Hindi Best Story: घर खानदान की बात थी सो सामाजिक उलाहना से बचने के लिए दोनों ने शादी करके छुट्टी पाई। ‘मम्मी, आप वही काम करती हैं जिसको पापा मना करते है’, सुधा का स्वर तल्ख था। ‘मैंने क्या किया?’ जया बोली। ‘आपने सब्जी में इतना मिर्च क्यों डाला?’ सुधा के कथन पर उसके पापा […]
Author Archives: श्रीप्रकाश श्रीवास्तव
अनाम रिश्ता-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी
Hindi Short Story: गाडी दो घंटे लेट नई दिल्ली स्टेशन पर पहुंची। मुझे 10 बजे तक इंटरव्यू के लिए गंतव्य स्थान पर पहुंच जाना था। दिल्ली मेरे लिए नयी थी। घडी पर नजर फेंकी। सुबह के आठ बज रहे थे। जल्दी जल्दी स्टेशन के रेस्टिंग म में खुद को फ्रेश किया। कपड़े बदले निकल पडे। मेट्रो […]
भागी हुई लड़की – श्रेष्ठ कहानी
Hindi Best Story: शादी सकुशल संपन्न हो गई। जयमाल के समय नयनतारा की खूबसूरती देखते बनती थी। किसी अभिनेत्री से कम नहीं लग रही थी जबकि लड़का सांवले रंग का सामान्य नाक-नक्शे वाला था। ‘नमस्ते’, मुझे देखते ही नयनतारा मुस्कुराकर बोलीं। एकाएक मैं उसे पहचान न सकी। मेरे पति ने मदद की।वे कानो में फुसफुसाये, […]
बोधभ्रम-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Romantic Story: शोभना से मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं था। पूरे दस साल बाद मिले। मेरीखुशी का ठिकाना न रहा। ऐसी ही खुशी से सराबोर मेैं शोभना के सामने उन स्मृतियों को टटोलने का प्रयास कर रहा था जिन्हे हम वर्षो पीछे छोड़ आये थे।शोभना अपने पति के साथ मुझसे मिलने आयी थी। […]
मातृत्व लौट आया: गृहलक्ष्मी की कहानियां
Grehlakshmi Ki Kahani: ‘ये तुम्हारा आखिरी फैसला है? अमित ने पूछा।‘हां, मैं नौकरी छोड़ना चाहती हूं। सरला ने बिना लागलपेट के बोला।‘सोच लो पच्चीस लाख का पैकेज है। दो साल में 40 लाख हो जाएगा, अमित ने लालच दिया।‘पैसा-पैसा-पैसा। आपको सिर्फ पैसा सूझता है। अपने बेटे की कोई फिक्र नहीं? सरला बिफरी।‘बेटे को क्या हुआ […]
कुछ तो खास है हमारे बनारस नगरी में—गृहलक्ष्मी की लघु कहानी
Story in Hindi: उस शहर की बात ही कुछ और होती है जहां आदमी आंखे खोलता है। ऐसा ही शहर है मेरा बनारस। यह वह शहर है जिसके कण—कण में भगवान शिव का वास है। अडभंगी शिव के मिजाज वाले इस शहर के लोग भी उतने ही अडभंगी है। न नफासत न दिखावा। चाहिए तो […]
शशि-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Sashi Hindi Story: वह जानती थी कि घर की जिन परिस्थतियों से गुजर रही है इससे बेहतर और कुछ नहीं हो सकता। पिता जी असमय चल बसे। घर की जिम्मेदारियों का बोझ बढ गया। तब वह पैतीस की चल रही थी। विवाह की सारी संभावनाए क्षीण पड चुकी थीं। न सोैतेली मां को कोई फ्रिक […]
जीवन के मायने: गृहलक्ष्मी की कहानी
Grehlakshmi Ki Kahani: ‘शिवानी’, पीछे से किसी ने आवाज दी। आवाज कुछ जानी-पहचानी सी लगी। मुड़कर देखा, ‘प्रशांत!’ अकस्मात् मेरे मुख से निकला। मैंने पहचानने में देर न लगाई। मेरी दोनों बेटियां रागिनी और बंदिनी पास के ही आईसक्रीम पार्लर में गयी थी और मैं पेड़ की छांव में खड़ी दोनों का इंतजार कर रही […]
घर वापसी: गृहलक्ष्मी की कहानी
Home Story: आधी रात होने को थी मगर अर्चना का कहीं अता पता नहीं था। यह कोई नयी बात नहीं थी। कभी-कभी आफिस के काम से उसे देर हो जाया करती थी। तो भी मोबाईल किस लिए है। कितनी बार कहा कि मोबाइल ऑन रखा करो। मगर उसके कान पर जूं नहीं रेंगती। कहती, ‘काम […]
मैं तुझ जैसी समझदार नहीं—गृहलक्ष्मी की कहानियां
Samjhdari: आज अचानक शीतल को घर आया देखकर मुझे किंचित आश्चर्य हुआ।‘‘तू कब आयी?’’मैने पूछा।‘‘थोडी देर पहले।’’.शीतल” ने बेरूखी से जवाब दिया।‘‘क्या बात है सब ठीक तो है न?’’मुझे संशय हुआ। मेरे कथन पर शीतल चिल्ला उठी। ‘‘मैं उस घर कभी नहीं जाउॅगी।’’ शीतल का इतना कहना भर था कि मेरासर्वांग कांप गया। भावी अनिष्ट […]
