दिया, पल्लव ने पूछा तुमने कैसे जाना? भैया जी आप नये दिखते हैं न! आैर कलेक्टर दिखते हैं। हाेटल पहुंचते ही उसे रिजर्व रूम मिल गया, फ्रेश हाेते-हाेते विपुल अपने भाई नन्दन के साथ पहुंच चुका था। पल्लव काे देखते ही विपुल गले लग गया। पल्लव मैं ताे सोच भी नहीं सकता, तू अपने इस साधारण से दाेस्त के बुलावे में सुविधा रहित छोटे से शहर में आयेगा। पल्लव काे इतना अपनापन ताे शायद भैया से भी नहीं मिला। नन्दन, यह मेरा जिगरी दाेस्त पल्लव आैर पल्लव यह मेरा छोटा भाई नन्दन है। यह तेरा गाइड आैर साथी है। घर पास में ही है, वहां चलकर गर्म-गर्म नाश्ता कर ले। जब कुछ खाने का मन हाेगा ताे हाेटल में खा सकता है।

नन्दन के साथ घर पहुंचकर गर्म-गर्म अदरक इलाचयी वाली चाय ने उसकी पूरी थकान मिटा दी। विपुल के दादा-दादी, पिताजी, उसके दाेनाें भाई निखिल आैर अखिल उससे मिलने आये। रिश्तेदाराें की जमघट में कुछ अलग ही आतिथ्य सत्कार मिल रहा है। बेड़ई, आलू की सब्जी व दही, जलेबी के नाश्ते में राेज ब्रेड, आमलेट आैर पोहा से कुछ अलग ही मजा आया। विपुल ने नन्दन से कहा। नन्दन, पल्लव बहुत अच्छा फोटाेग्राफर है। इससे तू फोटाेग्राफी के गुर सीख ले। पल्लव काे हर रस्म के बारे में पहले ही बता देना। रंगाेली, मांडणा से सजे आंगन, केले के पेड़ के तने से सजे मण्डप, आम्रपल्लव के वंदनवार, हल्दी का शगुन, भाभियों व रिश्तेदाराें की ठिठाेली सब पल्लव के कैमरे में कैद हाे रही है। दाेपहर में जमीन पर पालथी मारकर बैठकर बथुआ की कढ़ी, चावल आैर कई देशी व्यंजनाें का सुस्वादु भाेजन, शाम काे माेटे-माेटे सेव के साथ सौंफ आैर गुड़ वाली चाय, नये अनुभव है। शाम काे ढाेल-नगाड़ों के साथ मन्दिर पूजन, बारात की वधू धरा के पूरे गांव में परिक्रमा, जयमाल, शगुन के गीत, जूता-चुराई, पाणिग्रहण, सारे रीति-रिवाज कुछ एक चलचित्र की तरह लग रहा है। सुबह कलेवा में दामाद से उसकी फरमाईश पूछना आैर पूरा करने का वादा मिलने पर ही दामाद का नाश्ता करना भी एक रिवाज है। विपुल का कलेवे गांव में ही लड़कियों का डिग्री काॅलेज खुलवाने की इच्छा काे पूरी करने की गांव वालाें द्वारा हामी भरना, एक पढ़े लिखे दामाद की सोच है। नाश्ते के बाद विपुल के साथ पल्लव काे भी नेग मिलना, कन्या विदाई, सब कुछ पल्लव की जिन्दगी में नया अनुभव है।

वधू आगमन में दरवाजे राेकने की रस्म में भाई बहनों का पल्लव से मांग की दावेदारी पक्की करना, प्रत्येक पल पल्लव काे रोमांचित कर रहा था।

दरवाजा राेकने की रस्म में माेलभाव चल रहा था। भाई बहनें 5,000/- रुपये कह रहे थे, पल्लव ने रेट बढ़ा दिया, पांच हजार में क्या हाेता है, 50,000 मांगो। विनय बोला, तू मेरा दाेस्त है आैर इनकी तरफदारी कर रहा है। हां-हां पल्लव भैया ने ठीक कहा है। माेलभाव करते-करते 25,000/- में बात अटकी। धरा कह रही थी दे दीजिये न छोटे बाई बहन हैं। पल्लव काे याद आया उसके साथ चचेरी-ममेरी बहनों के दरवाजा राेकने की रस्म पर भाभी ने कहा था, रुपये मांगते शर्म नहीं आती। मेहनत से कमाओ ताे जानूं? उसके बाद वधू आगमन की रस्में किसी तरह निपटाई गई।

