Apologize Story: शिवांगी को मैंने सिर्फ इतना कहा कि यह घर मेरा है। तुम्हें यहां मेरे हिसाब से रहना होगा।’’ यह बात उसके दिल में चुभ गयी। अगले दिन अपना बोरिया बिस्तर बांध कर मायके चली गयी। मैंने लाख रोका मगर वह नहीं रूकी। सुबकते हुये कहती रही,‘‘मेरा घर तेा है नहीं। तो रहो अकेले। […]
Author Archives: श्रीप्रकाश श्रीवास्तव
तुम बिन जीवन कैसे बीता-गृहलक्ष्मी की कहानी
Hindi Love Story: मां के गुजर जाने के बाद मेरे जीवन में एक तरह से खालीपन आ गया था। मां होती तो लंच बनाती। भईया भाभी थे मगर उनकी अपनी जिंदगी थी। क्यों वे मेरे लिए सुबह सुबह लंच बाक्स तैयार करें? लिहाजा मेैं बिना लंच के स्कूल जाता। एक रेाज “यामली” से रहा न […]
पति पत्नी-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Husband Wife Story: पति पत्नी में कभी प्रेम नहीं हो सकता, जब तक वे जीवित है। यह प्रेम तभी उपजता है जब देानेां में से कोई साथ नही छोड देता। वर्ना शिकवा शिकायत बनी रहती है। लाख पत्नी जान दे दे या पति फिर भी एक दूसरे से असंतुष्ट रहते है। ऐसे ही एक रात […]
कशिश- लघु कहानी
Girl Story Hindi: पिछली रात बेचैनी से कटी। इस दौरान करवटें बदलती एक बात बार बार मुझे चुभती कि आखिर मधु ने कल मुझे अपने घर बुलाया क्येां? माना कि पहल मैंने की। लेकिन वह भी दोशमुक्त नहीं हो सकती। अगर उसने मौका न दिया होता तो बात यहां तक न पहुंचती। कहीं ऐसा तो […]
चार्जर-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी
Hindi Love Story: वह रोजाना साहिल से चार्जर मांगती। सुबह मांगती शाम को लौटा देती। कभी कभार सोचा जा सकता है मगर रोजाना मांगने का क्या तुक? मोबाइल है तो चार्जर भी होगा। साहिल को क्या कहे बिना उसकी तरफ नजरें फेंके चार्जर थमा देता। क्या साहिल को चार्जर की जरूरत नहीं थी? जेहन में […]
गुलाब कांटों के बीच ही खिलता है-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Kahaniya: आज फिर से काजोल ने मेरे साथ जाने का आग्रह किया। मेैं हमेशा की तरह ना कर सका। गोरी चिट्टी, इकहरे बदन की काजोल की उम्र तकरीबन पच्चीस साल की होगी। नाक नक्ष आर्कशक थे। खास तौर से उसके अधर ,जिसके दोनेा कोर धनुशाकार थे और सुर्ख गुलाबी रंग से नहाये रहते। लगता […]
पहला चुंबन, एक यादगार लम्हा
Hindi kahani : प्रेम का अतिरेक चुबन है। चुबंन, प्रेम की अभिव्यक्ति का माध्यम है। जो यह संकेत देता हेै कि कोई हमें किस हद तक अच्छा लगता है। प्रेम के मामले में चुंबन एक तरह से अधिकार जताने का तरीका है कि तुम सिर्फ मेेरी हो तभी तो मैंने तुम्हारे होंठों या गालेां को […]
पड़ोसी की बदलती परिभाषा—गृहलक्ष्मी की लघु कहानी
Neighbour Story: एक समय था जब पड़ोसियों का दर्जा रक्त संबंधों से भी उॅचा था। लोगों का विश्वास था कि संकट के समय में सबसे पहले पड़ोसी ही काम आते है। फिर रिश्तेदार—नातेदार। हर कोई अच्छा पडोसी चाहता था। उससे बेहतर व्यवहार की उम्मीद करता था और निश्चिंत रहता था। एक कप चीनी हो या […]
अग्निपरीक्षा-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी
Story of House Wife: रूबैदा का चेहरा और आंखे देानेां सूजी हुयी थी। ऐसा पहली बार नहीं था। अक्सर उसका ”शराबी” पति नशे में उसके साथ मार पीट करतां। पांच बच्चों की मां रूबैदा मेरे यहां साफ—सफाई का काम करती थी।‘‘क्यों पीटता है?’’ आज मुझसे रहा न गया।’’मेरी कमाई चाहता है,’’रूबैदा बोली।‘‘उसकी कमाई कहां जाती […]
चली चली रे पतंग मेरी -गृहलक्ष्मी की कहानी
The Kite Story: बचपन की यादों से मुक्त होना आसान नहीं होता। यह उस थाती की तरह है जिसे हर कोई सहेजकर रखता हैं। दोस्तों और बडे भाई-बहनों के साथ गुजारे पल जीवन का वह खुशनुमा पल होता है जिसे देाबारा जीने की लालसा होती है। पर अफसोस वह पल लौट कर नहीं आता। बचपन […]
