Hindi Stories: गुलाबी साड़ी पहनी मैं ड्रेसिंग टेबल के सामने खड़ी कभी अपने लंबें काले बालों को देखती तो कभी अपनी सुंदर आँखों को देखती और खुद से बोल उठती इतनी भी बदसूरत तो नहीं हूँ जैसा लोग मुझे कहते हैं।
कुछ ही घंटों के बाद हजारों लोग मुझे स्टेज पर देखेंगे।कहीं मेरे सांँवले रंग रूप पर लोग हँसे न और कहीं वाकई मेरी कविता सुनकर सड़े गले टमाटर, अंडे और चप्पलें न फैंकने लगें मुझ पर,जैसा कई बार कवियों और गायकों के साथ होता है।
जब मैंने अपना यह डर अपने पति को बताया तब मुझे अपनी बाहों में थाम उन्होंने मेरे माथे पर आए बालों को अपनी उंगलियों से पीछे करते हुए कहा,” तुम बहुत सुन्दर हो सलोनी खुद पर विश्वास रखो तुम्हारी ये बोलती आँखें और कोयल सी मीठी आवाज में जो आकर्षण है वह अद्भुत है। कोयल की आवाज सुन जिस तरह नजरें उसे खोजती हैं और उसे देखते रहना चाहती है ,तुम्हारी आवाज़ भी बिल्कुल वैसी ही है।
तुम्हारे अंदर जो प्रतिभा है वो देखना तालियों की गूंज में सुनाई देगी। तुम्हारी काबिलियत यह दुनिया देखेगी। रंग रूप तो सिर्फ बाहरी दिखावा मात्र होता है। मेरी नज़रों में तुम दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत हो । साक्षात सरस्वती माँ तुम्हारे कंठ में बसी हैं और तुम्हारे लिखे गीत पढ़ सुन कर मन एक खुबसूरत दुनिया में गोते खाने लगता है।”
सलोनी को अपने पति की आँखों में जो प्रीत का रंग दिखाई दिया उसके अंदर आत्मविश्वास भर गया। हाँ रंग काला हुआ तो क्या हुआ मेरे हर गीत में सौंदर्य झलकता है ।
रात को जब कवि सम्मेलन से लौटकर आई तो अपनी खुशी छुपाना मुश्किल लग रहा था अपने पति की बाँहों में सिमटती मैं खुद को स्वर्ग में पा रही थी।
तभी वो बोले..
“सच सलोनी तुम्हारे उस प्रेमगीत के बाद जो तालियों की आवाज से पूरा हॉल गूंज उठा था वो गूंज अब तक सुनाई दे रही है। तुममें वाकई अद्भुत आकर्षण है।”
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