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गृहलक्ष्मी की कहानियां

ज्ञानपुरा कस्बे से रोडवेज बस शहर की ओर दस किमी ही चली होगी कि अचानक तकनीकी खराबी आने से ब्रेक डाउन हो गई। कंडक्टर ने सवारियों से कह दिया, कि एक घंटे बाद आने वाली बस में सवारियों को बिठा दिया जाएगा। कुछ सवारी बस में ही बैठी रही और आने वाली बस का इंतजार करने लगी।

एक फरवरी का दिन, शाम के पांच बजने को थे। जहां बस रुकी वहां छोटी नहर में पानी कल-कल करता बह रहा था। दूर किनारे पर कुछ लोग हाथ-मुंह धो रहे थे। नहर के दोनों ओर दूर-दूर तक हरी भरी फसल से हरियाली वातावरण बड़ा सुहावना लग रहा था।

बस में बैठे ज्ञानपुरा सीनियर सैकण्डरी स्कूल के ड्राइंग व्याख्याता अमन शर्मा और कस्बे के ही प्राथमिक स्कूल की युवा टीचर मधु गुप्ता भी उतरने वाली सवारियों में से थी। अमन ने नहर के आसपास का नजारा देखा तो,उसने अपने बैग से स्केच बुक और पेन्सिल निकाल कर वहां के दृश्य को स्केच करने लगा। मधु भी उत्सुकतावश उसी के पास खड़ी होकर उसे स्केच बनाता देख खुश हो रही थी। वह स्केच की सुन्दरता देख बोली-’अमन सर! आपका अच्छा अभ्यास है स्केच बनाने में। वह उसकी बात सुन मुस्करा दिया। मधु भी पास ही एक नीम के पेड़ के नीचे रखी पट्टी पर बैठ गई।

अमन स्केच बनाकर वहां से उठकर सामने चाय की गुमटी पर चला गया। मौसम मे ठंडक बढ़ने लगी थी। उसने चाय वाले से दो चाय के लिये बोला। चाय तैयार हुई तो वह चाय के गिलास लिये मधु के पास पहुंच गया। वह दोनों चाय पीने लगे। अमन ने उससे पूछा-’आपको मेरा नाम कैसे मालूम हुआ ?’ ’उसने बातों का सिलसिला शुरू किया था। हमारे स्कूल की एक टीचर ने ही बताया था।’ वे पिछले एक माह से रोज बस में आते-जाते मिलते थे। पर परिचय के लिये आज ही पहली बार बात हुई। अमन ने पूछा-’ मधु क्या यहां आपकी पहली पोस्टिंग है?’ ’हां मैंने थर्ड ग्रेड में पहली बार ही सरकारी मिडिल स्कूल में जॉइन किया है। बूंदी की जवाहर नगर कॉलोनी में रहती हूं। मैंने हिंदी में एम.ए. किया है और बाद में बी.एड. भी कर लिया। छब्बीस वर्ष की उम्र में जाकर नौकरी मिली है।’

’आपके मम्मी पापा क्या करते हैं ?’ ’पापा तो राइस मिल में काम करते हैं। मां घर पर ही सिलाई करती है।’ ’आप कितने भाई-बहन हैं ?’अमन चाय के साथ मधु के बारे में सब कुछ जान लेना चाह रहा था।

’हम दो बहनें हैं। बड़ी बहन की शादी कोटा की है, वह निजी चिकित्सालय में नर्स है। जीजाजी सैकण्ड ग्रेड टीचर है।’

’अब तो बस आप की ही रह गई शादी। शायद अब नौकरी लग गई, अच्छे ऑफर आने लग जाएंगे। पहले भी प्रयास किया होगा, मम्मी पापा ने ?’ ’हां प्रयास तो किया था, लेकिन जहां भी बात चली सब अच्छा दहेज मांगते हैं। इसलिए अभी तक कुछ बैठ नहीं पाया।’
‘क्या आप अन्तर जातीय विवाह परम्परा से सहमत है ?’

‘यदि हमारे समाज के संस्कारों व रीति-रिवाज के अनुकूल हों तो विचार किया जा सकता है।’ ‘और यदि लड़का सरकारी नौकरी वाला हो तथा दहेज की कोई मांग न हो तो ऐसे में आपका क्या विचार होगा ?’ अमन ने सुन्दर सी मधु को अपने लिये टटोलने का प्रयास किया।
‘कुल मिलाकर यह सब मेरे मम्मी-पापा के ऊपर निर्भर है।’

