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मैं बहुत फोटो खिंचवाती हूं-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Kavita: हां मैं बहुत फोटो खिंचवाती हूंक्योंकि बीता वक्त लौटकर नहीं आता! तुम्हें क्या पता वह केवल तस्वीर नहीं होती उस तस्वीर में होती हैतुम्हारी, मेरी, बच्चों की प्यारी-प्यारी मुस्कुराहट उस तस्वीर में होती है मेरे बच्चों का बचपन, उनका नटखटपन, उनकी शरारते मैं सब कुछ इन कैमरों में कैद कर लेना चाहती हूं!मैं […]

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मायका-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Family House Story: सुहानी अपने माता पिता की एकलौती बेटी थी घर में बहुत लाड प्यार से उसको पाला जा रहा था,, उसको मायके की इतनी परवाह बोझ लगने लगी थी अब घर में जब उसकी शादी की बात चली तो उसको लगा कि किसी के साथ भी उसको बांध दिया जायेगा…  अपने ही पापा […]

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एक नया सूर्योदय-गृहलक्ष्मी की कहानियां

New Beginning Story: बाहर सड़क में सन्नाटा पसरा हुआ था इक्का-दुक्का जाते हुए वाहनों के शोर सुशील जी के कानों में शोर मचाते हुए पार हो जाते थे। कई बार वह सोचते काश कोई उनके दरवाजे आकर रुके और उनसे उतर कर उनके तीनों बच्चों में से कोई उन्हें सरप्राइस कर जाए।“… पापा हम आ […]

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ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा -गृहलक्ष्मी की कहानी

Life Story in Hindi: “ माँ ये रही रामेश्वरम की दो टिकट्स ।आप दोनों को हम सभी की तरफ़ से विवाह की पचासवीं सालगिरह पर छोटा सा गिफ़्ट “ “ रामेश्वरम …..” अचानक मिले गिफ़्ट से मैंने हैरानी से अपने बेटे वरुण को देखा “ हाँ माँ रामेश्वरम …मैं जानता हूँ वहाँ जाना आपकी सिर्फ़ […]

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होली है..-गृहलक्ष्मी की कविता

Holi Poem: प्रेम विश्वास का पर्व ये होलीवैर द्वेष को आओ मारें गोलीहोली है… न रहे मन में अब कोई गांठ बाकीनिस्वार्थ प्रेम दिलों में भर देंआओ रंगों से ये जीवन रंग देंमधुर संदेश देने आयी देखो फिर से यें रंगीली होली “मैं” को भूलो “हम” को जीयो“मैं” कि मुक्ति से जीवन बने ये सुन्दरजो […]

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कल रात-गृहलक्ष्मी की कहानी

Hindi Kahani: आज शाम से ही ना जाने क्यों….? बारिश थमने का नाम नहीं ले रही है। स्वाति भी बेचैनी से इधर उधर टहल रही है। कभी वह खिड़की के पास जा कर खड़ी  हो जाती, तो कभी गैलरी में, बचपन से ही स्वाति को बारिश की फुहारें पसंद है। बारिश की फुहारों से चेहरे […]

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कविता की हिम्मत-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Girl Courage Story: कविता की अमन के साथ सगाई हो गई ।दो महीने बाद शादी की तारीख पक्की कर दी गई ।शादी की तैयारियां बड़े जोर-शोर से चल रही थीं।और हो भी क्यों ना, परमिंदर जी की की इकलौती बेटी की शादी थी।उनकी पत्नी पूनम बड़े चाव से एक -एक चीज जुटा रही थी,बेटी के लिये।उनका […]

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संतोषी हरदम सुखी-21 श्रेष्ठ बुन्देली लोक कथाएं मध्यप्रदेश

Hindi Moral Story: किसी समय एक गाँव में एक पति-पत्नी बुधुआ और लछमी गरीबी के कारण लकड़ी काट-बेचकर अपना पेट भरते थे। लछमी लकड़ी बेचने जाते समय लकड़ी के गट्टे से एक लकड़ी निकालकर आँगन के एक कोने में रख देती और सपरने (नहाने) के बाद हर दिन आँवले और पीपल के वृक्ष में पानी […]

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कटी पतंग-गृहलक्ष्मी की कहानियां

Kite Story: ससुराल में मेरी पहली मकर संक्रांति थी ठंडी की छुट्टियों पर पूरा परिवार इकट्ठा था मेरी ननद भी अपने दोनों बच्चों और पति के साथ आयी हुई थी छत पर सब पतंग उड़ा रहे थे। उन्हें एक साथ पतंग उड़ाता देख कर मुझे मेरा बचपन याद आ गया । अपने मायके में बचपन […]

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आराध्य—गृहलक्ष्मी की कहानी

Motivational Kahani: मोहित पाँच बहनों का इकलौता भाई है। उसके पिताजी का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता है। वह स्नातकोत्तर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के उपरांत सरकारी नौकरी के लिए आवेदन कर रहा है। बार-बार प्रयास के पश्चात भी उसे सफलता नहीं मिल रही है। एक दिन उसे समाचार पत्र में प्राइवेट नौकरी का विज्ञापन दिखाई […]

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