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 मेरे हमसफर बनोगे-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Hindi Motivational Story: शाम का धुंधलका दिल्ली के आकाश को आलिंगन कर रहा था। मेट्रो की नीली लाइन, शहर की साँसों-सी, धीरे-धीरे सरक रही थी। अक्षत खिड़की के पास बैठा, अपने विचारों के सागर में डूबा था। उसकी आँखें बाहर की चमकती रोशनी पर टिकी थीं, पर मन कहीं और भटक रहा था। राजीव चौक […]

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“उम्मीद से दुगुना”—गृहलक्ष्मी की लघु कहानी

Hindi Short Story: सड़क के किनारे एक बुजुर्ग मैले कुचले कपड़े में बैठ खिलौना बेच रहा था रोजाना की तरह। वहीं रास्तें से गुजरते हुए अचानक विभा रुक गई! और बुजुर्ग के पास आकर बोली :-” सुनो बाबा! इस मिट्टी के बर्तनों की क्या कीमत है? मुझे बताओ। तभी वह बुजुर्ग विभा को देखते हुए […]

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बंधन से मुक्त-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Bandhan se Mukt: दो महीने भी नहीं बीते थे उसकी शादी को। उसे यह कहकर ब्याह कर लाया गया था कि “उसे खूब पढ़ाएंगे, लिखाएंगे और एक अफसर बनाएंगे।” संध्या ने भी यह प्रस्ताव मान कर सास-ससुर और अपने होने वाले पति रमेश के सामने अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी। पर उसे कहां पता था […]

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“सोने का हार”-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Sone ka Haar: गले के हार को हर जगह ढूंढ़ लिया था अर्चना ने। अपने कमरे में, पुराने बैगों में भी, कहीं भी नहीं मिला। आज अपनी लापरवाही पर गुस्सा और रोना आ रहा था।मां और दीदियां उसे कितना समझाती थी, चीजों को यथास्थान रखो। पर नहीं, उसे अपनी आदत नहीं बदलनी थी और फिर […]

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“दो जून की रोटी” —गृहलक्ष्मी की लघुकथा

Roti Story: अम्माँ सुनो! आज खाने में कुछ भी नहीं है ऐसे कब तक चलेगा अम्माँ! बेटी व्याकुलता भरी आवाज में अम्माँ से कहती है।अम्माँ बेबसी भरी नजरों से अपनी बेटी को देखती हैं और कहती है – “लाडो आज तबियत ठीक नहीं है तू चली जा आज काम पर कुछ पैसे मिलेंगे तो घर […]

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