‘कम डामर से बैठक नहीं बन रही थी ठेकेदार जी। सड़क अच्छी बने यही सोचकर डामर की मात्रा ठीक रखी थी।’ मिमियाते हुए लड़का बोला।

 ‘मेरे काम में बेटा तू नया आया है। इतना डामर डाल कर तूने तो मेरी ठेकेदारी बंद करवा देनी है।’ फिर समझाते हुए बोला, ‘यह जो डामर है इसमें से बाबू, इंजीनियर, अधिकारी, मंत्री सबके हिस्से निकलते हैं बेटा। खराब सड़क के ढचके तो मेरे को भी लगते हैं। चल! इसमें गिट्टी का चूरा और डाल।’ मन ही मन लागत का समीकरण बिठाते हुए ठेकेदार बोला।

 लड़का बुझे मन से ठेकेदार का कहा करने लगा। उसका उतरा हुआ चेहरा देखकर ठेकेदार बोला, ‘बेटा, सबके पेट लगे हैं। अच्छी सड़क बना दी और छह माह में गड्ढे नहीं हुए तो, इंजीनियर साहब अगला ठेका किसी दूसरे ठेकेदार को दे देंगे। इन गड्ढों से ही तो सबके पेट भरते हैं बेटा।’

यह भी पढ़ें –जादुई चिराग – गृहलक्ष्मी लघुकथा

-आपको यह लघुकथा कैसी लगी? अपनी प्रतिक्रियाएं जरुर भेजें। प्रतिक्रियाओं के साथ ही आप अपनी लघुकथा भी हमें ई-मेल कर सकते हैं-Editor@grehlakshmi.com

-डायमंड पॉकेट बुक्स की अन्य रोचक कहानियों और प्रसिद्ध साहित्यकारों की रचनाओं को खरीदने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें-https://bit.ly/39Vn1ji