आज के जमाने में अधिकतर युवा डिप्रेशन से जूझ रहे हैं। युवा ही नहीं बल्कि हर पीढ़ी डिप्रेशन का शिकार होती जा रही है। कभी कभार आप केवल दुखी होते हैं, उसे डिप्रेशन नहीं कहा जा सकता। परंतु कभी आप जब उदास होते हैं, तो संभावना है कि आपके पास इस जटिल मानसिक बीमारी के  बारे में वास्तविक समझ नहीं हो।

अवसाद कपटी है। यह न केवल आपके मूड को प्रभावित करता है, बल्कि आपके महसूस करने, सोचने और कार्य करने की क्षमता को भी प्रभावित करता है। यह आनंद की संवेदनाओं को कुंद कर देता है, संयोजकता को बंद कर देता है, रचनात्मकता को रोकता है और यह अक्सर न केवल अनुभव करने वाले व्यक्ति को, बल्कि उस व्यक्ति के करीबी लोगों,परिवार और दोस्तों को भी गहरी भावनात्मक पीड़ा देता है।

व्यक्ति अपनी कामयाबी की दौड़ में इतना अकेला हो चुका है कि न तो उसे अब अपने साथ अपने परिवार वाले दिखते हैं और न ही अपने दोस्त। अक्सर अकेलेपन के कारण भी व्यक्ति डिप्रेशन में आ जाता है। इसके कई सारे उपचार भी उपलब्ध हैं जिनमें से मुख्य है अपने अकेलेपन को दूर करना। आप अपने किसी दोस्त या किसी परिवार के सदस्य की सहायता ले सकते है।

डिप्रेशन को कैसे पहचानें : लक्षण एवं संकेत 

यदि आप को निम्नलिखित में से कम से कम 5 लक्षण हर रोज महसूस होते हैं तो समझ जाइए कि आप डिप्रेशन में हैं। इनमे से किसी किसी लक्षण का अस्थाई रूप से महसूस होना स्वाभाविक भी है।

  • हर समय स्वयं को व्यर्थ व अंदर से खोखला समझना। 

  • अपनी फैमिली, दोस्तो व हर काम में कोई इंटरेस्ट न लेना।

  • अपनी भूख या वजन में बदलाव महसूस करना।

  • बिना वजह व बिना काम किए स्वयं को थका हुआ महसूस करना। 

  • स्वयं को बेचैन महसूस करना, बोलने व काम करने में धीमा होना।

  • बहुत अधिक या बहुत कम सो पाना। 

  • बार बार सुसाइड के विचारों का दिमाग में आना। 

  • हर समय मूड खराब रहना। 

यदि आप को उपर लिखित लक्षणों में से 5 या उससे अधिक लक्षण हर रोज महसूस होते हैं तो यह आप का डिप्रेशन हो सकता है। आप को तुरन्त अपने मनो वैज्ञानिक के पास जाना चाहिए और उनसे इसके बारे में राय लेनी चाहिए। इसके अलावा आप को अपने डिप्रेशन के टेस्ट भी कराते रहना चाहिए। 

डिप्रेशन के विभिन्न प्रकार 

1. परसिस्टेंट डिप्रेसिव डिसऑर्डर : यदि आप को डिप्रेशन के मुख्य लक्षणों में से कोई 2 लक्षण लगभग 2 साल या उससे अधिक महसूस होते हैं तो आप को इस प्रकार का डिप्रेशन हो सकता है। यह डिप्रेशन ज्यादा खतरनाक नहीं होता है और यह ठीक भी आसानी से हो सकता है। 

2. बाईपोलर डिसऑर्डर : इस प्रकार के अन्तर्गत आप के मूड बहुत जल्दी जल्दी बदलते हैं। एक मिनट में आप का मूड बहुत अच्छे से बहुत खराब हो जाएगा। यह डिप्रेशन का सबसे अधिक प्रचलित प्रकार है। अमेरिका की लगभग 2.8 प्रतिशत जनसंख्या इस प्रकार के डिप्रेशन से प्रभावित है।

3. सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर :  इस प्रकार का डिप्रेशन मौसम के हिसाब से अपने रंग बदलता है। यह सर्दियों में कम हो जाता है। परंतु जैसे ही गरमियों का मौसम आता है। धूप में इसमें बदलाव रहता है, आप वजन बढ़ना अधिक नींद आना आदी बदलावों को महसूस करेंगे। 

डिप्रेशन के उपचार

हम कई तरह से डिप्रेशन का उपचार कर सकते हैं जैसे : 

लाइफस्टाइल में बदलाव : यदि आप अपने लाइफस्टाइल के बदलाव करते हैं, जैसे हर रोज एक्सरसाइज करते हैं, हेल्दी भोजन खाते हैं, अपनी रुचियों का ख्याल रखते हैं अर्थात जो चीज आप को पसंद है वह करते हैं चाहे वह डांस हो या सिंगिंग या किसी प्रकार की आर्ट। यदि आप अपनी लाइफस्टाइल में यह सब बदलाव करते हैं तो निश्चित ही आप का डिप्रेशन ठीक होने लगेगा।

विभिन्न प्रकार की थेरेपी लेना : डिप्रेशन के उपचार के लिए विभिन्न प्रकार की अलग अलग थेरेपी बनाई गई हैं। जिनसे आप के डिप्रेशन के उपचार में बहुत सहायता मिलेगी। यह डिप्रेशन का सबसे अधिक प्रभावकारी उपचार माना जाता है। आप अपनी पसंद के अनुसार किसी एक थेरेपी को ट्राई कर सकते हैं। जैसे –  

  • काॅग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी(CBT), 

  • इंटरपर्सनल थेरेपी, 

  • प्रॉब्लम सॉल्विंग थेरेपी, 

  • सेल्फ मैनेजमेंट थेरेपी

अकेलापन दूर करें : यदि आप के मन में किसी बात को लेकर बहुत अधिक चिंता है या आप स्वयं को बहुत अकेला महसूस करते हैं तो आप मनो वैज्ञानिक के पास जा कर अपनी सारी बातें बता सकते हैं। या फिर आप अपने किसी विश्वसनीय के पास जा कर स्वयं का मन हलका कर सकते हैं। 

डिप्रेशन का ही एक और प्रकार है ट्राइपोफोबिया। आइए जानते हैं उसके विषय में विस्तार से।

ट्राईपोफोबिया क्या है? 

