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“तू मां कहलाने लायक नहीं”—गृहलक्ष्मी की कविता

Mother Poem: जो तू लड़ती मेरे हक को, मुझ को जिंदा दफनाती नहीं,मैं दिल से कहती हूं औरत, तू मां कहलाने लायक नहीं। मां बनना तो सौभाग्य होता, चाहे बेटा हो या बेटी हो,मैं अगर जन्मी बेटी तो इसमें मेरा दोष नहीं।तू मां कहलाने लायक नहीं। मां तो खुद गीले में सोती, ताकि बच्चे का […]