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बाघ और बिल्ली-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं हिमाचल प्रदेश
Baagh or Billi-Lok Kathae

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

बाघ और बिल्ली-मैं तुम्हें ही मार के खाऊंगा अब मौसी। तुम्हारा नर्म-नर्म मांस बड़ा ही स्वाद होगा। बाघ के बच्चे ने बिल्ली को खुंखार नजरों से घूरते हुए कहा। वह यह भी भूल गया था कि उसकी मां मरने पर बिल्ली ने ही उसे पाला-पोशा था।

बिल्ली का तीसरा नेत्र खुला उसने सामने की ओर संकेत किया- अरे उधर देख बेटा, वहां पर मुझसे भी बढ़िया स्वादु शिकार है।

बाघ का बच्चा, उस ओर गौर से देखने लगा तो पलक झपकते ही बिल्ली साथ के पेड़ पर चढ़ गई। सामने शिकार न देख और बिल्ली को इधर उधर न पाकर उसे पेड़ पर चढ़ा देखकर उसेन पैंतरा बदला- अरे मौसी, मैंने तो मजाक में तुम्हें खाने की बात कही थी। मेरी प्यारी-प्यारी मौसी तुमने मुझे अपना दूध पिलाया, ताकतवर बनाकर शिकार करने के सारे करतब सिखाए, पर तुमने मुझे पेड़ पर चढ़ना क्यों नहीं सिखाया ? उतरो नीचे मेरी प्यारी मौसी, मुझे पेड़ पर चढ़ना सीखा दो न ?

बाघ के बच्चे ने बहुत मीठे-मीठे और पटाते हुए बिल्ली मौसी से कहा।

अरे बस कर बाघ बेटा, मैं तेरी आंखों में सच पढ़ चुकी हूं। दो दांत वाला चार दांत वाले को क्या ठगेगा। तुम्हें भी बेटा मैंने हर विद्या सिखाई पर पेड़ पर चढ़ना अभी सिखाना था किन्तु तुमने कृत्घनता दिखा ही दी। मेरी दादी सच कहती थी कि बाघ और सांप कभी अपने नहीं हो सकते। अब तुझे पेड़ पर चढ़ना कभी नहीं सीखा सकती। मैं तेरे झांसे में आने वाली नहीं, अब तू जा जहां जाना है। बिल्ली ने अब बिना स्नेह और ममता के कहा था।

अब बाघ का बच्चा अपना छोटा सा मुंह लेकर रह गया था। उसे अपनी फिसली जीभ पर गुस्सा आने लगा था।

पहुंचे, जहां एक लड़की आंगन में रसोई बना रही थी। बृद्धों को वह पसन्द आ गई किन्तु उसकी परीक्षा लेना अभी शेष थी।

एक सयाने ने वह पूछ ही ली बेटी, तेरी माता कहां है? वह एक की दो करने गई हैं। तेरे पिता कहां गए हैं? दूसरे सयाने ने पूछा। पानी पकड़ने गए हैं। लड़की ने स्नेह से कहा। और भाई कहां गया है? वह पागल खाने गया है। तुम क्या कर रही हो? >मैं सौ मार रही हूं और एक को परख रही हूं।

दोनों सयानों ने समझ लिया कि यह लड़की बहुत बुद्धिमति है। लड़की ने उन्हें बैठने के लिए चटाई दी। वे बैठ गए।

लड़की की माता एक की दो करने मतलब उड़द दलने गई थी। पिता पानी पकड़ने मतलब छप्पर छाने गए थे। भाई पागलखाने गया है यानी शराब पीने गया है। लड़की के सौ मारने और एक परखने का अर्थ था कि वह चावल पका रही है। एक चावल के दाने को देख कर वह पूरे चावल पकने को परख रही है।

दोनों सयानों की आंखें मिली और यह लड़की उन्होने पसन्द कर ली। अब इसके माता-पिता से इसे अपने बेटे की शादी के लिए मांग करनी है और आज ही व्याह के लिए पक्की जुबान करनी है। दोनों सयानों ने परामर्श किया।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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