Hindi Kahani: कितना ख़ुश और संतुष्ट महसूस कर रही थी सलोनी ..एक सुकूँ भरी निगहों से उसने ऊपर खुले आसमाँ की तरफ़ देखा ।नैनीताल के इस उन्मुक्त गगन में वो अपने पंख पसार कर उड़ना चाहती थी। वो खुले आसमान की खुली हवा में अपनी मर्ज़ी से ख़ुद की साँसे ले रही थी ।आख़िर आज वो पहली बार अपने लिए ,अपनी ख़ुशी के लिए ,ख़ुद की प्राथमिकता के लिए घर के बाहर निकली थी ।अपने लिए उसने एक निर्णय लिया था ,यधापि निर्णय था बहुत छोटा सा पर उसके लिए तो बहुत बड़ा था ।अपनी शादी के 25 साल उसने सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने घर और परिवार के लिए जियें ।ऐसा नहीं था की उसके कोई अरमान ,सपने या फिर उसकी ज़िंदगी नहीं थी ,पर उन सबको भूल कर उसने
हमेशा ख़ुशी -ख़ुशी प्राथमिकता सिर्फ़ अपने परिवार को दीं ।
कहीं जाना होता तो परिवार के साथ ,हँसना तो परिवार के साथ , मन्नतें तो भी परिवार की ख़ुशी के लिए , यहाँ तक कि सुमित अपने पति से पूछे बिना तो कभी अपने मायके भी नहीं गयी ,सब कुछ ख़ुशी -ख़ुशी बिना किसी शिकायत के अपनी ज़िम्मेदारियों का निर्वाह कर रही थी ।घर में सभी की प्राथमिकताए समय के साथ -साथ बदलती गयीं पर सिर्फ़ उसकी प्रथिमकता नहीं बदली और ना ही उसके लिए किसी की बदली ।समय बदला ,बच्चे बड़े हो गए ,सास -ससुर बूढ़े हो गए ,पर उसकी प्राथमिकताए तो शायद बदलना ही भूल गयी ।
अब तो थोड़ी -थोड़ी चाँदी बालों में भी दिखने लगी थी ।उसका अस्तित्व तो अपने परिवार की इन्हीं प्राथमिकताओं में कहीं खो सा गया था ।ढूँढना चाहे तो भी नहीं मिलता उसे उसकी मर्ज़ी का जीवन या फिर वो ढूँढना ही नहीं चाहती थी ….पता नहीं ।
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ईश्वर ने स्त्री की रचना की ऐसी की है जो सिर्फ़ दूसरों के लिए जीती है ।कोमल हृदय ,आँखों में आँसू ,त्याग ,समर्पण के गुणों से शोभित किया है ईश्वर ने स्त्री को ।दूसरों की मुस्कान पर अपनी मुस्कान रख कर मुस्कुराती है ।घर -परिवार की ख़ुशियों में ही तो अपनी ख़ुशियाँ ढूंढ कर सदैव
ख़ुश रहती है ।आज वर्षों पश्चात् उसका उसकी बचपन की सहेली वृंदा के साथ दो दिन के लिए घूमने का प्रोग्राम बना था , जो कुछ दिनों के लिए अमेरिका से आयी हुई थी ।
“क्या बात है सलोनी आज बहुत ख़ुश नज़र आ रही हो …भई कहीं जाने की तैयारी है ..उसे ख़ुशी से अलमारी से कपड़े निकालते देख उसके पति सुमित ने उससे पूछा
” हाँ सुमित तुम्हें मैं ख़ुद सरप्राइज देकर बताना चाहती थी ।वो मेरी बचपन की सहेली है ना वृंदा ,
वो आजकल अमेरिका से आयी हुई है ।इसलिए आज उसके साथ दो दिन के लिए नैनीताल घूमने का प्रोग्राम बनाया है मैंने “ कह कर वो सुमित के हाव -भाव पढ़ने लगी ।उसे उम्मीद थी कि सुमित उसके इस प्रोग्राम में उसका साथ देगा किंतु …
” पर आज तुम कैसे जा सकती हो ? वो भी
अकेले … और वैसे भी आज तो संडे
है मेरी और बच्चों ,सबकी छुट्टी है और ..दो दिन …नहीं भई नही तुम्हारे बिना दो दिन तो हम सभी का जीवन और ये घर बिलकुल अस्त-व्यस्त हो जाएगा “
वो परेशान हो कर बोला
“तो क्या हुआ सुमित ।हर संडे मैं तुम्हारे साथ ही तो गुज़ारती हूँ ….और दो दिन तो यूहीं निकल जाएँगे ।और वैसे भी बच्चे भी अब बड़े हो गए हैं ,थोड़ा -थोड़ा सब मैनेज करोगे तो सब हो जाएगा “वो चिढ़ कर बोली
“पर माँ -पापा का क्या ? उनकी दवाई ,उनका
खाना कौन देगा ?”