‘तो क्या आपकी अपनी पसंद का कोई महत्त्व नहीं ?’ ‘नहीं ऐसी बात नहीं, वह भी मेरी पसंद को ही प्राथमिकता देंगे। पर यदि हम सबका निर्णय एक हो जाएगा तो सबके लिये प्रसन्नता की बात रहेगी।’ इतना सब कुछ जानकर वे दोनों चाय पीकर फिर नहर के किनारे की ओर चल दिये। अभी भी दस मिनट शेष थे बस आने में। वह वहीं खड़े होकर बात करते रहे।
इस बार मधु ने भी अमन के बारे मे जानना चाहा। ‘अमन सर! आप यहां कब से हैं ? और शहर में कहां रहते हैं ?’अमन को ऐसी आशा नहीं थी कि मधु गुप्ता भी उसी की तरह परिचय पूछने लगेंगी।
अमन ने कहा-’मेरा भी यहां ड्राइंग व्याख्याता के पद पर पहला पोस्टिंग है। यहां आए छः माह हो गए। मैं भी माता-पिता का अकेला संतान हूं। घर में सिर्फ मां है। पिता का तीन वर्ष पहले हार्ट अटैक से निधन हो गया।’

‘तब तो आपकी मां भी चाहती होगी कि जल्द ही उनके घर में बहू आ जाये। और फिर अब तो आप सरकारी टीचर है। शादी के लिये प्रस्ताव भी आ रहे होंगे ?
‘ऑफर तो आए पर अभी कोई जमी नहीं। आपसी कोई सुन्दर लड़की मिल जाए तो निर्णय कर लूंगा।’ इस पर वह दोनों हँस दिए। मधु को लगा अमन उसकी सुन्दरता पर मोहित है।
तभी हॉर्न बजाती बस आ गई। सभी सवारियां सीट पाने के लिये दौड़ पड़ी। पर उस बस में कुछ ही सीटें खाली थी। इसलिये कुछ सवारियां को खड़ा रह कर ही सफर करना पड़ा।अमन और मधु भी पीछे खड़े हो गये। बस जल्द ही हवा में बातें करने लगी।कुछ ही देर में एक दो गांव आये तो कई सवारियों के वहां उतर जाने से अब उन्हें भी जगह मिल गई। दोनों एक ही सीट पर बैठ गये। फिर उनकी अन्तहीन बातों का सिलसिला ऐसा चला, जैसे कई दिनों से एक दूसरे से बातें करने को तरस रहे हों। फिर उन्होंने अपनी रूचियों के बारे में बताया। अमन ने कहा मैंने राज्य स्तरीय कला सृजन प्रतियोगिता में भाग लिया। दोनों बार ड्राइंग में दूसरे स्थान पर रहा। कई पत्रिकाओं में मेरे स्केच भी छपते रहते हैं।’

‘और आपकी क्या विशेष रूचि है? अमन ने जानना चाहा।
‘मैंने हिन्दी मे एम.ए. किया है। हमें पढ़ाने वाले शिक्षक साहित्यिक रूचि रूझान वाले थे। वह हमें लिखने की प्रेरणा देते रहते थे। इसलिये मैंने भी कुछ साहित्य कहानी कविता का सृजन किया। अभी पिछले माह की एक साहित्यिक पत्रिका में मेरी एक कहानी तथा इसी माह प्रदेश के एक लोकप्रिय समाचार पत्र में कविता भी प्रकाशित हुई है।’

‘ऐसा सृजन तो प्रसन्नता की बात है। आप प्रकाशित दोनों रचनाएं मुझे बताना।’ शहर आते ही उनकी बातें थम गई। बस से उतर कर दोनों गुड बाई करते अपनी राह पर आगे बढ़ गये।

दोनों रात को एक दूसरे के बारे में सोचते रहे । मन ही मन एक दूसरे को चाहने लगे। सोचने लगे कितना अच्छा हो कि वह आपस में सदा के लिये विवाह बंधन में बंध जाएं
दूसरे दिन अमन समय पर स्कूल जाने के लिए बस में बैठ गया। बस रवाना हो गई। वह मधु का इंतजार करता रहा। दो दिन तक वह अकेला आता जाता रहा। उसने उसे अपने मोबाइल नम्बर भी नहीं दिये और न उसके पास मधु का नंबर है। बात भी हो तो कैसे ?’

