विचार से आधुनिक होना जरूरी है-गृहलक्ष्मी की कहानी: Thoughts Story
Vichaar se Adhunik Hona Jaruri Hai

Thoughts Story: सोनिया अपनी पेंटिंग में रंग भरने में व्यस्त थी। सोनिया को ये शौक बचपन से नहीं था, ये कला तो उसने अपने पति युवराज से सीखी है, जो मल्टीनेशनल कम्पनी में मैनेजर होने के बावजूद बहुत अच्छी पेंटिंग्स करना और गिटार बजाना जानते हैं। पति के सिखाए गुर पेंटिंग को सोनिया ने अपने जीवन में एक साधना की तरह अपना लिया था पेंटिंग ने उसकी पहचान और जीवन जीने के रुख को पूरी तरह से बदल दिया था। सोनिया के चेहरे की मासूमियत सौम्यता, सादगी और संयमित जीवन शायद इस कलाकारी की वजह से ही अभी तक चेहरे पर चांदनी के मानिंद बिखरी हुई थी।

सोनिया के दो बच्चे एक बड़ी बेटी खुशी दस साल की, दूसरा बेटा रोहन सात साल का था। बच्चे थोड़े बड़े हो चुके थे तो सोनिया को अब पहले से काफी समय मिल जाता अपनी कल्पना को आकृति देकर रंग भरने का। अपने कमरे में सोनिया अपनी कल्पना को आकृति प्रदान कर उसमें रंग भर ही रही थी कि तभी मेड ने कमरे पर दस्तक देते हुए कहा, ‘भाभी! आपसे मिलने सरला मैडम आई हैं।
इतना सुनते ही सोनिया सोच में पड़ गई और उसने कहा, ‘ठीक है, उनको अंदर बैठाओ, मैं अभी आती हूं।

सारे सामान को समेट कर सोनिया हॉल में पहुंची। देखा सरला सोफे पर बैठी हुई है। उसने हंसते हुए कहा, ‘अरे सरला जी, आप बहुत दिनों बाद आईं, और बताइए कैसी हैं? बच्चे कैसे हैं? सरला ने कहा, ‘मैं तो ठीक हूं आप बताइए कैसी हैं? बहुत दिनों से सोच रही थी लेकिन समय ही नहीं मिल पा रहा था आपसे मिलने का, अभी तक सिर्फ आपकी वीडियो ही देखी थी। आज सोचा आपसे मिल भी लूं। आप व्यस्त तो नहीं थीं, आप इतनी प्रसिद्ध चित्रकार हैं। बहुत अच्छी पेंटिंग बनाती हैं। मेरे तो बच्चे आपके वीडियो के दीवाने हैं। सोनिया, ‘जी बहुत-बहुत धन्यवाद आपका। आप हमारी किट्टी में शामिल हो जाइए। मैं आपको अपनी किट्टी पार्टी के लिए आमंत्रित करने आई थी, सच तो यही है। इसी बहाने आप मेरी सहेलियों से मिल लेंगी। आज शाम 4 बजे पार्टी रखी है, लोगों से मिलना-जुलना भी हो जाएगा।

सोनिया का चेहरा किट्टी पार्टी का नाम सुनते ही उदासीन हो गया, जिसे देखकर सरला ने कहा, ‘कुछ गलत कह दिया क्या मैंने? मेरी बात बुरी लगी हो तो माफी चाहूंगी। सोनिया ने कहा, ‘अरे! नहीं सरलाजी, लेकिन माफी चाहूंगी मैं किट्टी पार्टी में नहीं जाती। मेरे पास समय नहीं है। सरला, ‘लेकिन क्यों? आपके तो बच्चे भी बड़े हैं। हमारे ग्रुप में तो ऐसी भी महिलाएं हैं जिनके बच्चे बहुत छोटे हैं। और तो और उस समय पर तो आपके बच्चे स्कूल में रहेंगे। बुरा मत मानिएगा लेकिन हम महिलाओं को समय खुद के लिए निकालना पड़ता है। हमारे लिए खाली समय रखा नहीं होता, अच्छा चलती हूं। जैसा आप उचित समझें फैसला लीजिएगा, वैसे आप आईं तो आपका हार्दिक स्वागत है। लेकिन सोनिया ने दुबारा बड़ी सहजता से आज सरला को मना कर दिया, ये कहते हुए की वो कभी इस तरह की पार्टियों में नहीं जाती।

