कुछ पल अपने लिए—गृहलक्ष्मी की कविता: Hindi Poem
Kuch Pal Apne Liye

Hindi Poem: कुछ लम्हे सुकून के अपने लिए….
बहुत जी लिया दुनिया के लिए,
चलो सखियों आज अपने लिए जीते हैं,
इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में,
कुछ लम्हे सुकून के अपने लिए जीते हैं।
छुट्टियां तो सबको ही चाहिए,
फिर हमें एक इतवार भी क्यों नहीं?
चलो बहनों आज यही प्रश्न उठाते हैं,
इसी बहाने जिंदगी का कुछ अलग लुत्फ उठाते हैं।
आज कुछ अपना मनपसंद करके,
नृत्य हो या कैनवास पर कलर करके,

कहीं भीतर छिपा हुनर आज दिखाते हैं,
चलो आज दुनिया को खुद से मिलाते हैं।
जिंदगी निकल गई सबकी खातिर,
हम रोज ही सबके लिए कुछ करते हैं,
आज जरा  सा ठहर कर मुस्कुरा कर देखें आईना,
आज हम खुद को ही खुद से मिलाते हैं।
आज कुछ लम्हे सुकून के अपने लिए ….