मैंने कहा… ‘ऐसे ही किसी पेड़ को देखकर शायर ने कहा होगा… कि एक शजर मोहब्बत का ऐसा भी लगाया जाए कि हम साए के आंगन पर उसका साया जाए।’

मेरा हाथ पकड़ कर मुझे घर के अंदर साथ में ले जाते हुए कजरी बोली सच में इस पेड़ का बड़ा फायदा है देखो ढेर सारे बेर, कहकर उसने दो डलियों की ओर इशारा किया। एक में अच्छे बेर और दूसरी में कटे-फटे बेकार से तभी बाउंड्री वॉल की ओर से पड़ोसन की आवाज आई। ‘कजरी कुछ बेर हमें भी दे दो। जी अभी लाई कहकर वह कटे-फटे बेर की डलिया उन्हें देने चली गई।’

मैंने सोचा एक शबरी थी और एक कजरी है।

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