सोनिया को अभी नई सोसायटी में शिफ्ट हुए सिर्फ दो महीने ही हुए थे लेकिन अतीत की कड़वी यादों ने ऐसा गहरा असर सोनिया पर छोड़ा था कि वो पार्टी में जाना पसंद नहीं करती थी। किट्टी पार्टी का नाम सुनते सोनिया को कुछ सालों पहले की घटना याद आ गई। सोनिया ने मुंबई आने के बाद धीरे-धीरे अपनी बिल्डिंग की औरतों से मित्रता करनी शुरू की। सोनिया पहले की तरह संकोची सीधी और सरल नहीं, बल्कि एकदम मुंहफट और आधुनिकता के रंग में ढली हुई थी। सोनिया अब बिंदास जीवन जीने और अपनी पहचान बनाने में जुटी थी, वो कम समय में कुछ ऐसा करना चाहती थी जिससे पूरी दुनिया में उसका नाम हो।

अब आए दिन सोनिया और युवराज के झगड़े होने लगे। बच्चे भी छोटे थे सिर्फ तीन और पांच साल के। युवराज ने बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन सोनिया हर बार युवराज से यही कहती, ‘क्या मेरी कोई जिंदगी और पसन्द नहीं, क्या परिवार और बच्चों के पीछे अपनी खुशियां खत्म कर दूं। जाओ देखो मेरी दूसरी सहेलियों के पतियों को! कितना उनकी पसन्द का ख्याल रखते हैं।

एक दिन उसने देखा कि उसकी किट्टी की सभी सहेलियां एक औरत की बहुत तारीफ कर रही थी क्योंकि उसकी टिक-टॉक और यू-ट्यूब पर रील, वीडियो बहुत हिट होती थी। लोग उससे मिलने और उसके साथ फोटो खिंचवाने के दीवाने थे। उसे भी ये तरीका इतना भाया की अब वो हर वक्त बच्चों के खुद के वीडियो बनाती और उन्हें इंटरनेट पर डाल देती। बच्चों को भी वो डायलॉग मार-मार कर याद कराती। वीडियो बनाने के चक्कर में वो घर और बच्चों पर पूरा ध्यान ही नहीं दे पा रही थी।

वीडियो डालने के बाद वो हर एक पल मोबाइल पर ध्यान गड़ाए रखती। रात में भी वो उठ-उठकर मोबाइल खोलकर देखती रहती। शुरू-शुरू में जब थोड़े व्यूज आते तो खुश हो जाती लेकिन थोड़े दिनों बाद वीडियो वायरल नहीं होने पर उसके अंदर झुंझलाहट होने लगी। अब वो हर वक्त गुस्से में रहती। उसे लगता वो ऐसा क्या करे कि उसका वीडियो वायरल हो जाए और वो मशहूर हो जाए। लेकिन युवराज को ये सब पसंद नहीं था। एक दिन सोनिया जबरदस्ती युवराज को अपने साथ अपनी सहेली के घर उसकी जन्मदिन की पार्टी में लेकर गई।

युवराज भी बच्चों को साथ लेकर पहली बार सोनिया की खुशी के लिए खुशी-खुशी उसके साथ चला गया। सोनिया ने सारी सहेलियों से युवराज को मिलाया लेकिन युवराज पार्टी में महिलाओं और पुरुषों का ये रूप देखकर परेशान हो गया। दरअसल, पार्टी में बच्चे भी शामिल थे जिसकी वजह से उसको ज्यादा उलझन महसूस हो रहा था। सोनिया और युवराज को भी पीने के लिए मनाया जा रहा था। लेकिन, आधुनिकता की दुहाई देकर युवराज ने साफ मना कर दिया।

सोनिया की एक सहेली ने कहा, ‘भाईसाहब! आप पीना मत सिर्फ गिलास पकड़कर हमारे साथ रील बनावा लीजिए। टिक-टॉक पर वीडियो डालकर हम आपको ऐड कर देंगे। क्यों सोनिया, सही कहा ना और क्या मालूम इस वीडियो से ही तेरा इंटरनेट पर वायरल होने का सपना भी पूरा हो जाए। लेकिन युवराज ने सिरे से खारिज कर दिया। तभी सोनिया की दूसरी सहेली ने कहा, ‘अरे यार! तू बुरा मत मानना, लेकिन कहां तू और कहां तेरे ये हसबैंड।

