ped ki vyatha
ped ki vyatha

किसी इलाके में एक ही पेड़ था। एक दिन उसने देखा कि एक “बच्चा उसकी छाया में खेल रहा है। पेड़ को बहुत अच्छा लगा। उसने बच्चे से दोस्ती कर ली। कुछ साल बाद बच्चा बड़ा हुआ तो उसने पेड़ के पास आकर कहा कि मुझे तुम्हारी एक शाखा चाहिए। उससे डंडा बनाकर मैं अपने साथियों के साथ गुल्ली-डंडा खेलना चाहता हूँ। पेड़ ने उसे एक शाखा दे दी।

कुछ साल बाद बच्चे ने पेड़ से कहा कि मुझे तुम्हारे तने से कुछ लकड़ी चाहिए ताकि मैं उससे अपने अध्ययन के लिए कुर्सी और मेज बनवा सकूं। पेड़ ने इस बार भी उसकी इच्छा पूरी कर दी। सालों बाद वह फिर आया। अब उसने पेड़ से कहा कि मेरा विवाह होने वाला है, मुझे अपनी दुल्हन को घर लाने के लिए एक पालकी बनानी है, उसके लिए तुम्हारी लकड़ी चाहिए।

पेड़ ने लकड़ी दे दी। इस क्रम में देखते-देखते वह एक ठूंठ में बदल गया। एक दिन वही बच्चा आया और बोला कि मुझे तुम्हारा यह ठूंठ चाहिए ताकि मैं इससे डोंगी बनाकर मछलियां पकड़ सकूं और अपने बच्चों का पेट पाल सकूं। यह सुनकर पेड़ का दिल टूट गया और वह एक ही बार में धराशायी हो गया। आदमी ने वही किया, जो उसे करना था। लेकिन जब उसने पेड़ के बारे में बच्चों से बताया तो बच्चों ने उससे कहा इसी का नतीजा है कि आज हमारे पास अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए कोई पेड़ नहीं है।

ये कहानी ‘इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएंIndradhanushi Prerak Prasang (इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग)