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'खाली वक्त'- गृहलक्ष्मी की कहानियां: Free Time Story
Khaali Waqt

Free Time Story: आज फिर हमेशा की तरह मूड ऑफ था सजंना का, नोक-झोंक कोई नई चीज नहीं थी उसके लिए। सजंना का पति अमित बड़ा ऑफिसर था। सुख-सुविधा की कोई भी कमी नहीं थी। लेकिन संजना की जिंदगी में हर चीज की कमी थी।

अपने चिड़चिड़ापन की वजह से वह मां बनने की खुशी भी हासिल न कर सकी। अमित ने जानकर ही इतने रिश्ते ठुकरा कर संजना को इसलिए अपने घर की बहू बनाया कि वह एक आम गृहणी चाहता था। लेकिन कभी भी उसने खुद को यह महसूस नहीं होने दिया कि संजना उससे संतुष्ट नहीं है।

घर में जीवतंता लाने के लिए वो उससे हंसी मजाक करता रहता लेकिन वो उसे भी चुप करा देती थी। हर काम के लिए नौकरानी थी जिससे उसे हर काम समय पर किया मिलता था। घर से कोई लगाव नहीं था वो हर वक्त अमित को नीचा दिखाती रहती जैसे उसकी कोई बहुत बड़ी ख्वाहिश अधूरी रह गई है।

आज भी काम वाली बाई ‘रुनझनु’ हमेशा की तरह मुस्कराते हुए खुशी से घर में प्रविष्ट हुई और बोली नमस्ते भैया और नमस्ते भाभी और मुस्कुराते हुए अपनी चुन्नी कमर पर बांधकर काम पर लग गई।
झाड़ू—बर्तन, पोंछा लगाते हुए संजना बिस्तर पर लेटी—लेटी देखती रहती और उसके काम में कमियां निकालती रहती, अनावश्यक उस पर चिल्लाती रहती, पर वो पलट कर कुछ नहीं बोलती बस मुस्करा देती।

संजना कहां किसी को मुस्कुराने देती थी। आज उससे रहा न गया और रुनझुन को अपने पास बुलाया और बोली तुम इतना काम करती हो अपने घर और बच्चे पालती हो, फिर भी मुस्कुराती रहती हो। क्या तुम्हारी अपने पति से लड़ाई नहीं होती? कभी भी कुछ पलट कर नहीं बोलती? क्या कभी थकती नहीं हो?

क्या राज है इसका? इतने प्रश्न एक साथ सुन कर रुनझुन भौंचक्की रह गई।
पसीना पोंछने हुए गहरी सांस लेते हुए रुनझुन ने उत्तर दिया कि काम में इतनी व्यस्त रहती हूँ बीबीजी कि थकने और लड़ने का “खाली वक्त” ही कहां मिलता है मुझ गरीब को। ये कह कर कमर में बंधी चुन्नी खोलती हुई घर से निकल गई।

Story By: डॉ. वंदना दीप

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