Reduce stress and improve mental health with wisdom
Reduce stress and improve mental health with wisdom

Reduce Stress with Intelligence: गहरी सांस लेना, ध्यान (मेडिटेशन) और कृतज्ञता का अभ्यास मानसिक शांति और तनाव कम करने में मदद करता है।

तनाव और चिंता केवल मानसिक नहीं होते, बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करते हैं। महिलाओं में यह हार्मोनल संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है।

हमारा समाज हमेशा से पढ़ाई, ज्ञान और बुद्धिमत्ता पर ज्यादा ध्यान देता रहा है, लेकिन भावनाओं, सहनशीलता और रिश्तों को संभालने की कला पर कम काम हुआ है। यही वजह है कि चिंता, डिप्रेशन और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कई समस्याएं अक्सर यहीं से पैदा होती हैं। जब हम यह नहीं सीख पाते कि अपनी भावनाओं को कैसे संभालना है,
तनाव को कैसे कम करना है और समाज में संतुलन कैसे बनाए रखना है, तो मानसिक स्वास्थ्य कमजोर हो जाता है।

डिप्रेशन और एंजाइटी की शुरुआत बहुत हल्के लक्षणों से होती है जैसे- अकेलापन महसूस करना, आइसोलेशन में रहना, किसी भी काम का मन न करना और मूड में बदलाव। कोई व्यक्ति जो पहले बहुत खुशमिजाज, मिलनसार और बातूनी था, अचानक चुप रहने लगे, लोगों से दूरी बनाने लगे या कमरे में अकेले बैठना पसंद करने लगे ये सभी बेसिक और शुरुआती संकेत हो सकते हैं कि वह मानसिक रूप से संघर्ष कर रहा है।

दो दिन तक मन खराब होना सामान्य है, लेकिन अगर 10-15 दिन तक किसी काम का मन न लगे, हर टास्क भारी लगे और महीनों तक मूड ठीक न हो, तो यह डिप्रेशन का संकेत हो सकता है। लो मूड, डिसीजन में कठिनाई और पहले पसंद की गतिविधियों में रुचि खत्म होना शुरुआती संकेत हैं। कभी-कभी सब बाहरी रूप से सामान्य दिखता है घर, परिवार, सपोर्ट… फिर भी मन अंदर से खाली और अस्थिर रहता है।

डिप्रेशन के पीछे कई कारण होते हैं। परिवार में किसी को मानसिक समस्या रही हो तो संवेदनशीलता बढ़ जाती है। दिमाग में रासायनिक असंतुलन मूड को प्रभावित करता है। सबसे महत्वपूर्ण हैं सामाजिक और व्यक्तिगत कारक- हमारा परिवेश, स्वभाव और तनाव से निपटने की क्षमता। एक ही स्थिति में दो लोग अलग तरह से प्रतिक्रिया देते हैं और यही फर्क तय करता है कि कोई तनाव से बाहर आ जाएगा या धीरे-धीरे डिप्रेशन की ओर बढ़ेगा।

Depression, anxiety, and panic attacks
Depression, anxiety, and panic attacks

डिप्रेशन मूड आधारित होता है और इसमें लगातार उदासी और रुचि में कमी रहती है। चिंता और पैनिक अटैक में घबराहट होती है, लेकिन सामान्य समय में व्यक्ति सामान्य कामकाज कर सकता है। हल्की चिंता पैनिक अटैक में बदल सकती है। पैनिक अटैक के लक्षणों में सिरदर्द, चक्कर, धुंधला
दिखना, गला सूखना, सीने में भारीपन, अनियमित सांसें, पेट में गैस या मतली, हाथ-पैर में जकड़न और दिल की तेज धड़कन शामिल हैं।

चिंता, डर और उदासी इंसानी इमोशंस हैं और इन्हें खत्म नहीं किया जा सकता। फर्क तब आता है जब ये आपकी कामकाजी क्षमता और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करने लगें। हल्की घबराहट के बावजूद अगर आप सामान्य काम और रिश्ते निभा पा रहे हैं, तो यह सामान्य है। लेकिन जब डर
आपको बाहर जाने, लोगों से मिलने या काम करने से रोक दे और आप बचने लगें
तभी यह डिसऑर्डर का संकेत है।

एक थेरेपिस्ट तब तक मदद नहीं कर सकता जब तक आप खुद अपनी मदद के लिए तैयार न हों। चाहे कितना भी समझाया जाए, अगर व्यक्ति पुराने दर्द को कसकर पकड़े रहेगा, तो हीलिंग नहीं होगी। हीलिंग तभी शुरू होती है जब वह इसे छोड़ दे। लेटिंग गो का मतलब भूलना या माफ करना नहीं, बल्कि यह तय करना है कि मैं अपनी मेंटल हेल्थ को प्राथमिकता दूंगा।

हमारा दिमाग वही चीज देखता है जिस पर हमारा ध्यान केंद्रित होता है। जब हम अपने बारे में या दिन के बारे में नकारात्मक सोचते हैं, तो पूरा ध्यान चिंता पर रहता है और सकारात्मक चीजें नजर नहीं आतीं। ज्यादा सोचना (ओवरथिंकिंग) नकारात्मक विचारों को बढ़ा देता है, जिससे जीवन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और डिप्रेशन की शुरुआत हो सकती है।