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शेखीखोर मुर्गा-21 श्रेष्ठ बालमन की कहानियां गुजरात
Sekhikhor Murga

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

शेखीखोर मुर्गा-एक गांव था। उस गांव के पिछले हिस्से में एक मुर्गा रहता था। वह हमेशा अपनी बात को ही सच मानता था।

मुर्गा रोज सुबह में बहुत जल्द उठ जाता था। कुकड कुक, कुक कुक रे… ऐसी बांग लगाता था। सुबह होती, सूरज उगता, फूल खिलते, पंछी भी चहकने लगते और गांव के लोग जाग उठते।

मुर्गा यह सब देखता रहता था। एक दिन उसे लगा कि मैं बोलता हूँ इसलिए ही सुबह होती है। सूरज भी मेरे बोलने पर उगता है। सारे फूल खिलते हैं, पंछी भी अपने घोंसले से बाहर निकलते हैं। अगर मैं नहीं बोलूंगा तो सुबह ही नहीं होगी। फिर तो सूरज ही नहीं उगेगा। पूरी दुनिया में अंधेरा फैल जाएगा। फूल नहीं खिलेंगे। ये पंछी, ये प्राणी सब मूर्ख हैं। लोगों को मेरी कोई कीमत ही नहीं है। अब तो कुछ चमत्कार करना पड़ेगा, तभी लोगों को मेरी कद्र होगी।

मुर्गा रोज की आदत के मुताबिक, अपने दाने-पानी की खोज में निकल पड़ा। गांव के पिछले हिस्से में पंछी दाना चुगते थे, पशु अपना चारा चरते थे। वहां जाकर मुर्गे ने सबको बहुत धमकाया। वह जोर-शोर से बोलने लगाः “मैं बांग देता हूँ इसलिए ही सुबह होती है। मैं अगर ना बोलूँ तो सूरज भी नहीं उगेगा और तुम सब जी नहीं पाओगे। तुम सबने मुझे सलामी देनी होगी।”

सभी पंछी और प्राणियों को आश्चर्य हुआ! वे सब दाना चुगना और अपना चारा चरना बंद करके मुर्गे के पास आए।

“क्या बात है मुर्गा भाई? आज कुछ अलग अंदाज में दिख रहे हो “मोर भाई ने बात करने की शुरूआत की।

मुर्गा ठेक लगाकर एक टेकरी पर चढ़ गया। उसने अपना गला फुलाया और कहा, “दोस्तों, मेरी बात ध्यान से सुनिए। मेरी बात पर विश्वास रखिए। मेरी बात सुनकर तुम सभी को मेरा मान-सम्मान करना होगा। मेरी पूजा करनी होगी।”

सभी पंछी और प्राणी मुर्गे की बात ध्यान से सुनने लगें। मुर्गे ने अपनी कलगी को उछालकर फिर अपने पीछे को फैलाया। मुर्गा बोलाः “दोस्तों, मैं बांग लगाता हूँ तो ही सुबह होती है। सूरज उगता है, फूल खिलतें हैं। पंछी अपने घोंसले में से बाहर निकलते हैं। गांव जगता है और कामकाज शुरू होता है। मेरे बोलने से यह सब होता है, नहीं…तो…

“मतलब आप कहना क्या चाहते हो?” लेला भाई ने ठुमका लगाते हुए कहा।

“लेला भाई तुम समझे नहीं। मैं बोलूंगा तो ही सुबह होगी। मैं नहीं बोलूंगा तो सुबह नहीं होगी। सूरज नहीं उगेगा, फूल नहीं खिलेंगे। लोगों को अंधेरे में बैठे रहना पड़ेगा।”

सभी पंछी और प्राणी मुर्गे को रोज सुबह में बांग लगाते हुए देखतें थे। उसके बाद ही सूरज निकलता था और सुबह होती थी इसलिए उन सबको मुर्गे की बात सच लगी

सभी पंछी और प्राणियों ने मुर्गे को सलामी दी, उसके पैर तक छूने लगें सभी ने मुर्गे की जय-जयकार की।

एक बंदर बनियन की शाखा पर बैठा था। वह कब से यह तमाशा देख रहा था। मुर्गे की बात सुनकर बंदर हंसने लगा। वह छलांग लगाकर नीचे आ गया। उसने सभी पंछी और प्राणियों को कहाः “दोस्तों, तुम सब इस मुर्गे की बात में आ गए। वह तुम्हें उल्लू बना रहा है।”

बंदर की बात में सबको कुछ दम लगा। सब उसकी बात सुनने को उत्सुक हुए।

बंदर ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहाः “दोस्तों, मुर्गा बोले या न बोले सुबह तो होती है, सूरज तो उगता है। फूल खिलते हैं। रात-दिन तो ईश्वर बनाता है। सब-कुछ उसकी कृपा से होता है।”

वहां पर एक तोता भी था। उसको बंदर की बात सच लगी। उसने सबसे कहाः “मुर्गे का घमंड उतारना है? उसको सबक सिखाना है? मैंने एक युक्ति सोची है। हम आज रात उसको हमारा मेहमान बनाए। फिर उसके खाने में नशे की चीज मिला दें। उस नशे की वजह से वह सारी रात सोता रहेगा।

सुबह देर से उठेगा और बांग लगाना भी भूल जाएगा। फिर देखते हैं, सुबह तो फिर भी होगी, सूरज भी उगेगा और मुर्गे की पोल पकड़ी जाएगी।

तोते भाई की बात से सब सहमत हुए। मुर्गे को मेहमान बनाया गया। सबने उसका मान-सम्मान किया। तोते ने आग्रह करके उसको खूब खिलाया, पिलाया। मुर्गे ने सबका शुक्रिया माना।

बाद में मुर्गे को नींद आने लगी। वह तो गहरी नींद में चला गया। सब पंछी और प्राणी जागते हुए चुप बैठे रहें। सुबह होते ही पूर्व दिशा में सूरज की किरणें फैलने लगी। पंछी चहकने लगे, गांव जाग उठा।

मोर भाई ने मुर्गे को जाते हुए कहाः “मुर्गा भाई देखो, तुमने कुकडे-कुक नहीं किया है फिर भी सुबह तो हुई है। सूरज भी उगा है, फूल खिलें हैं। तुम हमें मूर्ख बनाते हो। बंदर भाई की बात सच है।”

मुर्गा घबरा गया। उसको सच बात समझ में आ गई। उसने सबसे माफी मांगते हुए कहाः “दोस्तों, मुझे माफ कर दो। मैं गलत सोच बैठा था। सुबह और शाम ईश्वर ही बनाता है। उसकी वजह से सूरज उगता है। हमें ईश्वर का पूजन और वंदना करनी चाहिए।”

सभी पंछी और प्राणी प्रभु के गुणगान गाने लगे। मुर्गा भी सबके साथ गाने लगा।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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