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मेट्रो में प्रेम-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी

Love Short Story in Hindi: बात उन दिनों की है जब नई— नई शादी के बाद पहली बार रौनक विदा होकर अपने पति के साथ दिल्ली गई थी।एक तो अनजान शहर ऊपर से माता पिता के द्वारा की गई शादी जिसमें उसने शादी से पहले अपने पति से कभी मिली भी नहीं थी।मन में कई […]

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बड़ी जिज्जी-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Social Story in Hindi: मॉल से बाहर निकलते वक्त एक व्यक्ति को देख निधि के पैर ठिठक गए। अतुल जीजा जी!हाँ ये तो अतुल जीजा ही थे पर उन्होंने तो बड़ी जिज्जी के इस दुनिया के जाने के बाद यह शहर छोड़ दिया था।छोड़ दिया था या छोड़ना पड़ा।निधि की अंतरात्मा ने उसे धिक्कारा…उसके परिवार […]

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अनाम रिश्ता-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी

Hindi Short Story: गाडी दो घंटे लेट नई दिल्ली स्टेशन पर पहुंची। मुझे 10 बजे तक इंटरव्यू के लिए गंतव्य स्थान पर पहुंच जाना था। दिल्ली मेरे लिए नयी थी। घडी पर नजर फेंकी। सुबह के आठ बज रहे थे। जल्दी जल्दी स्टेशन के रेस्टिंग म में  खुद को फ्रेश किया। कपड़े  बदले निकल पडे। मेट्रो […]

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दो स्टेशन की दूरी-गृहलक्ष्मी की लघु कहानियां

Hindi Short Story: दिल्ली मेट्रो के भीतर हर चेहरा अपनी दुनिया में गुम था। कान में ईयरफोन, आंखें मोबाइल स्क्रीन पर और दिल… शायद किसी ने बंद कर रखे थे। लेकिन एक चेहरा आज थोड़ा अलग था — हल्की सलवटों वाली साड़ी, माथे पर छोटी सी बिंदी और कांपते हाथों में एक सादा थैला। उम्र […]

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लव इन ए मेट्रो-गृ​​हलक्ष्मी की लघु कहानी

Short Story in Hindi: मेट्रो की भीड़भाड़ वाली ट्रेन में खड़े होना एक आम बात थी, लेकिन आज कुछ अलग था। आज मुझे एक अनजान चेहरे से नजरें मिलीं और जैसे ही हमारी आंखें मिलीं, मेरा दिल धड़कने लगा। वह एक लड़की थी, जिसके बाल काले और आंखें बड़ी-बड़ी थीं। वह मेरे सामने खड़ी थी, […]

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गुलमोहर की वापसी-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी

Hindi Romantic Story: सुबह 9:10 की ब्लू लाइन मेट्रो हमेशा भीड़ से भरी होती है। स्टेशन अनाउंसमेंट की आवाज़ें, तेज भागते कदमों की हलचल और दिल्ली की भागती-दौड़ती ज़िंदगी । रिद्धिमा, 26 वर्षीया दृष्टिहीन, एक वॉयस टेक स्टार्टअप में ऑडियोबुक एडिटर, इस शोर के भीतर भी अपनी सुनने की कला से एक अलग दुनिया गढ़ […]

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घर की पुकार-गृहलक्ष्मी की लघु कहानियां

Short Story in Hindi: कल मुझे घर के ड्राइंग रूम ने आवाज दी कहां हो मेरी मैडम जी थोड़ा सा ध्यान दें दो न मुझपर पर्दे अपने पर पड़ी धूल मुझ पर गिराते हैं, और गंदे सोफे कवर मुझे न भाते हैं। बहुत दिन हो गये जरा साफ करदो,कवर्ड और टेबल ने भी कहा हमपर भी एहसान […]

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 अधूरी मोहब्बत-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Love Stories: ” रात का भोजन बन चुका है तो उसे खाने की मेज़ पर रख दीजिए आज हम दोनों साथ में रात का भोजन करेंगे बहुत दिनों से हम दोनों बहुत व्यस्त रहे हैं हमारी ज्यादा बातें भी नहीं हुई हैं शायद आज बातें लंबी चलें आप समय पर अपने घर चले जाना […]

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प्यार हुआ मेट्रो में जो कभी सोचा नहीं था—गृहलक्ष्मी की लघु कहानी

Romantic Story in Hindi: सुबह की वो आम सी दिल्ली मैट्रो – भीड़ वही जो रोज वाली थी , पर उस दिन कुछ अलग थी |कुछ लोग मोबाइल में डूबे हुए, कुछ किताबों में डूबे हुए और कुछ को तो मंजिल तक पहुंचने की जल्दी |रुका था वक्त कुछ पलों के लिए, जब उसकी आंखें […]

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 मेरे हमसफर बनोगे-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Motivational Story: शाम का धुंधलका दिल्ली के आकाश को आलिंगन कर रहा था। मेट्रो की नीली लाइन, शहर की साँसों-सी, धीरे-धीरे सरक रही थी। अक्षत खिड़की के पास बैठा, अपने विचारों के सागर में डूबा था। उसकी आँखें बाहर की चमकती रोशनी पर टिकी थीं, पर मन कहीं और भटक रहा था। राजीव चौक […]

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