Hindi Poem: बन रही स्मार्ट सिटी तोप रही दिखती मिट्टी क्या होगा प्रतिफल इसका कौन करे इस पर ड्यूटी गाँव बने स्मार्ट अगर पक्का होना है बेहतर पर जहाँ पर पत्थर ईंट पत्थर लगना कैसे बेहतर दुर्दशा है जीव जंतु की कल मानव तेरी होगी कोरोना के काल से भी सीख तूने न ली होगी […]
Category: कविता-शायरी
जल संकट-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Short Poem: जल संकट है बड़ी समस्या,सूख रही झीले और नदियाँ,जनसंख्या भी बढ रही,जल की मांग बढ़ रही ।जल जीवन है जल आधार,जल बिन जग है निराधार,चौमासे में बरखा आती ,भर भर कर पानी लाती ,सभी मगन हो जाते है,कढी पकौडे खाते है।बारिश का पानी बह जाता,कोई उसे संग्रह न करता ,पोखर, कुएँ सूखते […]
ऐसे ही प्यार करते रहना-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: रास्ते कैसे भी हूँ,तूम साथ चलते रहना.ऐसे ही प्यार करते रहना.ऐसे ही प्यार करते रहना.मेरा कहा ही नहीं,अनकहा भी सुन लेना.एक-दूजे के ख़्वाबों को,साथ मिलकर बुन लेना.शिकवा-गिला और शिकायत,करके भी हँस लेना.कभी हथेली सहलाना,कभी बाँहों में कस लेना.जिम्मेदारियां आपस में लेना बाँट,दुःख के बीच, ख़ुशी के लम्हें लेना छाँट.उपहार देना न देना,सम्मान के […]
स्त्री गुनगुनाती है-गृहलक्ष्मी की कविता
Women Poem in Hindi: स्त्री जब खुश होती हैबर्तन माजते माजते ,कपड़े धोते-धोते ,रोटी बेलते बेलते ,सब्जी में छोका लगाते लगातेवो खुशी में गुनगुनाती है ।प्याज छिलते छिलतेआंखों में आंसू लिए भीवह गुनगुनाती हैमाथे पर ओस की तरह चमकतीपसीने की बूंदे भीउसको विचलित नहीं कर पातीवह अपने अंदर खोई हुई ,होने के बाद भीकाम करते-करते […]
मुस्कान-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: हर मुस्कान कुछ तो कहती है,. यूं ही नहीं सबके होठों पर रहती है ..!! जीवन जीने की कला है मुस्कान, अपनों से किया वादा है मुस्कान, प्रेम की अति अधीरता है मुस्कान, कवि की अनंत कल्पना है मुस्कान, प्रेमी के दिल की थाह है मुस्कान, प्रेमिका की बलखाती अदा है मुस्कान, बच्चों […]
सभी को दीपोत्सव की अनेक शुभकामनाएं-गृहलक्ष्मी की कविता
Diwali Hindi Poem: जिसने आंगन मेरा रोशन किया है ,वह एक माटी का दीया है।बड़े ही प्यार से होगा दुलारा,चढ़ा कर चाक पर होगा संवारा।मृत माटी में जान डाली है,कला तेरी भी क्या निराली है।थपकियाँ तेज बाहर दे रहा है,और भीतर से सहारा भी दिया है।जिसने आंगन मेरा रोशन किया है,तेज़ धूप में खुद जल […]
दीप-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Poem: स्नेह भरा मैं दीप अकेलाबन प्रकाश – पुंज चमकूँगा ,असत – अँधेरा मेटूँ जग सेसूरज सा मैं भी दमकूँगा । अन्तर्मन में उजियारा देकुण्ठाओं को दूर करूँगा ,धरती पर फैले तम कोनिज प्रकाश से स्वयं हरूँगा । ज्योतिर्मय मन को रख करकेतन में तिमिर न आने दूँगा ,स्नेह भरा मैं दीप अकेलाबन प्रकाश […]
बच्चे खुश तो जग खुश है-गृहलक्ष्मी की कविता
Childhood Hindi Poem: बाल रूप धर धरती पर ईश्वर होते हैं अवतरित, मासूम सा बचपन निश़्छल हंसी करते हैं रचित, इक नारी को मॉं का सम्मान देता है नन्हा सा बचपन, उस पल पिता के कॉंधे बन जाते हैं मजबूती का सम्बल, सम्पूर्ण करते इक परिवार की धुरी बन जाते हैं बच्चे, अपने पिता माता […]
दीपोत्सव-गृहलक्ष्मी की कविता
Diwali Poem: आज दीप जलाओ ऐसे, कहीं अंँधकार न रह जाएजन-जन में उल्लास भरो,कोई दुखियारी न रह जाए। शरद ऋतु की पावन बेला, हल्की शीत की है दस्तककार्तिक माह दिन सुहाना, भई अमावस रैन अस्तक। तबस्सुम जग का हर कोना, रोशन दीपों का त्यौहारबनी रंगोली मन को भावे, पूजा मिठाई और व्यवहार। सत्य के आगे […]
गृहणी की व्यथा-गृहलक्ष्मी की कविता
Hindi Short Poem: मुझे कुछ भी तो नहीं आता फिर भी सारे काम मैं निपटा लेती हूँ। औरों की तबियत का ख़याल रखती, खुद बुखार की गोली खाकर भी नाश्ता-खाना समय से बना देती हूँ। हाँ, मुझे कुछ भी तो नहीं आता फिर भी, सारे काम मैं निपटा लेती हूँ… याद ही नहीं कब चैन […]
