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सोन चिरैया-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी
Soan Chiriya-Short Story

सोन चिरैया-एक खूबसूरत बाग में एक पीपल का हरा भरा पेड़ था जो सब को शीतलता प्रदान करता था और किसी के रहने का बसेरा भी था। वहा रहता था सोन चिरैया का छोटा सा परिवार तीन चूसे और एक चिरोटा बड़ा खुशहाल परिवार था सोन चिरैया का । रोज़ चिरैया जाती और चोंच में दाना दबा कर लाती और अपने बच्चों को खिलाती।एक दिन सोन चिरैया पर दुखों का पहाड़ टूट गया।एक दिन चिरोट उड़ते उड़ते एक शिकारी के जाल में फंस गया।उसने बहुत कोशिश की पर जाल नही काट पाया । वहां पेड़ पर सोन चिरैया और बच्चे चिरोटे का इंतजार कर रहे थे।चिड़िया बोली तुम दोनों अपना ध्यान रखना ,मैं अभी तुम्हारे पापा को देख कर आती हूं।और सोन चिरैया उड़ गई ,उसने कई पेड़ , तालाब, आदि देखा ढूंढा पर चिरोटा नहीं मिला अब सोन चिरैया की आंखों में आंसू थे ,अचानक चिड़िया ने देखा की एक शिकारी चिरोटे को जाल में फंसा कर अपने साथ ले जा रहा था।सोन चिरैया चिरोटे के पास गई और बोली तुम परेशान मत होना , मैं अभी जाल काटती हूं चिरोटा बोला तुम बच्चों के पास जाओ मेरी हालत नहीं की मैं अब उड़ सकूं और चिरोटा रोने लगा पर सोन चिरैया कहा हार मानने वाली थी।और उसने शिकारी का जाल काट दिया और चिरोटे को अपने साथ उड़ा कर ले आई।पर चिरोटा घायल था तो कुछ ही दिन में  
चल बसा ,अब तो सोन चिरैया पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।बच्चे छोटे थे और ना समझ और उड़ना भी नहीं जानते थे। और एक काला कौवा जब चिड़िया दाने लेने जाती ,तो वो कौवा बच्चों को परेशान करता ।बहुत तकलीफों से गुजरते हुए चिड़िया के बच्चे बड़े होने लगे और उड़ना भी सीख गए। एक दिन घोंसले पर एक चिरोटा आया और एक चिड़िया को उड़ा ले गया।अब उस पेड़ पर सोन चिरैया और उसका एक बच्चा ही रह गया। दोनों हंसी खुशी से रहते।पर अब सोन चिरैया बहुत कमजोर हो गई थी इन जिंदगी के थपेड़ों ने उसे हरा दिया।पर वो जिंदगी  की जंग हार गई। और अपने छोटे बच्चे को अकेला कर इस धरा से विदा हो गई।ये थी एक प्यारी सी सोन चिरैया की कहानी ।

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