मेंहदी रचे हाथ-गृहलक्ष्मी की कहानियां: Hindi Love Stories
Mehndi Rache Hath

Hindi Love Stories: “मेहंदी लाकर रखना डोली सजाकर रखना आएंगे तुझको लेने गोरी तेरे सजना”हाल में यह गाना बज रहा था। अपनी सखियों के बीच घिरी मेहुल के हाथों पर मेहंदी लग रही थी, साथ में उसकी सहेलियां उसे छेड़ भी रहीं थीं। जिसे सुनकर मेहुल का चेहरा शर्म से लाल हो रहा था। मेहुल रोहित के सपनों में खोई हुई थी।
तभी मेहंदी लगाने वाली की आवाज सुनकर मेहुल सपनों के संसार से बाहर निकल आईं।वह कह रहीं थीं कि मेहंदी के रंग को और गहरा करने के लिए लौंग का धुंआ हाथों पर लें लेना तो मेहंदी का रंग और भी गहरा हो जाएगा।

वास्तव में मेहुल के हाथों में मेहंदी का रंग बहुत गहरा रचा था उसने अपनी सबसे प्यारी सहेली से कहकर अपने हाथों की मेहंदी की फोटो खिंचवा कर रोहित को भेज दी और साथ में मैसेज भेजा कि इस में अपना नाम ढूंढकर दिखाओ।

उधर से जवाब आया क्या इन हाथों पर ही हमारा नाम लिखा है। मेरा नाम तो तुम्हारे रोम,रोम पर लिखा है। मैसेज पढ़कर मेहुल स्वयं से ही शरमा गई।

दूसरे दिन नीयत समय पर बारात दरवाजे पर आ गई। शादी की सभी रस्में पूरी हुई और विदाई की वेला आ गई। विदाई के समय मेहुल का रो,रो के बुरा हाल था।
उसकी यह दशा रोहित से देखी नहीं जा रही थी।

मेहुल के माता-पिता ने मेहुल का हाथ रोहित के हाथ में देकर कहा बेटा आज हम अपने जिगर के टुकड़े को तुम्हें सौंप रहे हैं। आज से यह तुम्हारी अमानत है, रोहित ने कहा आप लोग चिंता ना करें अब मेहुल की खुशियों का ध्यान मैं रखूंगा आपको कभी शिकायत का मौका नहीं मिलेगा।

मैं अपने जीते-जी मेहुल के हाथों की मेहंदी का रंग फीका नहीं पड़ने दूंगा।यह सुनकर मेहुल के साथ, साथ उसके माता-पिता के चेहरों पर संतोष की मुस्कान आ गई।

मेहुल अपने ससुराल में बहुत खुश थी, उसके सास-ससुर मेहुल को बहुत प्यार करते थे,और देवर भी अपनी भाभी का बहुत सम्मान करता था।
मेहुल के चारों ओर खुशियां ही खुशियां थी। उसकी सास कहती बहू अभी तो तुम्हारे हाथों की मेहंदीभी नहीं छुटी है। इसलिए अभी तुम घर के कामों को हाथ ना लगाना काम तो जीवन भर करना है अभी तो तुम सिर्फ सज संवर कर रहा करों क्योंकि मेरे रोहित को तुम इसी रूप में अच्छी लगती हो,यह सुनकर वह अपनी सासू मां से ही शरमा कर लिपट जाती।

मेहुल को यह सब सपना लगता वह सोचती क्या किसी का ससुराल इतना अच्छा होता है।वह अपने ससुराल में इतनी खुश थी कि वह अपने मायके को भी भूल गईं। देखते, देखते तीन महीने कैसे बीत गए उसे पता ही नहीं चला।

आज सुबह से ही उसके ससुराल में चहल-पहल थी क्योंकि आज रोहित का जन्म दिन था। रसोई घर से खाने की खुशबू आ रही थी। घर में शाम को इसी खुशी में एक छोटी सी पार्टी रखी गई थी।

सभी तैयारियां पूरी हो गई थी मेहुल ने आज भी अपने हाथों में मेहंदी लगवाई थी। क्योंकि मेहुल के मेहंदी रचे हाथ रोहित को बहुत पसंद थे। मेहुल की सास ने कहा बहूं जाकर तैयार हो जाओ मेहमानों के आने का समय हो गया है।

मेहुल तैयार होने के लिए अपने कमरे में चली गई आज उसने सिल्क की लाल रंग की साड़ी पहनी और पूरा श्रृंगार करके जब उसने आईने में अपना अक्श देखा तो खुद ही शरमा गई, क्योंकि आज वह स्वर्ग उतरी हुई अप्सरा लग रही थी।
आंखों में काजल होंठों पर लिपस्टिक सिंदूर से भरी हुई मांग मेहंदी रचे हाथ उसमें लाल कांच की चूड़ियां और सोने के कंगन, उसने आखरी बार स्वयं को शीशे में देखा और कमरे से बाहर निकल आईं।

