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होशियार बूढ़ा-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं झारखण्ड: Clever Old Man Story
Hoshiyaar Bhuddha

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

Clever Old Man Story: जंगलों से घिरे एक गाँव में एक बूढ़ा और एक बुढ़िया रहते थे। वे खेती-बारी करते थे और साथ ही भेड़ -बकरी और मुर्गी भी पालते थे। बूढ़े ने एक बार गाँव के बाहर खेत में मकई लगायी थी। मकई की फसल बहुत ही अच्छी हुई थी। जब मकई की बालियों में दाने आए तो एक बंडा सियार रात में आकर उसे खाने लगा। बूढ़ा अपनी फसल को बचाने के लिए रात में अपने खेत में पहरा देने लगा। एक दिन बंडा सियार खेत में मकई खाने के लिए जैसे ही घुसा, बूढ़े ने उसे मारने के लिए खदेड़ा और दो डंडे लगाए। तब बंडा सियार ने बूढ़े को धमकाते हुए कहा : ष्ठीक है बूढ़ा तुम यहाँ खेत अगोरो उधर तम्हारी मर्गियों को कौन बचाएगा? मैं तम्हारी सारी मर्गियाँ खा जाऊँगा। सियार की धमकी सुनकर बूढ़ा अपने हाथ में एक हँसुआ पकड़कर मुर्गियों के बीच छुपकर बैठ गया। साँझ के समय सियार मुर्गियों को पकड़ने के लिए मुर्गी-घर में घुसा और मुर्गी खोजने लगा। जैसे ही बंडा सियार ने मुर्गी को पकड़ने की कोशिश की वैसे ही बूढ़े ने अपने हँसुए से सियार के मुँह पर इस तरह ठोंठिया दिया कि सियार को लगा कि किसी मुर्गी ने ठोंठियाया है। तब सियार कहने लगा कि बूढ़ा के पास बड़ी-बड़ी मुर्गियाँ हैं, मैं इन्हें नहीं पकड़ पाऊँगा।

हताश होकर सियार वापस जाने लगा तब उसने बूढ़े को धमकाया कि ठीक है बूढ़ा तुम्हारी बकरियाँ कहाँ जाएंगी? मैं तुम्हारी बकरियाँ खा जाऊँगा। बंडा सियार की धमकी सुनकर बूढ़ा हाथ में एक कुटैसी लेकर बकरियों के बीच छुपकर बैठ गया। साँझ के अँधेरे में बंडा सियार बूढ़े की बकरियों को पकड़ने के लिए बकरियों की कोठरी में घुसा और बकरियों को पकड़ने की कोशिश की तो बूढ़े ने सियार की मुंडी पर कुटैसी से ढप से मारा। बूढ़े ने सियार की मुंडी पर इस तरह मारा जैसे कि कोई बकरी ढूसती है। सियार बकरियों को पकड़ नहीं पाया तो कहने लगा कि बूढ़ा के पास बड़ी -बड़ी बकरियाँ थीं, मैं उनको पकड़ नहीं पाऊँगा।

वापस खाली हाथ जाने के समय बंडा सियार ने बूढ़े को धमकाया कि तुम्हारी भेड़ों को कौन बचाएगा? मैं तुम्हारे सभी भेड़ों को खा जाऊँगा। उसकी धमकी को सुनकर बूढा भेड़ों को बचाने के लिए “ढेलफोड़ा” को हाथ में लेकर अँधेरे में भेड़ों की कोठरी में उनके बीच चुपचाप बैठ गया। जैसे ही अंधेरा हुआ, बंडा सियार, भेड़ों को पकड़ने के लिए भेड़ों की कोठरी में घुस गया। जैसे ही उसने एक भेड़ को पकड़ने की कोशिश की वैसे ही बूढ़े ने ढेलफोड़ा से बंडा सियार के सिर पर भेड़ के दूसने की तरह वार किया। इस तरह बंडा सियार, बूढ़ा के भेड़ों को भी पकड़ नहीं सका। तब हार कर बंडा सियार ने बूढ़े का पीछा करना छोड़ दिया। उसके पीछा छोड़ देने के बाद दोनों बूढ़ा-बूढी निर्द्वद्व होकर जीवन यापन करने लगे।

आदमी को इस बूढ़े की तरह सचेत और होशियार होना चाहिए।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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