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बड़ादेव-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं मध्यप्रदेश: Bada Dev Story
Bada Dev

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

Bada Dev Story: एक समय साथ गोंड भाई थे। उन्होंने खेत में सन बोया। कुछ दिन में सन के अंकुर निकले, पौधे बने और बढ़ने लगे। सातों भाई जी-जान से सन की देख-रेख बारी-बारी से करते थे। उन्हें उम्मीद थी कि उनके काममें आने लायक सन मिलने के बाद भी बहुत सन बचेगा जिसे बेचकर वे मालामाल हो सकेंगे।

एक सवेरे उन्होंने देखा कि सफेद घोड़े पर सवार एक खूबसूरत जवान उनके खेत के बीच से घोडा दौड़ाता सरपट चला आ रहा है। घोड़े की टापों के शोर से घबराकर पेड़ों पर बैठे पंछी घबराकर चीं-चीं कर आसमान में इधर-उधर उड़ने लगे। घोड़े के खुरों से सन की फसल कुचली-रौंदी जाकर खराब हो रही थी। वे सब घुड़सवार को रोकने के लिए आवाज लगाने लगे किन्तु घुड़सवार को न सुनता देख अत्यंत क्रोधित हो उसे मारने के लिए अपनी हँगिया लेकर दौड़ पड़े। तभी सबसे छोटे भाई को हाजत हो आई और वह नाले में चला गया।

बाकी के छः भाई घुड़सवार के पीछे-पीछे भागते रहे। उनके बहुत बड़े खेत के उस पार मेंड़ पर साजा का एक पुराना झाड़ लगा था। वह घुड़सवार घोडा दौड़ाते-दौड़ाते उस साजा वृक्ष के निकट पहुँचा और अचानक घोड़े समेत उसमें समा गया। छहों भाइयों ने यह देखा तो उनके होश उड़ गए। वे समझ गए कि ऐसा चमत्कार कोई ऐरा-गैरा घडसवार नहीं कर सकता. अवश्य ही यह बड़ादेव हैं। वे सोचने लगे कि बड़ादेव कृपा कर हमारे खेत पर से निकले और हम मूरख उनको पहचान ही नहीं सके। उनकी पूजा करना तो दूर टॅगिया लेकर उनको मारने दौड़े। अब तो वे लापता हो गए, उन्हें मनाएँ भी तो कैसे मनाएँ?, माफी माँगें तो कैसे माँगें?

सबने सलाह कर मन्नत माँगी। सबसे बड़ा भाई बोला कि वह साजा के पेड़ के नीचे बड़ादेव का चौंतरा बनाएगा। दूसरे भाई ने कहा कि वह होम कराएगा। तीसरे भाई ने सफेद मुर्गे की बलि देने की मन्नत माँगी। चौथा भाई भी पीछे न रहा उसने महुआ की शराब से तर्पण करने को कहा। पाँचवे भाई की बारी आई तो उसने बड़ादेव की मढ़िया बनाने का वचन दिया। छठवें भाई ने बिरादरी को पंगत खिलाने का इरादा किया। वे सब बार-बार माफी माँगते रहे, हाथ जोड़कर रोते-गिड़गिड़ाते रहे पर बड़ादेव साजा के झाड़ से बाहर नहीं आया। छहों भाई हैरान थे कि क्या करें जिससे बड़ा देव खुश होकर माफी दे दे।

तभी सबसे छोटा सातवाँ भाई हाजत से फारिग होकर पहुंचा, उसने अपने भाइयों की यह हालत देखी तो सबको धीरज बँधाया, चुपाया और बोला मैं एक उपाय करता हूँ। शायद बात बन जाए। शायद बड़ा देव मान जाए। सभी भाइयों ने उसकी ओर देखा। बाद का होने के नाते वे उसे नासमझ मानकर डाँटते-डपटते रहे थे। अब उसकी बात मानने के अलावा कोई चारा ही न था। सबने उसकी बात से रजामंदी जताते हुए उसकी हाँ में हाँ मिलाई। छोटा भाई जंगल में गया और खैरसरि के झाड़ की एक शाख काट लाया। उसकी लकडी से एकतारा बनाया और उसे बजाते हए भक्ति-भाव से बडा देव का भजन गाने लगा। बाकी के सब भाई उसके स्वर में स्वर मिलाने लगे।

छोटे भाई की भक्ति देखकर बड़ादेव की नाराजगी दूर हो गई। बड़ादेव साजा के झाड़ से प्रकट हुआ और छोटे भाई के सर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देते हुए बोला- “मैं तुमसे प्रसन्न हूँ। तुम्हारे इस बाजे का नाम ‘बाना’ होगा। जब भी तुम इसे बजाकर गीत गाकर मुझे पुकारोगे, मैं तुम्हें दर्शन दूंगा।” छोटे भाई ने बड़ादेव के चरणों में सर झुकाते हुए अपनी बड़े भाइयों को माफ करने की प्रार्थना की। बड़ादेव ने उन सब पर कृपा करते हुए उनकी मन्नत और पूजा स्वीकार की और उसी साजा वृक्ष में विलीन हो गया।

छहों भाइयों ने छोटे भाई की खूब तारीफ की और शाबाशी दी। सबने कहा आज से तुम बाना पर बड़ादेव के गीत गा-गा कर सुनाओगे। तुम्हें खेत पर कान करने की जरूरत नहीं है। हम सब फसल में से आधा हिस्सा तुम्हें देंगे। इस पर छोटे भाई ने कहा कि वह भजन गाने के साथ-साथ जो हो सकेगा करता रहेगा और वह आधा नहीं सबके बराबर का हिस्सा लेगा।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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