Overview: नसीरुद्दीन शाह vs मनोज मुंतशिर
मनोज मुंतशिर ने नसीरुद्दीन शाह के उस बयान का जवाब दिया जिसमें उन्होंने देश के बदलने पर दुख जताया था। मुंतशिर ने कहा कि पुराना भारत तुष्टीकरण का शिकार था, जबकि आज का 'नया भारत' आत्मसम्मान से भरा और बेहतर है।
Muntashir vs Naseeruddin: मशहूर गीतकार मनोज मुंतशिर और दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के बीच ‘पुराना भारत बनाम नया भारत’ की बहस ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। नसीरुद्दीन शाह के एक हालिया बयान पर पलटवार करते हुए मनोज मुंतशिर ने उन्हें ‘दो टूक’ जवाब दिया है, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। हाल ही में नसीरुद्दीन शाह ने मुंबई यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम (‘जश्न-ए-उर्दू’) से अंतिम समय में अपना नाम हटाए जाने (Disinvite) पर नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने एक ओपिनियन पीस में कहा था कि “जिस भारत में मैं बड़ा हुआ, यह अब वो भारत नहीं रहा जिसे मुझे प्यार करना सिखाया गया था।”
मनोज मुंतशिर का ‘नया भारत’ वाला तर्क
मनोज मुंतशिर ने नसीरुद्दीन शाह के बयान पर सहमति जताते हुए उन पर तंज कसा। उन्होंने कहा, शायद वो सही हैं: मनोज ने कहा कि नसीर साहब बिल्कुल सही कह रहे हैं कि यह वो भारत नहीं है जिसमें वे बड़े हुए। मुंतशिर के अनुसार, “नसीर साहब और मैं जिस भारत में बड़े हो रहे थे, वह ‘तुष्टीकरण’ (Appeasement) का देश था। वहां कुछ खास वर्गों को खुश करने की राजनीति होती थी। लेकिन आज का भारत अलग है।”

“यूनिवर्सिटी की आजादी” पर सफाई
नसीरुद्दीन शाह को कार्यक्रम से बाहर किए जाने के आरोपों पर मनोज ने स्पष्ट किया, मनोज ने कहा कि भारत में विश्वविद्यालय (Universities) स्वतंत्र रूप से चलते हैं। उनका अपना मैनेजमेंट होता है और वे सरकार के सीधे इशारों पर काम नहीं करते। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह कहना कि सरकार ने उन्हें रोका है, गलत जानकारी हो सकती है क्योंकि ये संस्थान ऑटोनॉमस (Autonomous) होते हैं।
“कलाकार बड़े हैं, पर विचार अलग”
मनोज मुंतशिर ने नसीरुद्दीन शाह की कला की तारीफ की लेकिन उनकी विचारधारा को आड़े हाथों लिया, उन्होंने कहा कि नसीरुद्दीन शाह एक महान कलाकार और शानदार अभिनेता हैं, हम सब उनका बहुत सम्मान करते हैं। मनोज ने दो टूक शब्दों में कहा, “यह नया भारत है, यह एक बेहतर और अच्छा भारत है। मुझे यह नया भारत पुराने वाले से कहीं ज्यादा पसंद है।”
नसीरुद्दीन शाह का पक्ष क्या था?
नसीरुद्दीन शाह ने आरोप लगाया था कि उनके राजनीतिक विचारों और ‘विश्वगुरु’ जैसी शब्दावली की आलोचना करने की वजह से उन्हें 1 फरवरी 2026 को होने वाले कार्यक्रम से अंतिम समय पर बाहर कर दिया गया। उन्होंने इसे अपमानजनक बताया था और कहा था कि देश में असहमति की आवाज को दबाया जा रहा है।
