बैल की पहचान-एक किसान और उसकी पत्नी बहुत मेहनती थे। अचानक किसान बीमार पड़ गया। उसने बैल क्रय कर लाने थे किन्तु बीमार आदमी मेले में कैसे जाए। बिना बैलों के किसान कैसा किसान। उसने अपनी पत्नी को नलवाड़ मेले से बैल क्रय करने को तैयार तो कर दिया पर वह बेचारी को तो बैल […]
Author Archives: राकेश कुमार
लचकती सब्जी और पतला भात-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं उत्तर प्रदेश
लचकती सब्जी और पतला भात-दो भाई बूढ़ा-बूढ़ी के घर सहभागिता निभाने चले गए थे। उन्होंने सोचा था कि उन्हें दोपहर और सांय बढ़िया स्वादु भोजन खाने को मिलेगा। इस कारण उन्होंने मन लगाकर उनका काम किया था। दोपहर को तो उन्हें उनका मन भावन खाना नहीं मिला। उन्होने थोड़ा-थोड़ा खाना ही खाया था। उन दोनों […]
जूएं-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं उत्तर प्रदेश
जूएं-बहुत पुराने समय की बात है, रातकू कार्य करने में बहुत कम श्रम लगाता था। वह सब-कुछ बैठे-बिठाए पाना चाहता था। बस वह अपनी दादी मां से मुफ्त और हर वस्तु मिलने के लिए पूछता रहता था। उसकी दादी ने उसे कई बार समझाया कि परिश्रम के साथ कमाया हुआ ही फलता-फूलता है। जो आदमी […]
रिक्त हस्त-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं उत्तर प्रदेश
रिक्त हस्त-एक सेठ था। वह जो भी रुपया-पैसा कमाता, उसे धरती में दबा कर इकट्ठा करता रहता था। कई वर्ष बीत गए, उसका धन बढ़ता ही रहा। खर्च करने का उसने कभी सोचा ही नहीं। एक दिन क्या हुआ कि उसे ले जाने यमराज के दूत आ गए। “चल-चल रे, हम तुझे ले जाने आए […]
सुयोग्य लड़की-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं उत्तर प्रदेश
सुयोग्य लड़की-दो सयाने बहू बनाने के लिए लड़की ढूंढने लगे थे। लड़की बुद्धिमति और काम-काज में निपुण हो। चलते-चलते वे एक घर के पास पहुंचे, जहां एक लड़की आंगन में रसोई बना रही थी। वृद्धों को वह पसन्द आ गई किन्तु उसकी परीक्षा लेना अभी शेष थी। एक सयाने ने वह पूछ ही ली, “बेटी, […]
भेड़े नहीं मिमयाती-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं उत्तर प्रदेश
दो चोर थे जी। एक का नाम था किश्न, दूसरे का नाम था चरनू। चरनू चोर किश्नु से सौ गुना चालाक और उस्ताद था। एक दिन उन्होंने गद्दी की ओर चोरी करने की सोची। गद्दी सीधा-सादा आदमी था। वह एक जगह बैठा था और उसके चारों ओर भेड़-बकरियां और भेडू-बकरों के रेवड़ भरे पड़े थे। […]
वृद्ध-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं उत्तर प्रदेश
पुराने समय की बात है, कंधारी गांव के नजदीक किसी से वन में आग लग गई थी, राजा के पास समाचार पहुंचा तो उसने गांव की औरतों और बच्चों को छोड़ सभी मर्दो को बुला लिया। गांव में एक ही वृद्ध था। उसने चलने से पहले सबको समझाया कि वन में आग लगाना कतई ठीक […]
ढोल में वृद्ध-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं उत्तर प्रदेश
एक गांव में वृद्धों की इज्जत नहीं होती थी। सभी वृद्धों ने कुछ दिनों तक तो अपने परिवार वालों को अपने स्तर पर बहुत समझाया। किन्तु किसी भी परिवार के लोग नहीं सुधरे तो उन्होंने कहना ही छोड़ दिया। उन्हें जैसी भी रूखी-सूखी मिलती, खाकर चुप रहते थे। उनसे जितना कार्य हो जाता था कर […]
बुराई का फल-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं उत्तर प्रदेश
सयाने सच कहते हैं कि तलाई के बिगाड़े रजाई से सुधारे नहीं जा सकते। ठाकरू भी वैसा ही था। उसे हमेशा पंगा लेने को मिर्ची लगी रहती थी। वह कभी पाखी-पखेरूओं तो कभी कुत्ते-बिल्ली को मारने के लिए तत्पर रहता था। सच यह था कि वह कुबुद्धि व्यक्ति हर कहीं हर किसी को छेड़ता रहता […]
गुदडी में लाल-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं उत्तर प्रदेश
सिर में ऊनी टोपी, ऊनी पजामा और कोट पर सेला बांधे गद्दी ने सजी-धजी दुकान में प्रवेश किया तो दुकानदार और वहां चाय पीते ग्राहकों ने उसे अजूबे की तरह देखा। गद्दी ने सजीली दुकान और वहां बैठे लोगों पर एक नजर डाली और खाली कुर्सी पर बैठते हुए कहा, “लालाजी, एक चाय और पाव […]
