Hindi Kahani: गंगेशपुर, एक छोटा सा शांत town, जहाँ हर किसी की ज़िन्दगी एक खुली किताब की तरह थी, में प्रियंवदा मेहरा की अचानक गायब होने की खबर ने पूरे समुदाय को हिला कर रख दिया। प्रियंवदा, जो एक प्रिय शिक्षक थीं, उनकी सादगी और छात्रों के प्रति समर्पण ने उन्हें हर किसी का पसंदीदा बना दिया था। वह ऐसी व्यक्ति थीं, जिनसे सभी लोग जुड़े हुए थे, जिनसे हर कोई सहज महसूस करता था। लेकिन एक अजनबी शाम, वह अचानक गायब हो गईं, और पीछे सिर्फ एक अजीब सी खामोशी छोड़ गई।
इस मामले की छानबीन के लिए, शहर से आई अनुभवी जाँच अधिकारी निशा शर्मा को बुलाया गया। निशा ने कई गुमशुदगी के मामले सुलझाए थे, लेकिन इस बार कुछ अलग महसूस हो रहा था। कोई भी ठोस सबूत नहीं था—ना कोई संघर्ष के निशान, ना फिरौती की मांग, ना कोई फोन कॉल या संदेश। ऐसा लग रहा था जैसे प्रियंवदा बिना किसी निशान के गायब हो गई हो।
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निशा ने प्रियंवदा के जीवन को खंगालना शुरू किया। कागजों पर कुछ भी असामान्य नहीं था—कोई दुश्मन, कोई विवाद, कोई गुप्त बात नहीं। प्रियंवदा सभी के लिए प्रिय थीं, खासकर उनकी सबसे अच्छी दोस्त, नेहा। वे वर्षों से अविभाज्य थीं, ऐसा दोस्ती का रिश्ता जिसे देखकर दूसरों को भी जलन होती थी। लेकिन अब, नेहा का व्यवहार कुछ अजीब सा लग रहा था। वह शांत थी—बहुत शांत। जब सभी लोग प्रियंवदा की तलाश में परेशान थे, नेहा संतुलित और निश्चिंत दिखाई दे रही थी। उसकी चिंता… जैसे कुछ खास नहीं थी, बिल्कुल मन से नहीं, बल्कि जैसे कोई नाटक कर रही हो।
निशा ने तय किया कि वह नेहा से खुद मिलकर बात करेगी।
नेहा का घर शहर के किनारे स्थित था, एक शांत, दो मंजिला घर, जो गंगेशपुर की हलचल से दूर था। निशा ने दरवाजा खटखटाया, और नेहा ने दरवाजा खोला, एक विनम्र मुस्कान के साथ। लेकिन उसकी आँखों में कुछ था—कुछ थका हुआ, दूर सा।
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“जाँच अधिकारी शर्मा, आपको यहाँ देखकर अच्छा लगा,” नेहा ने कहा, उसकी आवाज़ में कुछ शातिराना सा था।
“मैं प्रियंवदा की गुमशुदगी की जाँच कर रही हूँ,” निशा ने जवाब दिया। “मुझे आपसे कुछ सवाल पूछने हैं।”
नेहा ने निशा को अंदर बुलाया। घर साफ सुथरा था, लेकिन उसमें कोई गर्मजोशी नहीं थी। यह खाली सा लगता था, भले ही यह व्यवस्थित था। निशा ने सोफे पर बैठते हुए दीवार पर लगे एक फोटो फ्रेम को देखा—प्रियंवदा और नेहा दोनों एक स्कूल इवेंट में हंसते हुए। तस्वीर, हालांकि सुंदर थी, एक अजीब सी भावना उत्पन्न करती थी।
“तुम्हें उसकी बहुत याद आती होगी,” निशा ने कहा, यह देखती हुई कि नेहा की प्रतिक्रिया कैसी होगी।
नेहा की आँखें थोड़ी सी जगज़ग हुईं, लेकिन उसने जल्दी से मुस्कान छिपा ली। “हां, मुझे जरूर याद आती है। लेकिन कभी-कभी लोग बस गायब हो जाते हैं। मैंने इसे स्वीकार कर लिया है।”
यह प्रतिक्रिया बहुत ज्यादा प्रैक्टिस की हुई लगी, जैसे कोई स्क्रिप्ट से बोल रहा हो। “तुम्हें बहुत दुख नहीं हो रहा?” निशा ने कहा, उसकी आवाज़ में कुछ सख्त था।

नेहा के हाथों में हल्की सी कंपकंपी आई, लेकिन वह तुरंत संयमित हो गई। “मैं अपनी भावनाएँ नहीं दिखाती,” उसने ठंडे स्वर में कहा। “शायद प्रियंवदा ने बस फैसला लिया हो कि उसे छोड़ना है। कभी-कभी लोग ऐसा कर लेते हैं।”
निशा की शंका और बढ़ी। नेहा का स्वर बहुत ज्यादा शांत था, बहुत ज्यादा तर्कसंगत। यह उस हंगामे से मेल नहीं खाता था जो पूरे शहर में मचा था।
“मुझे पता है कि तुम और प्रियंवदा बहुत करीब थीं,” निशा ने आगे कहा, उसकी आँखें नेहा पर जम गईं। “क्या उसने हाल ही में कुछ अजीब बातें बताई थीं? कोई खतरा महसूस किया था?”