ट्राइपोफोबिया छोटे छोटे छेदों से लगने वाले डर को कहते हैं। हमें ऐसा लगता है कि यह छेद सारे एक साथ इकठ्ठे हो जाएंगे। जिन लोगों को यह डर लगता है उन्हें किसी भी सर्फेस पर ऐसे छोटे छोटे छेद एक दूसरे के अंदर समाते हुए प्रतीत हो सकते हैं। यह फोबिया ऑफिशियल नहीं है इस पर रिसर्च अभी आधी ही हुई है और आगे भी जारी है। 

यदि आप को यह। फोबिया है तो आप को कमल के फूल की सीडस के जैसे छेद, मधुमक्खियों का छत्ता, बुलबुले, अनार के दाने आदि के रूप में छेद दिखाई देंगे जिनसे आप को बहुत डीस कंफर्ट मेहसूस होगा। तो आज हम इस फोबिया के बारे में गहनता से जानेंगे।

लक्षण 

जब लोगो को इस प्रकार का भय होता है तो वह बहुत घबरा जाते हैं और घबराहट में उन्हें कुछ निम्न प्रकार के लक्षण देखने को मिलते हैं।

आप को गूसबुंप्स हो जाएंगे। 

बिल्कुल भी कंफर्टेबल मेहसूस नहीं होगा।

आप को स्वयं को खदेड़ा हुए लगेगा। 

अजीब प्रकार के इल्यूजन दिखना। 

पैनिक अटैक।

पसीना आना।

जी मिचलाना। 

शरीर का कापना।

रिसर्च इस के बारे में क्या कहती है? 

रिसर्च इस बात से सहमत नहीं है की ट्रायपोफोबिया को फोबिया की लिस्ट में शामिल करना चाहिए। 2013 में हुई एक रिसर्च के मुताबिक यह फोबिया केवल भयानक चीजों से लगने वाला एक बायोलॉजिकल डर है। रिसर्च कहती हैं कि यह डर जब हाई कंट्रास्ट रंग एक ग्राफिक सीक्वेंस में अरेंज कर दिए जाते हैं तब लगता है। इनका कहना है कि जो लोग हानिकारक चीजों से डरते हैं अक्सर उन्हें ही यह फोबिया होता है। 

2017 में हुई एक रिसर्च के मुताबिक यह फोबिया जानवरो व खतरनाक कुत्तों से लगने वाले डर पर आधारित है। इस रिसर्च के नतीजों में बताया गया कि जिन लोगो को ट्रायपोफोबिया होता है वे उन जानवरो से नहीं डरते बल्कि उनकी बनावट को देख कर उन्हें डर लगता है। अतः इस फोबिया को ऑफिशियल फोबिया की सूची में शामिल नहीं किया गया। इस पर अभी अधिक रिसर्च की आवश्यकता है। 

रिस्क फैक्टर

ट्राइपोफोबिया के बारे में ज्यादा कुछ रिस्क फैक्टर तो नहीं है परन्तु 2017 में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक यह डर एंग्जाइटी व डिप्रेशन डिसऑर्डर से जुड़ा हुआ है। जिन लोगो को यह फोबिया होता है उन्हें डिप्रेशन आदि होने की भी ज्यादा सम्भावना होती है। 

उपचार

बहुत से ऐसे तरीके होते हैं जिनसे हम एक फोबिया को सही कर सकते हैं परन्तु इस फोबिया का सबसे प्रभावकारी उपचार होता है एक्सपोजर थेरेपी। यह थेरेपी एक प्रकार की थेरपी होती है जो आप का उन चीजों को देखने का नजरिया ही बदल देती है जिन चीज़ों से आप को डर लगता है। 

इसका दूसरा उपचार होता है कॉग्निटिव बेहवियराल थेरेपी। इस थेरेपी में एक्सपोजर थेरेपी के साथ कुछ अन्य तकनीकों को भी शामिल किया जाता है ताकि आप की एंजाइटी नियंत्रित हो सके और आप ओवर थिंकिंग न करें। कुछ अन्य उपचार जो आप को आप के फोबिया से दूर करते हैं वह निम्नलिखित हैं :

अपने थेरेपिस्ट या साइकियाट्रिस्ट से नियमित रूप से अपने ख्यालों के बारे में बात करना।

कुछ दवाइयां जैसे बेटा ब्लॉकर्स और सेदेटिव आदि। 

रिलैक्स होने की कुछ तकनीक जैसे योगा व लंबी सांस लेना। 

एक्सरसाइज जिससे डिप्रेशन व चिंता दूर हो सके।

भरपूर मात्रा में आराम करें। 

एक हेल्दी व संतुलित मील खाएं। 

कैफ़ीन व ऐसी सभी चीजों से दूर रहें जिनसे आप के मूड पर प्रभाव पड़ता है।

पारस हॉस्पिटल गुरुग्राम क्लिनिकल साइकोलॉजी और साइकोथेरेपी सीनियर कंसलटेंट डॉक्टर  प्रीति सिंह से बातचीत पर आधारित

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