सहेली के कमेंट ने सोनिया का मूड ऑफ कर दिया वो युवराज को घूर-घूर कर देखने लगी। और बात को टालते हुए कहा, ‘अरे बच्चों के सामने हम ड्रिंक्स नहीं करते हैं, कहते हुए सोनिया मुस्करा भर दी। दूसरी सहेली ने तपाक से बीच में आकर कहा, ‘अरे ये क्या बात हुई भला…, क्या तुम लोग घर पर उनके सामने ड्रिंक नहीं करते, जो यहां मना कर रहे हो? खुद के लिए जीना सीखो क्या हर समय पति, बच्चे, परिवार, समाज, ये सब लगाए रहती है। आखिर इन सब से ऊपर हमारी भी जिंदगी है या नहीं? सहेली ने अपने पति का हाथ अपने हाथों में लेते हुए कहा।

इस पर युवराज ने कहा, ‘बहुत अच्छी बात है लेकिन मुझे लगता है सबकी अपनी अलग सोच और जीवन जीने का तरीका होता है और हमारे लिए हमारा परिवार और बच्चे ही हमारी प्राथमिकता है।
फिर युवराज ने कहा, ‘सोनिया अब हमें चलना चाहिए, रात काफी हो गई है। कहकर सोनिया और युवराज बच्चों के साथ घर आ गए लेकिन पूरे रास्ते सोनिया का मुंह गुस्से में फूला ही रहा।

घर आते ही सोनिया युवराज पर गुस्से में बरस पड़ी। उसने कहा, ‘मिल गई कलेजे को ठंड, मेरी बेइज्जती करा कर। लेकिन आज युवराज ने कोई जवाब नहीं दिया और चुपचाप कमरे में सोने चला गया। अगले दिन दोपहर के समय सोनिया अपनी किटी पार्टी में दोनो बच्चों को सोता हुआ अकेला छोड़कर चली गई। उसे लगा जब तक बच्चे सोकर उठेंगे तब तक वो दो घंटे में वापिस आ जाएगी, लेकिन उसकी सोच के विपरीत बच्चे उससे पहले ही उठ गए और बेटी को बेटे ने बालकनी में लॉक कर दिया, जिससे डर कर वो जोर-जोर से रोने लगी।

बालकनी से पड़ोसी देखकर भी मदद नहीं कर सकते थे क्योंकि कमरा लॉक था। सोसाइटी के वाचमैन ने युवराज को फोन किया। और सारी स्थिति से अवगत कराया। तो युवराज ने कहा की वो घर का लॉक तोड़कर बच्चों को पहले सुरक्षित करे। इधर सोनिया युवराज और पड़ोसियों के लगातार फोन करने पर भी फोन नहीं उठा रही थी, क्योंकि उसका फोन साइलेंट मोड पर था। तभी अचानक सोनिया की नजर घड़ी की तरफ गई, देखा तो काफी समय हो गया था। उसका दिल ना जाने क्यों किसी अनहोनी की आशंका में जोर-जोर से धड़कने लगा। वो आज सबके कहने पर भी नहीं रुकी और भागती हुई घर पहुंची। देखा तो घर पर भीड़ इकट्ठा है और उसकी बेटी बेहोश है।

पड़ोसियों ने जब सारा हाल बताया तो वो बदहवास हो रोने लगी। तभी किसी ने कहा, ‘कैसी निर्दयी मां है, बच्चों को छोड़ पार्टी मना रही है। ऐसी औरतों को तो चुल्लू भर पानी मे डूब मरना चाहिए। ऐसे लोगों को भगवान को बच्चे ही नहीं देने चाहिए और भी ना जाने क्या-क्या! इतने में युवराज भी आ गया। सोनिया को लगा आज युवराज भी उसे कड़वी बातें सुनाएगा। आखिर गलती भी उसकी ही है। बेटी और बेटे को सीने से लगाए वो रो रही थी। युवराज ने सबको धन्यवाद बोलकर घर भेज दिया।

तभी बेटी को देखने आए डॉक्टर ने बोला, ‘बच्चे डर गए हैं बाकी कोई बात नहीं, सब ठीक है। अगली सुबह सोनिया के मोबाइल पर एक वीडियो आया था जिस पर मिलियन्स व्यूज थे। हर कोई उसकी बात कर रहा था, उसने खोलकर देखा तो ये कल हुई घटना की वीडियो किसी ने बनाकर इंटरनेट पर डाल दी थी। लोग उसके बारे में तरह-तरह की बातें कर रहे थे। ये सब देखकर वो कमरे में आकर जोर-जोर से रोने लगी।

