Hindi Kahaniya: “दीदी, नीचे आ जाओ एक बढ़िया खबर है। तुम्हारी किस्मत खुल गई है और सत्यम की तो लॉटरी लग गई है।” भाभी की आवाज़ सुनकर रिचा कमरे से बाहर आ गई। पास से निकलने पर भी मुंह दूसरी ओर घुमा लेने वाली अंजू भाभी की आवाज़ आज़ बदल कैसे गई ? यही सोचकर हैरान थी रिचा। “अंजू क्यूं […]
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बेकार की बातें-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Kahani: मैं खाट पर पड़े-पड़े धूप में बैठा मोबाइल देख रहा था।मां अपनी दिनभर की दिनचर्या में व्यस्त थी तभी घर का दरवाजा बजा।मां ने बिना देखे ही डिब्बे से दो रोटी निकाली और दरवाजा खोलने चली गई।अब उसके हाथ पहले की तरह काम नहीं करते थे और अब पैरों में भी कहां जान […]
कल की छोरी-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Short Story:” अम्मा एक जगह क्यों नहीं बैठ जातीं …हम सबको हलकान किए दे रही हो..! संगीता अपनी सास पर खीज रही थी। सचमुच बुढ़ा बसपा कष्टकर होता है। स्वयं के लिए भी और संभालने वालों के लिए भी। पर दोनों ही मजबूर हैं । संगीता की बड़बड़ जारी थी कि उसकी नवविवाहिता बहू काम्या […]
उम्मीदों का सहारा-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Short Story: नया वर्ष आ चुका था और अजय सुबह जल्दी उठकर स्कूल में अध्यापन का कार्य करने के लिए तैयारी करने में व्यस्त हो चुका था। सुबह का सूरज अभी बादलों के पीछे छुपा हुआ था और शहर अभी अपनी नींद में सपनों को देख रहा था। मगर अजय अपने सपनों को जीने […]
” दिल की ख़ामोश सिसकियाँ “-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Kahani: ” पुष्पा जी आपको मालूम है संध्या जी ने अपने नए जीवन का आनंद नए स्तर से लेना शुरू कर दिया है। बहुत ही मेहनती और साधारण जीवन जीने वाली संध्या जी अच्छे विचारों और संस्कारों से युक्त हैं और अपने जीवन में इतना कुछ गलत और बुरा होने के बाद भी अपने […]
मंगू -खोमचे वाला-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Kahani: हमारी सोसाइटी में अक्सर एका और खोमचे वाला आया करता था, कई सालों से आ रहा था तो बच्चे,जवान, बूढ़े सब उसे बखूबी जानते थे। वो रोज शाम आता और सोसाइटी पार्क के पास एक तरफ़ खड़ा होकर गोल गप्पे, दही भल्ले, टिक्की बेचा करता था। चूंकि सब उससे भलि भांति परिचित थे […]
सब्र रखो गैर महत्वकांक्षा नहीं—गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Kahani: सुबह-सुबह मुंह अंधेरे ठीक सूरज उगने से पहले गुप्ता जी अपने पलंग से उठकर बालकनी में आते हैं और ताज़ी हवा से अपने तन और मन को ताज़ा करते हैं। उसी वक्त बड़ी झाड़ू और ठेला लेकर शंकर सड़क साफ़ करता हुआ आता है। “राम राम बाऊजी” शंकर हाथ जोड़ता हुआ कहता है। […]
इश्क नहीं आसान ग़ालिब-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Kahani: कई दिनों से मनीष बाबू के इकलौते चिराग मेघ कमरे से लगातार खटर-पटर की आवाजें आ रही थी।कभी जोर जोर से बहसबाजी की आवाज आती तो कभी फुसफुसाने की।फिर कभी हो जाता नील बटा सन्नाटा! मनीष बाबू को किसी खतरे का अंदेशा था।कई दिनों से वह महसूस कर रहे थे कि उनका जोरु […]
पश्चताप के आंसू—गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Story: संजना अपने नए सूट और हल्के मेकअप में बहुत सुंदर दिख रही थी। आज उसके पिता के पुराने मित्र अपनी पत्नी और बेटे आर्यन के साथ उनके घर आ रहे थे। वह जानती थी कि वो सिर्फ़ मिलने नहीं बल्कि दोस्ती को रिश्तेदारी में बदलने के इरादे से आ रहे हैं। अंजना पूरे […]
परित्यक्ता-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Kahani: अपने पड़ोस की सहेली की सगाई में पूजा ने दीपक से कुछ देर बातें क्या कर लीं, सभी की नजरें उसपर टिक गयीं I कुछ लोग उसे आश्चर्य से देख रहे थे, कुछ व्यंग से और कुछ लोग घृणा से भरकर I चंद लोग ही थे, जो अपने होंठों पर मुस्कान बिखेर कर […]
