Motivational Story: राजा धुमसेन ओर रानी तारामती के वैभव की चर्चा दूर-दूर के राज्यों तक फैली हुई थी लेकिन राजा धुमसेन बहुत ही क्रोधी ओर लालची स्वभाव का था।उनके दुःख का एक ही कारण था कि उसे कोई संतान नही थी वह संतान की चाह में बहुत ही व्याकुल रहता।ना जाने कहाँ-कहाँ मंदिरों में जा-जा […]
Author Archives: वंदना पुणतांबेकर
बेकार की बातें-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Hindi Kahani: मैं खाट पर पड़े-पड़े धूप में बैठा मोबाइल देख रहा था।मां अपनी दिनभर की दिनचर्या में व्यस्त थी तभी घर का दरवाजा बजा।मां ने बिना देखे ही डिब्बे से दो रोटी निकाली और दरवाजा खोलने चली गई।अब उसके हाथ पहले की तरह काम नहीं करते थे और अब पैरों में भी कहां जान […]
छांव- गृहलक्ष्मी की कहानी
Grehlakshmi ki Kahani: मन को छूकर जाती हवा, संतोष को एक मीठा सा एहसास दिला रही थी। गांव की पगडंडियां और शहर जाते दोनों रास्ते धूल से भरे हुए थे। पगडंडियों से घर का सफर उसे एक सुखद अनुभूति से भर रहा था। सुबह-सुबह कुएं पर पनिहारिनियों को देखकर वह उन औरतों में अपनी मां […]
नजरिया-गृहलक्ष्मी की कहानियां
Najariya Story: रोज का वही समय सुबह जल्द बाजी में जॉब पर जाना भागते- भागते कभी कुछ छूट जाना,कभी कुछ। आए दिन उसे ऊपर दो चक्कर तो लगाने ही पड़ते। आखिर उसे हर बात की हड़बड़ी जो रहती। क्यों ना हो नया-नया जॉब लगा था। घर की और नौकरी दोनों की जिम्मेदारियों को निभाना वह […]
बिखरे पन्ने-गृहलक्ष्मी की कहानी
Hindi Kahaniya: समय के साथ आधुनिकता के पेड़ पर पनपते नन्हे कपोल अपनी पहचान बनाने के लिए आतुर हो रहे थे। मौसम की अठखेलियां आसमान का खुलापन ऊंचे स्वर के शब्दनाद इंग्लिश धुन पर रॉक संगीत का उन्माद जैसे इन्हीं वस्तुओं में सारे जहां की खुशी समाहित हो। महानगर का शोरगुल सुपर्णा को अब उम्र […]
खुला आकाश—गृहलक्ष्मी की कहानियां
पार्वती आईने के पास खड़ी अपना अक्स ध्यान से देख रही थी।लंबे अरसे की बीमारी के बाद ठीक हुई पार्वती अभी भी अपने आपको कमजोर महसूस करती। कल ही पति के तिष्ण बाणों से उसका कलेजा छलनी हुआ था।शेखर के तीखे स्वर उसके कानों में गूंजे।“क्या दिखाना चाहती हो,समाज को,यह सफेद बाल दिखाकर शादी में […]
