Posted inलघु कहानी - Short Stories in Hindi, हिंदी कहानियाँ

घोड़ा मिल गया – इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग

एक बार एक यात्री किसी गाँव से होकर गुजर रहा था। रास्ते में रात हो गई तो उसने गाँव के बाहर एक पेड़ के नीचे अपना बिस्तर लगा लिया और अपने घोड़े को उस पेड़ के साथ बांधकर वहीं सो गया। अगली सुबह जब वह सोकर उठा तो उसका घोड़ा किसी ने चुरा लिया था। […]

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खूबी पर घमंड मत करो – इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग

एक बड़ी सुंदर तितली थी। वह जब इधर से उधर उड़ती तो लोग उसकी सुंदरता को सराहते और बच्चे उसे पकड़ने के लिए उसके पीछे दौड़ते। उसे अपने रूप पर अहंकार हो गया। एक दिन वह एक हाथी के ऊपर आ बैठी और उसके विशाल डीलडौल का मजाक उड़ाने लगी। हाथी ने उसे समझाने की […]

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नेकी काम की चीज़ – इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग

एक बार एक पहुँचे हुए संत ने भिखारी का रूप धारण किया और लोगों की दयाभावना परखने के लिए शहर में घूमने लगे। वह भिक्षा के लिए एक बाल काटने वाले की दुकान पर पहुँचे, जो कि उस समय एक धनी ग्राहक की हजामत बना रहा था। उसने तुरंत उस धनिक वे उस दिन जो […]

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सुखी व्यक्ति – इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग

एक दार्शनिक था। वह इतना सादगी पसंद था कि पैरों में जूते तक नहीं पहनता था। फिर भी वह रोजाना नगर के एक भव्य बाजार में घूमने जाता। हर दुकान के सामने कुछ पल खड़ा होता, वहाँ सजाकर रखी हुई वस्तुओं को देखता, मुस्व़्ाफ़ुराता और आगे बढ़ जाता। यह सिलसिला एक लंबे समय से चल […]

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दुख का कारण – इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग

एक राजा के पास एक बेशकीमती हीरा था। वह उस हीरे को अपनी जान से ज्यादा संभालकर रखता था। कई बार तो उसकी चिंता में उसे रातों को नींद तक नहीं आती थी। वह बूढ़ा हो चला था और अब उसे यह फिक्र सताने लगी थी कि उसके जाने के बाद हीरे की देखभाल कौन […]

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चापलूसी में कुछ नहीं रखा – इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग

दो कवि मित्र थे। एक बहुत स्वाभिमानी था और इसी स्वाभिमान के चलते बहुत अभावों में जी रहा था। जबकि दूसरा मित्र बहुत अवसरवादी था और किसी तरह जुगाड़ जमाकर राजा के दरबार में राजकवि बन गया था। एक दिन वह अपने निर्धन मित्र के पास पहुँचा। उस समय वह दाल के साथ रोटी खा […]

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प्रवचनों का सार – इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग

एक बहुत ज्ञानी संत थे। वह जब प्रवचन देते तो लोगों को लगता कि ज्ञान की गंगा बह रही है। बड़ी संख्या में लोग उनका प्रवचन सुनने आ और मंत्रमुग्ध होकर घंटों तक उन्हें सुनते रहते। लेकिन, वहाँ से जाने के बाद वे संत की कही सारी बातें भूल जाते। इस बात का एहसास संत […]

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स्वतंत्रता का सुख – इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग

कहने को तो वह शासक था, लेकिन वह अपने को अशक्त, परतंत्र और पराजित महसूस करता था। एक दिन वह अपनी चिंताओं से पीछा छुड़ाने के लिए बहुत दूर एक जंगल में निकल पड़ा। एक झरने के पास वृक्षों की छाया तले एक युवा चरवाहा बांसुरी बजा रहा था। सम्राट ने चरवाहे से कहा, “तुम […]

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शुरूआत खुद से करें – इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग

वेस्ट मिनिस्टर एबे के तलघर में एक एंग्लिकन बिशप की कब्र पर ये शब्द लिखे थेः जब मैं छोटा और आजाद था तो मेरी कल्पना की कोई सीमा नहीं थी। तब मैं दुनिया को बदलने का सपना देखता था। जब मैं थोड़ा बड़ा और समझदार हुआ, तो मैं समझ गया कि दुनिया नहीं बदलने वाली, […]

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पाप का प्रायश्चित – इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग

एक दिन एक संत अपने प्रवचन में कह रहे थे. अनजाने में यदि गलती हुई तो व्यक्ति को आभास नहीं होता। इसलिए अतीत में तुमसे जो पाप हो गए हैं उनका प्रायश्चित करो और भविष्य में पाप न करने का संकल्प लो। प्रवचन समाप्त होने के बाद जब सभी लोग चले गए, एक व्यक्ति थोड़ा […]

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