पति युवराज ने सोनिया को डांटा नहीं अपितु बहुत प्रेम से गले लगाया और कहा, ‘देखो सोनिया तुम और मेरे बच्चे मेरा परिवार ही मेरी जान हैं, मेरी पूरी दुनिया तुम लोगो में बसती है। तुम्हारी वजह से ही मैं निश्चित होकर बाहर नौकरी कर पाता हूं क्योंकि मुझे तुम पर पूरा विश्वास है कि मेरी सोनिया बच्चो का अच्छे से खयाल रखती है। मैं तो तुम्हारे बिना कुछ हूं ही नहीं, तुम बहुत अच्छी पत्नी और मां हो। इस बात को तुम्हें किसी को भी साबित करने की जरूरत नहीं। ‘देखो सोनिया अपनी पहचान बनाने और खुशी-खुशी जिंदगी जीने के लिए बहुत से तरीके हैं, जिनको अपनाकर तुम सच्ची खुशी प्राप्त कर सकती हो। इसके लिए जरूरी है कि तुम अपने अंदर की शक्ति को पहचानो, यूं अंधी आधुनिकता के नाम पर हमारे इस प्यारे से परिवार को बर्बादी के अंधकार में मत धकेलो। कहते-कहते वह खुद भावुक हो गया।

सोनिया ने कहा, ‘युवराज, मुझे माफ कर दो। मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई। सोनिया ने उसी दिन अपने बहके कदमों को वापस मोड़ लिया। अब उसने खुद को भी समझाना शुरू किया और इसमें युवराज ने उसका पूरा साथ दिया। उसने उसे पेंटिंग करनी सिखाई और उससे उसकी वीडियो इंटरनेट पर डालने के लिए कहा। तभी कोरोना नामक वायरल बीमारी की शुरुआत हुई। सब कुछ बंद हो गया लेकिन इधर सोनिया इंटरनेट पर वायरल हो गई। बच्चे-बड़े उसकी वीडियो से ड्राइंग सीखने और पढ़ने लगे। उसकी पेंटिंग की बिक्री शुरू हो गई और देखते ही देखते सोनिया इंटरनेट पर वायरल हो गई। उसकी इंटरनेट पर वायरल होने की ललक पूरी हो गई। उसे अब समझ में आ चुका था कि इंटरनेट पर वायरल होने के लिए अभद्रता का सहारा लेने की कोई जरूरत नहीं। अपनी कला और हुनर के दम पर भी प्रसिद्धि पाई जा सकती है।

‘मम्मी, क्या सोच रही हो?’ बेटी ने सोनिया के कांधे पर हाथ रखकर खिलखिलाते हुए कहा। ‘कुछ नहीं बस कुछ याद आ गया था, तुम कब आई, जाओ जाकर कपड़े बदल लो। आज सोनिया बहुत खुश थी। तभी युवराज ने कहा, ‘कोई आया था क्या? सोनिया ने कहा, ‘हां, सोसाइटी से एक महिला आई थी, किट्टी के लिए निमंत्रन देने, मैंने मना कर दिया। तब युवराज ने कहा, ‘लेकिन क्यों? जाओ लोगोंं से मिलो, जान-पहचान बढ़ाओ। सोनिया, ‘नहीं! मैं अब फिर से वही गलती नहीं दोहराना चाहती, तुम तो जानते हो। तब युवराज ने कहा, ‘देखो सोनिया मैंने तब भी कहा था आज भी कह रहा हूं कि जिंदगी को अपने हिसाब से जियो, किसी की देखा-देखी नहीं। यानी हमें अपना गुण कभी नहीं छोड़ना चाहिए। चाहे आपके आसपास कैसे भी लोग हो। तब तुम मैच्योर नहीं थीं, सब कुछ नया था तुम्हारे लिए, लेकिन आज तुम्हें सब पता है। बच्चे भी अब बड़े हो गए हैं, अपना अच्छा बुरा समझते हैं।

आधुनिक विचारों से होना जरूरी है, तुमने बिल्कुल सही कहा। सोनिया मन ही मन डरते हुए किट्टी में पहुंची। सब उसको देखकर वहां खुश हुए। सरला ने सबसे उसका परिचय कराया। यहां महिलाएं इक_ा होकर समाज सेवा से जुड़ी नीतियों को तैयार करके गरीबो और जरूरतमंदों की मदद करती। जिन महिलाओं के छोटे बच्चे थे उनका विशेष रूप से ध्यान दिया जाता। पूछने पर पता चला कि वो अपने बच्चों को कहीं भी अपने साथ लेकर जाती है लेकिन कभी अकेला घर में छोड़कर नहीं जाती। आधुनिक कपड़ों में महिलाएं यहां विचारों से भी आधुनिक थी। ये जानकर सोनिया को बहुत खुशी हुई।