Diwali Poem: आज दीप जलाओ ऐसे, कहीं अंँधकार न रह जाएजन-जन में उल्लास भरो,कोई दुखियारी न रह जाए। शरद ऋतु की पावन बेला, हल्की शीत की है दस्तककार्तिक माह दिन सुहाना, भई अमावस रैन अस्तक। तबस्सुम जग का हर कोना, रोशन दीपों का त्यौहारबनी रंगोली मन को भावे, पूजा मिठाई और व्यवहार। सत्य के आगे […]