सोमवार को वह समय पर बस स्टैंड पहुंच गई। दोनों एक दूसरे को देख मुस्करा दिये। आज मधु रंगीन परिधान में बहुत आकर्षक लग रही थी। स्कूल जाते अब दोनों का प्रयास रहता कि वह दो वाली सीट पर ही बैठे, ताकि बातों का सिलसिला चलता रहे।

‘दो दिन कहां रही? कहीं बाहर गई होगी ?’अमन उसके व्यक्तिगत जीवन में रूचि लेने लगा था।’
‘बाहर तो नहीं गई थी। घर पर ही मजबूरी में रहना पड़ा।’
‘ऐसी क्या मजबूरी आ गई ? परिवार में तो सब कुशल से है न ?’उसने सहानुभूति दर्शाते हुए न आने का कारण जानना चाहा।’

‘क्या है, पापा ने दो जगह मेरी बात चला रखी थी। अब मेरी नौकरी लग गई तो मैं लड़के वालों की पसंद की प्राथमिकता में आ गयी। कल जयपुर से एक पटवारी और दूसरा बारां से एक थर्ड ग्रेड टीचर अपने परिजनों के साथ आये थे। मधु ने खुले मन से बात कही।
‘फिर आपका क्या निर्णय रहा?कहां जाएंगी दुल्हन बन कर?’ अमन ने उत्सुक हो मधु के मन टटोला।

‘मैंने मम्मी-पापा से बोल दिया-अब मैं सर्विस में आई हूं तो कुछ और भी अच्छे ऑफर आ सकते हैं। वह भी मेरी बात से आश्वस्त हो गये। यूं तो दोनों लड़के वाले मुझे पसंद कर गये थे। लेकिन वे दोनों ही मेरी पसंद नहीं थे। अभी तो पापा ने उन्हें गोलमाल जवाब देकर कुछ समय बाद बात करने को कहा। मम्मी-पापा ने भी साफ कह दिया जहां तेरी पसंद होगी वहीं हां भरेंगे रिश्ते के लिये।’

‘आपने उन्हें क्यों नहीं पसंद किया? दोनों सरकारी कर्मचारी थे। आपके मम्मी-पापा को सुविधा होती आपके हाथ पीला करने की।’ अमन उसके अंतर मन की इच्छा को जानना चाह रहा था।
मधु के मन में तो अमन के प्यार की बांसुरी बज रही थी। उसने दरियादिली से कह दिया-‘जब अपने ही शहर में उनसे ज्यादा अच्छे पद पर कार्य कर रहे, आकर्षक व्यक्तित्व वाला लड़का हो तो दूर की बात सोचने की जरूरत ही कहां ?’ मधु ने मुस्कराते हुए अमन की ओर देखते हुए कहा।
मधु की बातों से अमन समझ गया था कि मधु की निगाहों में वही सुन्दर चेहरा है, जिसके लिये वह घर आये दोंनों लड़कों को ना पसंद कर रही थी।

मधु और अमन के बातों का सिलसिला और एक दूसरे के लिये आकर्षण बढ़ता रहा। कुछ ही दिनों में प्यार के इजहार का दिन वैलेण्टाइन डे आ गया।

स्कूल जाने के लिये दोनों बस स्टैण्ड समय पर पहुंचे पर बस अभी तक नहीं लगी थी। तब तक वह दूर एकान्त में हल्की धूप में खड़े हो गये। अमन अपने बैग से गुलाब का फूल निकाल कर मधु को देकर वैलेंटाइन डे पर अपनी ओर से प्यार की सरगम सुना दी। मधु ने भी उसकी भावना को देख, फूल हाथ में लेकर थैंक्स कह कर उसे घुमाती हुई अपने बैग में रख लिया। मधु अब उसे प्रेम भरी आंखों से देखने लगी थी।

ऐसे ही कुछ दिन और गुजर गये। मधु से एक दिन उसके मम्मी-पापा ने पूछा ’बिटिया तुम्हारी पसंद ? जरा बताओ ताकि उस हिसाब से तैयारी करें।’

‘पापा – मम्मी, आप पूछ ही रहे हैं तो मुझे वो दोनों पसंद नहीं। मुझे तो मेरे साथ ही अप डाउन करने वाले एक ड्राइंग के व्याख्याता अमन अग्रवाल पसंद है। वह पिछले छः माह से सरकारी सीनियर सैकण्डरी स्कूल में ड्राइंग व्याख्याता है।हम एक दूसरे को पसंद करने लगे हैं।’
‘ठीक है बिटिया,जैसी तेरी इच्छा।रविवार को सुबह उन्हें अपने यहां चाय पर आमंत्रित कर लेना।बात कर लेंगे।यह तो अच्छी बात है हमारी बेटी हमारे ही शहर में रहेगी।’
मधु के मम्मी-पापा ने अमन के घर जाकर उसकी मां से बात की। उसने तो साफ कह दिया जो अमन की पसंद होगी वही मेरी बहू होगी।’

दोनों परिवार की सहमति से दिसम्बर में मधु और अमन का विवाह सम्पन्न हो गया। अब वह खुश थे कि उनकी टुकड़ों में बंटी मुलाकातों से उन्हें उनकी मन्जिल मिल गई और सदा के लिये वह एक—दूसरे के हो गये।

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