जब वह हाल में दाखिल हुईं तो सब उसे एकटक निहारते रह गए। तभी किसी ने उसकी सास से कहा भाभी जी कहीं आपकी बहू को किसी की नज़र ना लग जाए,इसकी नज़र उतार दीजिए।

यह सुनकर मेहुल शरमा गई, उसे देखते हुए उसकी सास ने कहा पार्टी के बाद मैं इसकी नज़र उतार दूंगी।

तभी किसी ने कहा अरे भाई जिसका जन्म दिन है वह कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। मेहुल के पिता ने कहा अरे वह बाजार तक गया है मेहुल के लिए बालों में लगाने के लिए गजरा लेने सभी मेहुल को देखकर मुस्कुराने लगे। मेहुल ने शरमा कर अपनी पलकें झुका ली।

तभी मोहल्ले का एक लड़का भागता हुआ आया और बोला अंकल जी रोहित भैया का एक्सीडेंट हो गया है।
यह सुनते ही वहां सब घबरा कर बाहर की ओर भागे उस लड़के ने बताया कि, उन्हें अस्पताल ले जाया गया है।
सभी अस्पताल पहुंच गए वहां उन्हें पता चला कि, रोहित का आपरेशन हो रहा है । उसके सिर पर बहुत चोट आई है।

घर के सभी लोग सांस रोके भगवान से उसके जीवन के लिए प्रार्थना कर रहे थे। तभी डाक्टर ने आकर बताया कि रोहित को बचाया नहीं जा सका।यह सुनकर वहां हाहाकार मच गया मेहुल के सास ससुर बिलख, बिलखकर रोने लगे उसके देवर का भी बुरा हाल था। पर रोहित की मौत का समाचार सुनकर भी मेहुल की आंखों में आसूं नहीं थे।

वह जैसे जड़ हो गई थी उसी हालत में सब उसे घर लेकर आ गये सबने उसे रूलाने के बहुत जतन किए पर वह पत्थर की मूर्ति की तरह बैठी रही।

रोहित के अन्तिम यात्रा की तैयारी पूरी हो गई सब कहने लगे कि मेहुल को भी रोहित के अन्तिम दर्शन करा दो जब कुछ पड़ोस की औरतें उसके पास गई तो वह शून्य में एकटक देखते हुए मुस्कुरा रही थी।

सभी आपस में बात करने लगी कैसा कलयुग आ गया है कि पति की मौत पर भी आज कल की औरतें आंसू नहीं बहातीं उसकी मौत पर हंसती हैं। यह सुनकर सबने मेहुल की ओर देखा सचमुच उसके चेहरे पर मुस्कान थी।

उसके घर वाले यह देखकर आश्चर्य में पड़ गए की जो मेहुल रोहित के शरीर पर लगी एक खरोंच देखकर रोने लगती थी आज वह रोहित की मौत पर हंस रही है। उन्हें यह देखकर विश्वास नहीं हुआ।

तभी एक औरत ने नफ़रत से मेहुल के कंधे को पकड़ते हुए कहा कि पहले अपने पति का अन्तिम दर्शन कर लो फिर मुस्कुराना, पर यह क्या उस औरतें के छूते ही मेहुल का निर्जीव शरीर एक तरफ़ लुढ़क गया। यह दृश्य देखकर वहां उपस्थित सभी लोगों के मुंह से चीख निकल गई।

आज़ मेहुल भी अपने रोहित के साथ अनंत यात्रा पर निकल गई थी। उसने आज यह साबित कर दिया था कि उसके मेंहदी रचे हाथों के साथ, साथ उसके रोम-रोम पर भी सिर्फ रोहित का ही नाम लिखा हुआ है।
आज उस घर से  दो प्रेमियों की अर्थी एक साथ उठीं ऐसा गहरा और अनोखा प्रेम  देखकर वहां उपस्थित लोगों की आंखों से गंगा-जमुना बह रही थीं, ऐसा दर्दनाक दृश्य देखकर  ईश्वर की आंखें भी  नम हो गईं होगी, क्योंकि आज एक सुहागन अपने हाथों में मेहंदी से खिले अपने पति के नाम को उसी से ढुंढवानेे के लिए उस के साथ स्वर्ग तक चलीं गईं।

यह भी देखे-चार्जर-गृहलक्ष्मी की लघु कहानी