sapne mein hawai mahal
sapne mein hawai mahal

एक बार एक राजा को सपना आया, जिसमें वह एक ऐसे महल में बैठा था, जो हवा में झूल रहा था। जब वह सोकर उठा तो सपने का आनंद उसके दिमाग से नहीं निकल पा रहा था। उसने मुनादी करवाई कि जो उसके सपने में देखे झूलते महल को बनाएगा, उसे वह दस हजार स्वर्ण मुद्राएं पुरस्कार में देगा। बहुत सारे कलाकार, शिल्पी आए और उससे सपने का ब्यौरा सुना। अधिकतर अपनी असहायता प्रकट करके चले गए और जिन्होंने हिम्मत कर काम हाथ में ले भी लिया, वे भी ‘दो-चार दिन से ज्यादा नहीं टिक पाए।

करीब पंद्रह दिन बीत गए। राजा दरबार में बैठा हुआ था कि एक व्यक्ति उसके पास आया। उसने कहा कि महाराज, कल रात मैं आराम से सो रहा था कि मेरे सपने में चार लुटेरे आए और मेरा सारा सामान लूट ले गए। मेरा आपसे निवेदन है कि या तो लुटेरों को पकड़ कर मुझे मेरा लुटा सामान वापस दिलाया जाए या फिर उसके समान। मूल्य की राशि राजकोष से दिलाई जाए।

राजा गुस्सा होकर बोला कि तुम्हारा दिमाग तो नहीं फिर गया। भला सपने में आए लुटेरों को वास्तव में कैसे पकड़ा जा सकता है? इस पर वह बोला, वैसे ही जैसे कि आपके सपने में देखा हवाई महल बन सकता है। राजा को अपनी गलत समझ में आ गई। उसने उस व्यक्ति को उचित पुरस्कार दिया और महल के निर्माण का इरादा त्याग दिया।

ये कहानी ‘इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंIndradhanushi Prerak Prasang (इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग)