एक बार एक ज्योतिषी एक गाँव में पहुँचा। वहाँ उसने यह प्रचार कर दिया कि वह ग्रह-नक्षत्रें का अपार ज्ञान रखता है और उनका अध्ययन। कर किसी के भी भूत-भविष्य के बारे में बता सकता है। उस गाँव के लोग कड़ी मेहनत करके दो जून की रोटी जुटाने में यकीन रखते थे, इसके सिवा उन्हें किसी बात में कोई दिलचस्पी न थी। उन्होंने ज्योतिषी की बात को मजाक में उड़ा दिया।
लेकिन, ज्योतिषी को यकीन था कि वह उन्हें अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाकर रहेगा। उसने अपना अध्ययन और बढ़ा दिया। ऐसे ही एक रात वह आकाश की ओर देखता हुआ ग्रह-नक्षत्रें की स्थिति का जायजा लेता हुआ जा रहा था कि बेध्यानी में वह एक गड्ढे में गिर गया। उसने मदद के लिए चिल्लाना शुरू कर दिया। उसकी आवाज सुनकर आसपास के घरों के लोग वहाँ आ पहुँचे।
उन्होंने पूछा कि वह गड्ढे में कैसे गिर गया। ज्योतिषी ने बताया कि वह कैसे ऊपर की ओर देखते हुए चल रहा था, जिसकी वजह से उसे नीचे नहीं नजर पड़ी। इस पर गाँव वाले हंसते हुए बोले कि भाई, जब तुम सबका भविष्य बता सकते हो तो क्या तुम्हें अपना भविष्य मालूम नहीं था कि तुम इस गड्ढे में गिरने वाले हो? यह सुनकर ज्योतिषी को बहुत शर्म आई और वह सुबह होते ही गाँव छोड़कर चला गया।
सारः किसी भी ज्ञान की सार्थकता उसकी व्यावहारिकता में निहित होती है।
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