पल्लव हर रस्म में छोटे भाई बहनों के साथ हिस्सा ले रहा है। उसकी कैमरे की क्लिक-क्लिक में ढेर सारे ग्रुप फोटाे भी खींचे जा रहे हैं। रिसेप्शन पार्टी की सजावट में भी सबके साथ पल्लव की भागेदारी हाे रही है। धरा- नन्दन, निखिल-अखिल आैर उनके दाेस्तों के सहयाेग से एक खूबसूरत सा ग्रामीण परिवेश तैयार किया गया है।

रंगाेली से सजे-धजे, पुते आँगन, दिया आैर लालटेन की राेशनी से सजा वातावरण आंगन के पेड़ में बंधे झूले में वर-वधू का झूलना, कांजीवरा आैर जलजीरा का कुल्हड़ में वितरण, देसी व्यंजनाें- मैथी, पालक की पूड़ी, आंवले की सब्जी, बेसन का मीड़ा, लौकी का रायता, मसालेदार भुनी कचरी की चाट, पपीते की चटनी, पेठे की खीर, गन्ने के ताजे रस के ठेले आैर भी अनेक देशी व्यंजनाें की सोंधी सी खुशबू का परिवेश, बड़े-बड़े इवेंट मैनेजराें काे चुनौती दे रहा है।
पल्लव, रिया द्वारा अपनी अस्वीकृति काे भूलकर खुशियां बटाेर रहा है। तभी एक साधारण से धाेती-कुर्ता पहने एक बुजुर्ग का प्रवेश वातावरण काे आैर खुशनुमा बना गया। बुजुर्ग  के आते ही विपुल के घर वालाें का उनकाे प्रणाम करना, विपुल आैर धरा का अपनी जगह से उठकर उनकाे प्रणाम करना, बुजुर्ग  का स्नेह से उन्हें गले लगाना आैर आशीर्वाद, खास आत्मीयता बयान कर रही है।

विपुल ने पल्लव काे बुलाया। पल्लव ये है पीसीआे वाले दद्दा जी और दद्दाजी ये है मेरा बैचमेट पल्लव। पल्लव ने भी झुककर पैर छू लिये। वह ताे उनकाे विपुल का रिश्तेदार समझ रहा था। विपुल कह रहा हे, पल्लव, आज मैं जाे कुछ हूं दद्दा जी के लिये हूं, इन्हाेंने मुझे नया जीवन दिया है। पल्लव सोचने लगका एक पीसीओ वाले का एक आईएएस काे नया जीवन देना कैसे हुआ?

विपुल कहने लगा, उस दिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा का परिणाम निकला था। मैं तीसरी बार भी फेल हाे गया था। मेरे व मेरे घरवालाें का सपना टूट चुका था। मैं शर्म से मरा जा रहा था। अपनी नाकामयाबी को छुपाने के लिये घर भी नहीं गया। मैं निरुद्देश्य भटक रहा था। घर में बूढ़े दादा-दादी आैर तीन छोटे भाई – बहन थे।, बिहार के एक छोटे से शहर में पिता जी की साधारण सी नौकरी, उन पर परिवार का बोझ आैर आत्म हत्या की सोच मुझे कितनी दूर ले आई पता ही नहीं चला। सामने एक पीसीआे देखकर अपने कर्तव्य की याद आई। पीसीओ में घुसते ही, पिता जी काे फोन लगाया। पिताजी मैं तीसरी बार भी प्रवेश परीक्षा में फेल हो गया। मैं आपके सपने पूरा नहीं कर सका। मैं जीना नहीं चाहता, आत्महत्या कर लूंगा। पिताजी कुछ कहते, इससे पहले ही मैंने फोन रख दिया। फोन रखकर जाने लगा, दद्दा जी ने बुलाया, बेटे पैसे ताे देते जाओ। मैं रुककर अपनी जेब टटाेलने लगा। जेब में पैसे ताे थे ही नहीं।

दद्दा जी शायद इतनी देर मेरी बात सुन रहे थे। पैसे के लिये राेकना ही शायद दद्दा जी का उद्देश्य था। मेरे से पूछा इंजीनियरिंग में दाखिला हाे जाये ताे आत्महत्या ताे नहीं कराेगे? मैं भौचक्का उन्हें देख रहा था। एक्जाम में फेल हाे गया, दाखिला कैसे हाेगा? इन्हाेंने अपना प्रश्न फिर दाेहराया। अब मेरे समझ में आ गया था। मैंने हां में सिर हिलाया। ठीक है, बैठाे पिताजी का नम्बर फिर से मिला दिया। फोन करके बताआे कुछ गलत काम नहीं कराेगे।

दुबारा फोन लगते ही, पिताजी बाले, बेटा तुम कुछ गलत काम मत करना। दादा-दादी परेशान हाेंगे, मैं अभी अभी रवाना हो रहा हूं। मैंने राेते-राेते कहा, मैं कुछ नहीं करूंगा। पीसीओ वाले अंकल जी कह रहे है, मेरा इंजीनियरिंग में दाखिला करा देंगे।

आप बात करिये। अंकलजी ने पिताजी काे कहा, आप बेटे के दाखिले के लिये आइये। आप निश्चिंत हाे जाइये, आपका बेटा कुछ नहीं करेगा। ये दद्दा जी का वादा है। दद्दा जी ने तुरन्त किसी काे फोन लगाया। अनिल मैं पीसीओ वाले दद्दा जी बोल रहा हूं। एक बच्चे का दाखिला करवाना है। वह परीक्षा नहीं पास कर सका है । अरे बच्चे के जीवन मरण का प्रश्न है। दाखिला नहीं होगा ताे वह आत्महत्या कर लेगा। मैंने वादा कर दिया है, मेरे पोते अर्णव की फीस तो जमा है। उसका दूसरे कालेज में एडमिशन हाे गया है। हां बेटे क्या नाम है? विपुल, मैंने कहा। विपुल है, बच्चे का नाम। दाे दिन बाद उसके पिता आयेंगे, दाखिला दे देना आैर सरकारी वजीफा भी दिला देना, हां-हां धन्यवाद।  मेरी तरफ देखकर बोले अब ताे खुश हो न। अपने प्रमाण-पत्र लेकर आना। अब घर जाआे दाे दिन बाद पिताजी, स्टेशन से मेरे साथ, सीधे दद्दा जी के पीसीआे गये। उन्हें अभी तक विश्वास ही नहीं हाे रहा था, एक पीसीआे वाला किसी बच्चे का इंजीनियरिंग कालेज में कैसे दाखिला करा सकता है। दद्दा जी हमारे साथ काॅलेज गये डायरेक्टर साब ने उनके पैर छुये। उन्हाेंने कहा, दद्दा जी, आपकाे आने की क्या जरूरत थी? आपने कह दिया, बस इतना ही काफी है। मेरा दाखिला हाे गया पिताजी आैर मैंने इनके पैर छुए। काॅलेज में पता चला, अंकल जी ने कई बच्चों का दाखिला करवाया, कई बच्चाें की फीस माफ करवाई। कई लोगाें को नौकरी दिलवाई। सब उन्हें दद्दा जी कहते हैं। दद्दा जी के पैर छूने पर इतना ही कहा एक अच्छे इंजीनियर के साथ-साथ एक अच्छा इंसान बनकर लोगाें की सहायता करना। मैंने दद्दा जी का सम्मान रखा। मेरी मेहनत का नतीजा सार्थक हुआ मैं काॅलेज में प्रथम व यूनिवर्सिटी में पांचवे स्थान पर रहा। कैम्पस सलेक्शन के बावजूद मैंने नौकरी नहीं की। काॅलेज में एक साल पढ़ाया।

दद्दा जी के कहने पर मैंने आईएएस की परीक्षा पास की। सरकारी योजनाआें का शिक्षा तथा अन्य क्षेत्रों में कार्यान्वियन करने के लिये ईमानदार आईएएस अफसराें की जरूरत है। दद्दा जी मेरे जीवन में देवदूत बन आये आैर दूसराें का भला करने की सीख दी।

पल्लव सोचने लगा जिस तरह दद्दा जी विपुल के जीवन में देवदूत बनकर आये। उसी तरह पल्लव की जिंन्दगी में विपुल भी देवदूत बनकर आया है। जिसने उसे निराशा से बचा लिया आैर एक नयी जिन्दगी दी और सुखानुभूति का अनुभव कराया। विपुल के उत्सव की खुशी उसकी जिन्दगी का एक सुखद अनुभव है। मेहमान जा चुके थे, नन्दन आ गया। भैया-भाभी आप भी चलिये खाना खा लीजिये। सुबह जल्दी उठकर घूमने जाना है। पल्लव देवदूत के सानिध्य से सुखानुभूति से अभिभूत डिनर के लिये सबके साथ हाे लिया।

 

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