वेस्ट मिनिस्टर एबे के तलघर में एक एंग्लिकन बिशप की कब्र पर ये शब्द लिखे थेः जब मैं छोटा और आजाद था तो मेरी कल्पना की कोई सीमा नहीं थी। तब मैं दुनिया को बदलने का सपना देखता था। जब मैं थोड़ा बड़ा और समझदार हुआ, तो मैं समझ गया कि दुनिया नहीं बदलने वाली, इसलिए मैंने अपने लक्ष्य को थोड़ा छोटा कर लिया और सिर्फ अपने देश को बदलने का फैसला किया। लेकिन देश भी बदलने को तैयार नहीं था।
जब मैं बड़ा हो गया, तो मैंने हताशा में अंतिम कोशिश की कि अपने परिवार को ही बदल लूं जो मेरे सबसे करीब है। लेकिन मेरे परिवार वाले भी बदलने को तैयार नहीं थे।
और अब जब मैं अपनी मृत्युशैया पर लेटा हूँ, तो अचानक मुझे यह एहसास हुआ अगर मैं सबसे पहले खुद को ही बदल देता, तो मुझे देख कर मेरा परिवार भी बदल जाता। हो सकता है उनकी प्रेरणा और प्रोत्साहन से मैं देश को बेहतर बना पाता। कौन जाने मैं शायद दुनिया को बदल देता।
ये कहानी ‘इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग’ किताब से ली गई है, इसकी और कहानियां पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं– Indradhanushi Prerak Prasang (इंद्रधनुषी प्रेरक प्रसंग)
