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ढलती उम्र में दें सौन्दर्य को कुन्दन सी दमक

बढ़ती उम्र के साथ त्वचा में बदलाव आना एक सामान्य बात है, पर कुछ बातों का ख्याल रखकर बढ़ती उम्र में भी जवां रह सकते हैं। कैसे, आइए जानते हैं।

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पूर्णिमा और बुद्ध

‘चरथ भिक्खुवे चारिकं बहुजन हिताए बहुजन सुखाए उत्थाए हिताए लोकानुकम्पाय’ इन शब्दों में दिया था तथा इसी दिन उरूवेला में 3 कश्यप भाइयों को धम्म की दीक्षा देकर भिक्षु संघ में शामिल किया था।

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भगवान बुद्ध की संवेदना संजीवनी

जो बुद्धिमान चक्रव्यूह नहीं रचती, बल्कि अनुकूलता संवेदना के सरंजाम जुटाती है। जिसका विश्वास पीड़ा देने में नहीं बल्कि कष्ट मिटाने में है।

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सुगठित राष्ट्र की नींव है मातृत्व

मातृत्व एक आद्वितीय अनुभूति है जिसका शब्दों में वर्णन नहीं किया जा सकता, यह तो सिर्फ महसूस किया जा सकता है। सृष्टि रचयिता ब्रह्मï एक पुरुष हैं, जब उन्होंने आत्ममंथन किया होगा तब जाकर सृजन का उत्तरदायित्व नारी पर सौंपा होगा। एक बालक सर्वप्रथम अपनी मां से ही सीखता है तभी तो एक मां अगर पुचकारती भी है तो भी शिशु उसी के पास रहना अधिक पसंद करता है और अगर मारती एवं डांटती भी है तो भी शिशु उसी के पास जाता है। मां अपने संतान की चिकित्सक,सर्जक एवं मार्गदर्शक होती है।

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ईश्वर की सुन्दरता अपार है – परमहंस योगानंद

जब तक आपकी ईश्वरीय भक्ति और ईश्वरीय बोध पूरे नहीं हो जाते, विश्राम से न बैठें, ध्यान करने के समय नींद में न चले जाएं। ईश्वर की अपेक्षा अन्य किसी वस्तु को प्राथमिकता कभी न दें उनका प्रेम ही महानतम प्रेम है।

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सत्य की ओर – स्वामी चिन्मयानंद

समस्या का स्थायी हल ढूढ़ निकालने का केवल एक ही तरीका है और वह है इस समीकरण के कम से कम एक पक्ष को अपरिवर्तित बनाना। ठीक यही संदेश दिव्य जीवन का भी है।

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सतोगुणी होने के लिए यत्न करना होगा – आनंदमूर्ति गुरु मां

जिसे तुम छू न सको, जो शब्द से तुम्हें सुनायी न देगा। अदृश्यम्ï जो कभी दृश्य बनकर तुम्हारी आंखों के सामने आने वाला नहीं है। ऐसा सूक्ष्म, अति सूक्ष्म परमात्मा की सत्ता के बोध के लिए, अनुभव के लिए संन्यास है।

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जितने पर्याय हैं, वे सारे बदलते हैं – आचार्य महाप्रज्ञ

जीवन में आस्था का स्थान बहुत ऊंचा है। जिस जीवन में आस्था नहीं होती, वह जीवन आधारशून्य होता है। उस जीवन में सफलता का वरण नहीं हो सकता। आस्था का अर्थ किसी पर भरोसा करना नहीं होता। उसका अर्थ है अपने आप पर भरोसा करना।

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अनायास धन की प्राप्ति के योग

लॉटरी लग जाना, वसीयत मिल जाना या फिर किसी बड़ी प्रतियोगिता में विजेता के रूप में पुरस्कार की बड़ी राशि मिल जाना- ये सब अनायास धन प्राप्ति के उदाहरण हैं। लेकिन इस तरह से आकस्मिक धन-लाभ क्या सभी को हो सकते हैं? इसका जवाब है- बिल्कुल नहीं। हम सभी की कुण्डलियों में ग्रहों की स्थिति मात्र ही इस बात का निर्णय करती है कि हमें अचानक धन की प्राप्ति होगी या नहीं।

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भारत का भविष्य – ओशो

सुना है मैंने कि चीन में एक बहुत बड़ा विचारक लाओत्सु पैदा हुआ। लाओत्सु के संबंध में कहा जाता है कि वह बूढ़ा ही पैदा हुआ। यह बड़ी हैरानी की बात मालूम पड़ती है। इस पर भरोसा आना मुश्किल है। मुझे भी भरोसा नहीं है। और मैं भी नहीं मानता कि कोई आदमी बूढ़ा पैदा हो सकता है। लेकिन जब मैं इस हमारे भारत के लोगों को देखता हूं तो मुझे लाओत्सु की कहानी पर भरोसा आना शुरू हो जाता है।

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