काला और गोरा- गेहूं और उड़द की शादी हो गई थी। पर जी, गेहूं अपने को बहुत सुन्दर समझती थी। अपने को गोरा-गोरा कह कर आनंद में रहती थी जबकि उड़द को काला-काला कहकर हमेशा उसका अपमान करती रहती थी। उड़द उसे कुछ नहीं कहता था, बस हंस कर टाल देता था। महीने बीत गए […]
Author Archives: राकेश कुमार
बेअक्ल-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं उत्तर प्रदेश
शोभलू खशिये को रोटी की समस्या भी हो आई थी। उसने यह सोचा तक न था कि उसे कभी भूखे रहना पड़ेगा। बहुत हाथ-पांव मारने के बाद उसे एक दोस्त से चार रोटियां और चौदह मन अनाज की पर्ची मिल गई। वह पर्ची उसने दुकानदार को देनी थी और उसे चौदह मन अनाज मिल जाना […]
सौतन का ताल-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं उत्तर प्रदेश
सयाने कहते हैं कि सौतन का दीवार पर बनाया चित्र भी बुरा होता है। महाराज जी, एक मर्द की दो पत्नियां थी। एक उसे अपनी ओर खींचती तो दूसरी अपनी ओर खींचती थी। पर वह जाए तो किसकी तरफ। पंगा तो उसने आप ही लिया था। प्यार-प्रेम से रहने के लिए समझाने का उनके ऊपर […]
खाली माली-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं उत्तर प्रदेश
बहुत पुराने समय की बात है। भाटकू ठाकर के गांव का नाम पाली था। अचानक उसके पिता की मृत्यु हो गई। अपने बाल कटवाकर, अपने पिता की अस्थियां चुनकर वह हरिद्वार को चल पड़ा था। जाने से पहले उसे सभी ने बहुत समझाया कि वह रास्ते पर ठीक से जाये। पैसा-धेला सम्हाल कर रखकर गंगा […]
चोलू दे दो-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं उत्तर प्रदेश
पति और पत्नी थे। पत्नी परिश्रम से जी चुराती थी। बैठे-बैठे वह देवता से मांगती रहती थी। जब उसका घाघरा फट गया तो वह धनेश्वर देवता के मन्दिर जाने लगी और घाघरा मांगने लगी। प्रतिदिन वह पूजा की थाली लेकर मन्दिर जाती और घाघरे की मांग करती। एक दिन उसका पति पीछे से चला गया। […]
मेंढक और चूहे-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं उत्तर प्रदेश
मेंढक और चूहे आपस में नाता-रिश्ता लगाने के लिए राजी हो गए थे। बरसात के दिन थे और चूहे बिना काम के पड़े थे। वे मेंढकों के घरों में नाता-रिश्तेदारी करने चले गए। मेंढ़कों को तो खड़े होकर बात करने तक का वक्त न था। उन्होंने कहा कि वे अभी रिश्तेदारी नहीं कर सकते हैं। […]
पंजकल्याणा-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं उत्तर प्रदेश
भले समय की बात है कि एक शेर दिल, चुस्त और परिश्रमी तथा निर्भय पंजकू नाम का व्यक्ति खुड्डी गांव में रहता था। एक बार उसके गांव में फसल नहीं हुई और उसने राजा को कर देना बन्द कर दिया। नम्बरदार ने उसे कर देने के लिए बहुत डराया किन्तु वह बिलकुल मुकर गया। अगर […]
काले कौए की कहानी-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं उत्तर प्रदेश
एक बार की बात है। एक ऋषि ने एक सफेद कौवे को अमृत की तलाश में भेजा लेकिन कौवे को ये चेतावनी भी दी, “तुम्हें केवल अमृत के बारे में पता करना है, उसे पीना नहीं है। अगर तुमने उसे पी लिया तो तुम इसका कुफल भोगोगे।” कौवे ने ऋषि की बात सुन कर हामी […]
शेखचिल्ली और कुएं की परियां-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं उत्तर प्रदेश
एक गांव में एक सुस्त और कामचोर आदमी रहता था। काम-धाम तो वह कोई करता न था, हां बातें बनाने में बड़ा माहिर था। इसलिए लोग उसे शेखचिल्ली कहकर पुकारते थे। शेखचिल्ली के घर की हालत इतनी खराब थी कि महीने में बीस दिन चूल्हा नहीं जल पाता था। शेखचिल्ली की बेवकूफी और सुस्ती की […]
सिंहल द्वीप की पद्मिनी-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं उत्तर प्रदेश
किसी जंगल में एक सुन्दर बगीचा था। उसमें बहुत-सी परियां रहती थीं। एक रात को वे उड़नखटोले में बैठकर सैर के लिए निकलीं। उड़ते-उड़ते वे एक राजा के महल की छत से होकर गुजरीं। गरमी के दिन थे, चांदनी रात थी। राजकुमार अपनी छत पर गहरी नींद में सो रहा था। परियों की रानी की […]