नेहा रुकी, उसकी उंगलियाँ सोफे की काठ पर हल्के से टकराई। “नहीं, ऐसा कुछ नहीं था। लेकिन… शायद आपको उसके एक्स-बॉयफ्रेंड से बात करनी चाहिए। हो सकता है वह कुछ जानता हो।”
“मैं इसे ध्यान में रखूँगी,” निशा ने कहा, लेकिन उसकी आंतरिक चेतावनी नेहा से प्रियंवदा के रिश्ते को और गहराई से खंगालने को कहा।
कुछ दिनों के बाद, निशा ने एक चौंकाने वाली सच्चाई का पता लगाया। नेहा और प्रियंवदा की दोस्ती हमेशा वैसी आदर्श नहीं थी जैसे दिखती थी। कई साल पहले, वे एक विषाक्त और अधीनतापूर्ण रिश्ते में थे। प्रियंवदा ने ही इसे खत्म किया था, नेहा की नियंत्रित करने वाली प्रवृत्तियों से बाहर निकलने के लिए। लेकिन ऐसा लगता था कि नेहा ने कभी भी प्रियंवदा को पूरी तरह से जाने नहीं दिया। जलन और घृणा धीरे-धीरे बढ़ रही थी।
निशा ने सारी कड़ियाँ जोड़ दीं। नेहा की शांति एक ढोंग थी, जो उस कड़वाहट और जुनून को छिपा रही थी, जो उसने प्रियंवदा के लिए महसूस की थी। प्रियंवदा का गायब होना कोई संयोग नहीं था—यह एक सोची-समझी साजिश थी। नेहा प्रियंवदा को अपनी जिंदगी में नहीं देख सकती थी, और वह उसे कभी भी किसी और के साथ खुश नहीं होने दे सकती थी।
निशा ने अब पूरी सच्चाई जानने के बाद नेहा को एक आखिरी बार घेर लिया।
“तुम प्रियंवदा के बिना खुश नहीं रह सकती थी, है ना?” निशा की आवाज़ तीव्र थी।
नेहा का चेहरा सफेद पड़ गया। उसकी आँखें चौड़ी हो गईं, और पहली बार उसकी शांति टूट गई। “तुम समझ नहीं रही हो,” उसने हलके से फुसफुसाया, उसकी आवाज़ टूटने लगी। “वह मेरी सारी दुनिया थी। सब कुछ।”
लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी। निशा पहले ही कड़ियाँ जोड़ चुकी थी। वह आदर्श दोस्त, जो प्रियंवदा की सबसे करीबी मित्र थी, वही थी जिसने उसकी जान ली। नेहा थी वह मूक हत्यारी, जो दोस्ती के मास्क के पीछे अपनी सच्ची भावनाओं को छुपाए हुए थी।
जैसे ही नेहा को गिरफ्तार किया गया और ले जाया गया, निशा चुपचाप खड़ी रही, यह समझते हुए कि कभी-कभी, सबसे खतरनाक अपराध वह होते हैं जो सबसे मासूम चेहरों के पीछे छिपे होते हैं। शांत, दिखने में निर्दोष दोस्ती अक्सर सबसे गहरे राज़ छुपाती है।
