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मां अब बूढ़ी हो चली है—गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: मां अब बूढी हो चली है!एक रोज मैंने मां को गौर से देखा,उसके रेशमी बालों से झांक रही थी चांदी की रेखा!मैं एक पल को डर गई, सहम गई, अरे!यह क्या मेरी मां बूढी हो चली है!मैंने पास जाकर उसका हाथ थामा,तो अकस्मात ही दिख गई मुझे उसके चेहरे की झुर्रियां,मैं अंदर तक […]

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होली की मस्ती-गृहलक्ष्मी की कविता

Holi Poem: फागुन लेकर आ गया, रंग अबीर गुलाल।होली के इस रंग में,रंगे बाल गोपाल।।1जोगीरा.. सा.. रा.. रा ..रा…होली के इस पर्व में,प्रीत घुला है रंग।भीग रहीं हैं राधिके,मनमोहन के संग।।2जोगीरा.. सा.. रा.. रा ..रा…होली के इस पर्व में,झूम रहे घनश्याम।ताके सुंदर सँवरा, बरसाने का धाम।।3जोगीरा.. सा.. रा.. रा ..रा…प्रीत के इस रंग में, भीग […]

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नींव की ईंट-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: ईश्वर की सुन्दरतम कृति वो, नव जीवन की क्यारी है,हर घर की मनभावन तुलसी, ईंट नीव की, नारी हैं।वो बहती सरिता सी निश्छल,परमारथ के हित में जीती,उसको श्रेय कभी न मिलता,उसकी झोली रहती रीती।धैर्य,सहन शक्ति से उसकी,कठिन परिस्थिति हारी है,ईश्वर की सुन्दरतम कृति वो नव  जीवन की क्यारी है।बाबुल का आँगन तज करके,पिय […]

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स्त्री दिवस—गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: होना तो ये चाहिये था ,कि उनकी वेदनाओं पररखी जाती, नरम संवेदनाओं की रुईसबको  स्निग्धता से भरने वालियों केखुरदरे हाथों को मिलता, प्रेम का कोमल स्पर्शआँखों में भरे सपने ,साकार करने वालीआँखों के ,पूरे होते झिलमिल ख्वाबपर… चाँदनी भरने वाले चेहरों को मिले,आँखों के नीचे स्याह चाँदआत्मा भरने वाले तन को मिलीकविताओं में […]

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खोमचे भर मुहब्बत: Grehlakshmi Ki Kahani

Grehlakshmi Ki Kahani: फरवरी की गुलाबी ठंड कहीं दूर रेडियो पर लता जी के प्यार भरे नगमों की मंद स्वर लहरी हवा के पंखों पर सवार होकर खिड़की से आ रही थी। खिड़की से झांकती चांदनी और सफेद चांद की रौशनी से झोपड़ी नहा उठी। शांति ने न जाने क्या सोचकर खिड़की के परदों को […]

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मेरा वेलेंटाइन-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: पल पल ज़िगर में मेरेहसरतें जो बेहिसाब जगाता हैमैं तड़पती हूं जिसके लिएवो मेरा वेलेंटाइन कहलाता है ना छूकर कभी भी मुझेदर्द जो मेरा समझ जाता हैमैं तरसती हूं जिसके लिएवो मेरा वेलेंटाइन कहलाता है मैं जैसी हूं वैसी मुझेजो बेवजह चाहे जाता हैमैं आहें भरती हूं जिसके लिएवो मेरा वेलेंटाइन कहलाता है […]

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तुम मेरे उतने ही अपने-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: तुम मेरे उतने ही अपनेजितना अंबर अवनी का,जितना सागर नदिया का,चलते रहते वह साथ-साथ,पा लेने की नहीं है प्यास| तुम मेरे उतने ही अपनेजैसे मीरा मोहन की,जैसे राधा किशन की,ध्येय नहीं था पाने काभक्ति प्रेम अर्थ जीवन का| तुम मेरे उतने ही अपनेजैसे यशोधरा सिद्धार्थ की,उर्मिला जैसे हो लक्ष्मण की,जहाँ डर नहीं था […]

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सरस्वती वंदना-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: हे मांँ वीणा वादिनी ऐसा तू वरदान दे,ज्ञान से झोली तू भर दे, ज्ञान का आकाश दे। ज्ञान की गंगा बहे, ज्ञान का भंडार देज्ञान की चाशनी में, मांँ तू हमको पाक दे। ज्ञान की सरगम सजें, ज्ञान का संगीत होज्ञान के नूपुर बजें, ज्ञान के ही साज़ हो। ज्ञान से सजें लेखनी, […]

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रोज़ डे—गृहलक्ष्मी की ​कविता

Rose Day Poem: आज बाज़ार गई तोफूलों का व्यापार होते देखा,दुकानों,एक्स्ट्रा काउंटर्स परलाल गुलाब बेहिसाब देखा। ओह!आज रोज़ डे है…जो हर वर्ष फरवरी में आता है।दिमाग में एक विचार कौंधाये प्यार लाल गुलाब से ही क्यों दर्शाया जाता है? शायद लाल रंग प्यार का प्रतीक हो!पर फूल गुलाब ही क्यों, गुड़हल,डहेलियाभी तो हो सकता था?पर […]

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मां पापा होते तो ये पर्व उदास न होती-गृहलक्ष्मी की कविता

Hindi Poem: हृदय रो पड़ता है विशेष त्योहारों पर,आर्शीवाद का कोई फोन नहीं आता तीज त्योहारों पर,हमारी मायके की आस न टूट रही होतीमां पापा होते तो ये पर्व उदास न होती..जब आता तीज का पावन पर्व,गुलाबी साड़ी मोतियों वाली मां ने चूड़ी सिंदूर संग भिजवाई होती..पहनती जब तीज के दिन वो साड़ी,मां पापा का […]

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