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Hindi story : एक बूढ़ी महिला को कपड़े सिलने का बहुत शौक था। उसके पास बहुत सारी सुइयाँ थीं। छोटी, बड़ी, पतली, मोटी, सभी तरह की। लेकिन एक सुई उसको सबसे ज़्यादा पसंद थी। पता है क्यों? क्योंकि ये उसकी सबसे पुरानी और मज़बूत सुई थी। साथ ही यह पतली और लंबी थी। इसलिए हाथ में इसे पकड़ना आसान था।

मज़ेदार बात यह है कि यह सुई भी खुद को बहुत महत्त्वपूर्ण समझती थी। सु ई जानती थी कि वह बूढ़ी महिला को बहुत प्रिय है।

एक दिन महिला सुई से कुछ सिलाई कर रही थी। तभी सुई ऊपर से टूट गई। इस महिला को सुई इतनी अच्छी लगती थी कि टूटी हुई सुई को उसने फेंका नहीं। बल्कि उसके नीचे के हिस्से को पिन की तरह इस्तेमाल करने लगी। उसकी रसोई में बर्तन धोने के नल के ऊपर एक केलेंडर टँगा हुआ था। महिला ने सुई को उस केलेंडर में अटकाकर कुछ कागज़ वहाँ लगा दिए। इन कागजों पर वह अपने ख़र्चे का हिसाब लिखती थी। सुई बिल्कुल भी दुखी नहीं थी। अपनी इस नई जगह से वह खुश थी। पहले डिब्बे में बंद रहने वाली सुई अब बाहर निकलकर दीवार पर टँग गई थी। वह खुश थी कि उसे पहले से ऊँची जगह मिल गई थी।

एक दिन बूढी महिला एक काग़ज़ निकाल रही थी। अचानक सुई उसके हाथ से गिरी और नाली में चली गई। नाली में ढेर सारा पानी था, जिसमें सुई तेज़ी से बहने लगी। सुई ने इतना अच्छा पहले कभी महसूस नहीं किया था। हमेशा एक जगह पर रहने वाली सुई अब आज़ाद थी। इसीलिए वह अब पहले से भी ज्यादा खुश थी। उसके आसपास छोटा-छोटा कूड़ा तैर रहा था। लेकिन कुछ भी उसके जैसा चमकदार नहीं था; और इसीलिए सुई को अपने ऊपर गर्व हो रहा था।

तेज़ पानी के साथ बहकर सुई बाहर बने हुए एक बड़े टैंक में गिर गई। धीरे-धीरे वह टैंक की तली में बैठ गई।

शायद आज भी वह सुई वहीं होगी। अपने संतोष के कारण वह कल भी खुश थी और आज भी खुश है।

हर परिस्थिति में खुश रह पाना थोड़ा मुश्किल ज़रूर है, लेकिन ऐसा हो सकता है!! सच मानिए, ऐसा ज़रूर हो सकता है!!!

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