” उसकी तुम टेन्शन मत लो ।दवाई आशू दे देगी ।और खाना भी बना देगी ।मैंने उसे पूरा ट्रेन कर दिया है “
” जो भी हो ।वैसे भी माँ -पापा को दोस्त -सहेलियों के साथ घूमना अच्छा नहीं लगता ।” सुमित की इस बात से उसे ग़ुस्सा आ गया
“ सुमित तुम अपने दोस्तों के साथ जाओ तो उन्हें अच्छा लगता है ,बच्चे जाएँ तो भी अच्छा लगता है …बस मेरा ही अच्छा नही लगेगा ।इन पच्चीस वर्षों में मैंने सदा अपने घर -परिवार को ही प्राथमिकता दी है ।सबकी खुशियों को पलकों पर सजाया है ।मैं तो कभी अपने लिए जी ही नहीं ,अपने सारे सपने ,सारी इच्छाएँ दिल के किसी कोने में बंद कर दी थी और कभी शिकायत भी नही की ..और ना ही मुझे कोई मलाल है ।जो किया अपनी ख़ुशी और इच्छा से किया ,किंतु आज दिल में वो छुपे सपने पुन: फड़फाड़ने लगे है ।बस दो ही दिन की तो बात है सुमित …” कहते -कहते उसकी आवाज़ भर्रा गई “और फिर इस हफ़्ते के आख़िर में तो वो वापिस अमेरिका चली जाएगी जब से वो इंडिया आयी है माँ जी की ख़राब तबियत की वजह से मैं उससे मिलने भी नही जा पाई …लेकिन अब वे ठीक हैं तो मैंने ये नैनीताल घूमने जाने का निर्णय लिया ..” कुछ क्षण रुक कर वो पन: बोली ” वो मुझे नहीं पता …पहले घर -परिवार फिर घूमना -फिरना “कह कर सुमित चला गया
सलोनी की आँखों से अश्रुओं की धारा बहने लगी ।बहुत मन से उसने कपड़े तैयार किए थे ।मन मसोस कर रह गयी बेचारी ।उसे क्या पता था कि सुमित के लिए उसका सरप्राइज उसके लिये ही सरप्राइज बन जाएगा ।थोड़ी देर बाद वो बाहर गयी और पूरे आत्मविश्वास और हिम्मत से बोली , ” सुमित मैं आज घूमने जा रही हूँ ।आज ज़रा सा ख़ुद के लिए जीना चाहा तो घर -परिवार सामने आ गया ।25 साल मैंने सिर्फ़ और सिर्फ़ घर -परिवार को प्राथमिकता दी है ।पर अब और नहीं ।
समय के साथ सभी की प्राथमिकता बदली हैं ।बच्चों की प्राथमिकता घर की जगह उनके दोस्त हो गए , तुम्हारी भी तो सुमित मेरे साथ की जगह दोस्तों के साथ वीक-एंड पर ताश खेलने की हो गयी और माँ -पापा की जगह -जगह मंदिर दर्शन की हो गयी ।पर मेरी ??? मेरी प्राथमिकता तो आज भी 25 साल पहले जिस मोड़ पर खड़ी थी आज भी वही खड़ी है ।मेरी ज़िंदगी ,मेरी ख़ुशियों के बारे में तो आज -तक किसी ने सोचा ही नहीं ।इसलिए सबकी बदलती प्राथमिकता के साथ आज मैंने भी अपनी प्राथमिकता बदलने का छोटा सा निर्णय लिया है ।ख़ुद के लिए जी कर थोड़ी ख़ुशियाँ मैं भी समेटना चाहती हूँ ।क्यूँकि आज मैं एक माँ ,बहू या बीवी बन कर नहीं सलोनी बन कर जा रही हूँ ” कह कर सलोनी कमरे में चली गई “ पापा …मम्मी को जाने दीजिए ।ये सारा हमारा प्लान है …मम्मी को मदर्स डे का हमारी तरफ़ से एक छोटा सा उपहार है ।और मम्मी के इस निर्णय में दादा -दादी जी का भी सहकार है पापा ।आपको ये बात वे ख़ुद बताना चाहतीं थीं ।” उसकी बेटी आशु बोली
“ पापा …मम्मी ने हमेशा अपना सर्वस्व हम पर न्योछावर किया है …. सदा हमहे ही प्राथमिकता दी है ।तो क्या उनकी ख़ुशी ,उनके सपने ,उनकी प्राथमिकताएँ कोई मायने नही रखतीं ।उन्हें भी अधिकार है उन्मुक्त गगन में उड़ने का, इसलिए प्लीज़ …” तभी उसका बेटा अर्णव बोला ।बच्चों की बात सुन कर वो कमरे के भीतर चला गया ।
थोड़ी देर बाद वो कमरे से सलोनी की अटैची हाथ में लेकर बोला ,“ इंजॉय यूअर मदर्स डे गिफ्ट सलोनी , हैप्पी एंड सेफ जर्नी “ !
