गृहलक्ष्मी कहानियां

जनगणना करने वाले अधिकारी एक बस्ती में पहुंचते ही अपनी नाक-भौं सिकोड़ने लगे। तभी उनमें से एक अपने सहकर्मी से बोला- ‘सर, यहां तो अभी से ही सांस लेना दुर्लभ हो रहा है, इस बदबूदार बस्ती के अन्दर तक जाकर आगे का काम कैसे कर पाएगें?’

हथेली की जीवन रेखा पर तम्बाकू रगड़ रहे दूसरे अधिकारी ने एक चुटकी होंठ के नीचे दबाई और अपने हिसाब से हाथों में थाम रखें कागजों पर कुछ देर कलम घसीटी और बोला- ‘चलो हो गई यहां की जनगणना, अगला एरिया कौन सा है’ कुटिल मुस्कान के साथ दोनों अधिकारी वहां से चलते बने।

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