अनकही-“देख आ गया ना!” एक घंटे के इंतजार के बाद समीर का मुस्कुराकर ये कहना भी इतना खूबसूरत था जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। “हाँ आ गये” कहकर हँस दिया। वक़्त थम सा गया था। मानो कानों में एक साथ कई पैंजनिया झंकृत हो उठीं हो। “काश पहले आए होते!” “पहले बुलाया […]
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सोन चिरैया-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी
सोन चिरैया-एक खूबसूरत बाग में एक पीपल का हरा भरा पेड़ था जो सब को शीतलता प्रदान करता था और किसी के रहने का बसेरा भी था। वहा रहता था सोन चिरैया का छोटा सा परिवार तीन चूसे और एक चिरोटा बड़ा खुशहाल परिवार था सोन चिरैया का । रोज़ चिरैया जाती और चोंच में […]
बैल की पहचान-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं हिमाचल प्रदेश
बैल की पहचान-एक किसान और उसकी पत्नी बहुत मेहनती थे। अचानक किसान बीमार पड़ गया। उसने बैल क्रय कर लाने थे किन्तु बीमार आदमी मेले में कैसे जाए। बिना बैलों के किसान कैसा किसान। उसने अपनी पत्नी को नलवाड़ मेले से बैल क्रय करने को तैयार तो कर दिया पर वह बेचारी को तो बैल […]
पलाश-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं झारखण्ड
एक घना जंगल था। इसमें तरह-तरह के जंगली जीव-जन्तु रहते थे। जंगल तीन ओर से ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों से घिरा था और एक ओर एक बड़ी नदी बहती थी। पहाड़ बहुत ऊँचे थे और नदी बहुत गहरी और चौड़ी थी। इसे पार करना बहुत कठिन था। इसलिए बाहर का कोई व्यक्ति जंगल के भीतर नहीं पहुँच […]
परी और टूटू-21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां
परी और टूटू-“देखो, मैं आगे….।” “नहीं। मैं तुमसे आगे….।” परी मछली और टूटू कछुआ में बहुत ही अच्छी दोस्ती थी। वे चंपक वन के बगल से होकर बहने वाली चंदन नदी में रहते थे। चंदन नदी का पानी बहुत ही साफ और स्वच्छ था। दूर-दूर तक फैला नदी का किनारा और किनारे की चट्टानों से […]
शेखीखोर मुर्गा-21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां गुजरात
शेखीखोर मुर्गा-एक गांव था। उस गांव के पिछले हिस्से में एक मुर्गा रहता था। वह हमेशा अपनी बात को ही सच मानता था। मुर्गा रोज सुबह में बहुत जल्द उठ जाता था। कुकड कुक, कुक कुक रे… ऐसी बांग लगाता था। सुबह होती, सूरज उगता, फूल खिलते, पंछी भी चहकने लगते और गांव के लोग […]
“लौट आओ माँ “-गृहलक्ष्मी की कहानियां
लौट आओ माँ-हमारी शादी की आठवीं सालगिरह थी मेरे पति “आकाश” ने इस अवसर पर अपने कुछ खास दोस्तों और परिवार के लोगों को हमारी खुशी में शामिल होने के लिए घर पर आमंत्रित किया था । शाम ढलते ही मेहमान घर पर आने लगें,हम दोनों बहुत खुश थें, पर इस खुशी के अवसर पर […]
लेधा और तेंदुआ-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं झारखण्ड
लेधा और तेंदुआ-एक समय की बात है लेधा नाम का लड़का कुछ दूसरे लड़कों के साथ एक पहाड़ी के तराई में अपने मवेशियों की रखवाली कर रहा था, ये सभी लड़के खेल-खेल में आवाज लगाते थे, “हो, तेंदुआ-हो, तेंदुआ” और पहाड़ी से प्रतिध्वनि आती थी, “हो, तेंदुआ-हो, तेंदुआ।” वहां पहाड़ी पर वास्तव में एक तेंदुआ […]
न्यू असाइंटमेंट —गृहलक्ष्मी की कहानियां
न्यू असाइंटमेंट-महिलाओं को अलग पागलखाने में रखा जाता है, पुरुषों को अलग..यह उसे पता था और वह महिला मानसिक चिकित्सालय के सामने थी। उस दिन प्रिया किसी स्टोरी के सिलसिले में वहाँ गई थी…हाँ उसके लिए तब तक वह महज़ अख़बार की दृष्टि से की जाने वाली मानवीय दृष्टिकोण की कोई अगली ख़बर या कहानी […]
‘बदलते रिश्ते’—गृहलक्ष्मी की कहानियां
बदलते रिश्ते-“सारा सामान समेट कर क्यों जा रही हो?” सरला ने बेटी की आंखों में देखते हुए बड़ी ही सरलता से पूछ लिया। “मुझे पता था कि आप ये सवाल करेंगी!”सोनिया ने बड़ी ही बेपरवाही से कहा और अपने सामान रखने लगी तो सरला से रहा न गया और वह बिफर पड़ी।“नौकरी लगी है शादी […]
