रावण मरा हुआ युद्धभूमि में पड़ा था। उसके मृत शरीर को देखन लक्ष्मणजी गये और लौटकर आने पर उन्होंने बताया कि रावण के शरीर में छलनी की तरह असंख्य छिद्र हो रहे हैं। दल के वानरों ने जब लक्ष्मण से पूछा कि इतने छेद क्योंकर हुए, तो लक्ष्मण इतना ही कह सके कि राम के […]
Author Archives: डॉ. राजेन्द्र पटोरिया
भजन – इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग
महाराज युधिष्ठिर ध्यान में मग्न हुए वन में बैठे थे। ध्यान से उठे, तो द्रौपदी ने कहा, “धर्मराज! इतना भजन आप भगवान् का करते हैं, इतनी देर तक आप ध्यान में बैठे रहते हैं, फिर उनसे क्यों यह नहीं कहते कि इन संकटों को दूर कर दें? इतने वर्षों से आप और दूसरे पांडव वन […]
कष्ट-सहिष्णुता – इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग
एक व्यक्ति भगवान् महावीर से ईर्ष्या किया करता था। उनकी कठोर तपस्या, त्याग और अहिंसा को निरा ढोंग मान वह उन्हें तंग करता रहता, किन्तु महावीर तनिक भी विचलित न होते। अन्त में हारकर वह उनके पास आकर बोला, “मैंने आपको नाना प्रकार के कष्ट दिये, किन्तु आप सब कुछ सहन करते रहे। यह आपसे […]
दानी निराला जी – इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग
इलाहाबाद के किसी मार्ग से निराला जी इक्के पर सवार होकर जा रहे थे। रास्ते में एक बुढ़िया ने देखा तो बहुत आशा में कहा, “बेटवा! अपनी अम्मा का कछु दे देतेव!” निराला जी ने इक्का रुकवाया, उस बुढ़िया के पास गये। उन्होंने गुस्से में कहा, “निराला की माँ होकर तुझे भीख माँगते शरम नहीं […]
पेड़ की व्यथा – इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग
किसी इलाके में एक ही पेड़ था। एक दिन उसने देखा कि एक “बच्चा उसकी छाया में खेल रहा है। पेड़ को बहुत अच्छा लगा। उसने बच्चे से दोस्ती कर ली। कुछ साल बाद बच्चा बड़ा हुआ तो उसने पेड़ के पास आकर कहा कि मुझे तुम्हारी एक शाखा चाहिए। उससे डंडा बनाकर मैं अपने […]
गुरु – इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग
हजरत इब्राहीम उन दिनों बलाख के बादशाह थे। अरब की गुलाम प्रथा के अंतर्गत उन्होंने एक गुलाम खरीदा और उससे नाम पूछा तो गुलाम ने कहा, “हुजूर! आप जिस भी नाम से चाहे मुझे पुकारें, वही मेरा नाम होगा।” “तुम क्या खाओगे?” “जो आप खाने को देंगे।” “तुम्हें कपड़े कैसे पसंद हैं?” “जैसे आप पहनने […]
सपने में हवाई महल – इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग
एक बार एक राजा को सपना आया, जिसमें वह एक ऐसे महल में बैठा था, जो हवा में झूल रहा था। जब वह सोकर उठा तो सपने का आनंद उसके दिमाग से नहीं निकल पा रहा था। उसने मुनादी करवाई कि जो उसके सपने में देखे झूलते महल को बनाएगा, उसे वह दस हजार स्वर्ण […]
जीवन ऐसे जिएँ – इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग
एक बार एक राजा के मन में ख्याल आया कि वर्षों से वह किसी यंत्र की तरह जीवन व्यतीत करता आ रहा है, अब समय आ गया है कि उसे जीवन को जीने का तरीका जान लेना चाहिए। उसने अपने राजगुरु से मंत्रणा की कि वह जीवन जीने का सही ढंग जानना चाहता है। राजगुरु […]
स्वयं में देखो – इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग
एक वृद्ध दंपत्ति बड़े प्रेम से मिलकर रहते थे। कुछ दिनों से पति को लगने लगा था कि उसकी पत्नी कुछ ऊंचा सुनने लगी है। उसके ख्याल में उसकी पत्नी को सुनने की मशीन इस्तेमाल की जरूरत थी। लेकिन, यह बात वह उससे कैसे कहे। इसलिएः उसने अपने पारिवारिक डाक्टर से सलाह ली। डॉक्टर ने […]
वर्तमान को देखो – इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग
एक बार एक ज्योतिषी एक गाँव में पहुँचा। वहाँ उसने यह प्रचार कर दिया कि वह ग्रह-नक्षत्रें का अपार ज्ञान रखता है और उनका अध्ययन। कर किसी के भी भूत-भविष्य के बारे में बता सकता है। उस गाँव के लोग कड़ी मेहनत करके दो जून की रोटी जुटाने में यकीन रखते थे, इसके सिवा उन्हें […]
