ठीक उस समय, जब जौनी स्काट का ट्रक ड्राइव कर रहा था, मसीनो के दफ्तर में मीटिंग हो रही थी, जिसमें मसीनो के साथ-साथ कार्लो तान्जा और एन्डी लुकास भी मौजूद थे।
मसीनो तान्जा को गुओवानी फ्यूजैली के बारे में बताते हुए कह रहा था कि इस एक्शन में बेकार ही समय जाया होने के अलावा और कुछ नहीं हुआ अपने क्रोध पर कठिनाई से काबू पाते हुए वह बार-बार एन्डी को घूर रहा था, क्योंकि इस सबके लिए वही जिम्मेदार था।
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‘हमें याद रखना चाहिए कि यहां से भागते समय रकम जौनी के पास नहीं थी।’ मसीनो ने कहा – ‘एन्डी का अनुमान था कि जौनी ने किसी दूसरे व्यक्ति के साथ मिलकर यह कार्य किया था और हम इस दूसरे आदमी के रूप में फ्यूजैली को समझ बैठे, परन्तु ऐसा नहीं था। टोनी और अर्नी को पूरा विश्वास है कि फ्यूजैली का इससे कोई वास्ता नहीं। अब दो ही संभावनाएं हैं। या तो जौनी किसी ऐसे आदमी के साथ मिला हुआ है, जिसकी जानकारी हमें नहीं है या फिर वह आतंकित होने के कारण धन को इसी शहर में छोड़कर भाग गया। उसने तान्जा की ओर देखा और पूछा -‘तुम्हारा क्या विचार है?’
‘तीसरी सूरत एक और भी है।’ तान्जा बोला -‘उसने नोटों के थैलों को किसी ग्रेहाउंड बस स्टेशन में रख दिया हो। स्टेशन सामने है ही, अतः ऐसा करना मुश्किल नहीं है। टिकट खरीदकर थैलों को बस में रख दो और वे अपने रूट के किसी भी और स्टेशन पर डिलीवर कर देंगे। यदि मैं उसकी जगह होता तो यही करता। मेरी राय में तो इतनी बड़ी धन राशि को यहां छोड़ जाने की हरकत कोई मूर्ख आदमी ही कर सकता है, क्योंकि यहां वापिस आना अपनी कब्र खोदने के समान है और जहां तक मुझे जानकारी है, वियान्डा हर्गिज बेवकूफ किस्म का इंसान नहीं है।’
‘तुम्हारे विचार में उसका कोई सहयोगी नहीं था?’
तान्जा ने सिर हिला दिया। बोला-‘लगता तो यही है, क्योंकि वह एकदम अकेला था। उसका मित्र केवल वह नीग्रो सैमी है और नीग्रो सैमी इतने बड़े कांड में क्या हिस्सा लेगा। वह किसी बच्चे की च्युइंगम तक चुराने की हिम्मत नहीं कर सकता मेरे ख्याल से तो वियान्डा रकम हाथ में आते ही बस स्टेशन पर पहुंचा होगा और नोटों के थैले बस में लाद दिए होंगे। यह जानते हुए कि ग्रेहाउंड के किसी भी बस स्टेशन पर वे उसे आसानी से मिल जाएंगे। फिर उस वेश्या (मेलानी) के पास पहुंचकर उसे पता लगा होगा कि उसका मैडल खो चुका था, बस वह आतंकित होकर यहां से भाग गया।’
‘इसे हम चैक कर सकते हैं।’ मसीनो ने एन्डी की ओर देखते हुए कहा – ‘उस समय बहुत कम बसें वहां आई होंगी, वहां जाकर पता लगाओ। किसी न किसी को तो दो भारी थैलों को बस में लादे जाने की याद होगी ही।’
एन्डी तत्काल दफ्तर से बाहर निकल गया।
मसीनो ने तान्जा पर नजरें स्थिर कीं। बोला-‘अब आठ दिन गुजर चुके हैं। तुम सोचते हो कि वह अभी भी तुम्हारे हाथ आ सकता है।’
तान्जा कुटिलता से मुस्कुराया।
‘हमसे आज तक कोई नहीं बचा।’ ‘वह बोला – ‘लेकिन यह काम बेहद खर्चीला है।’
‘कितना खर्च होगा इस पर?’
‘कुल धन का पचास प्रतिशत।’
मसीनो ने धीमे स्वर में कहा – ‘मैं उसे जीवित देखना चाहता हूं। यदि वह जिन्दा मुझे सौंप दिया गया तो कुल रकम का आधा हिस्सा तुम्हें दे दूंगा और अगर वह मुर्दे के रूप में लाया गया तो एक तिहाई रकम मिलेगी।’
‘जिन्दा पकड़ने में मुमकिन है वह प्रतिरोध करेगा।’
मसीनों की मुट्ठियां भिंच गई। वह क्रोधित स्वर में में बोला-
‘मैं उस सुअर की औलाद को जिन्दा चाहता हूं। मैं स्वयं उसे अपने हाथों से पीट-पीटकर उसका मलीदा बनाऊंगा।’ मसीनो को क्रोध से बिफरता देखकर तान्जा जैसा नृशंस आदमी भी सहम गया।
क्रोधित मसीनो ने जोर से अपनी मुट्ठियों को डेस्क पर मारा और गरजता हुआ बोला-
‘जाओ-अपने संगठन के जरिए चप्पा-चप्प तलाश करो -मुझे खर्चे की कोई परवाह नहीं है – में सिर्फ उस हरामजादे को पाना चाहता हूं।’
सहमा हुआ-सा तान्जा फौरन उठ खड़ा हुआ और दफ्तर से बाहर निकल गया।
ट्रक की रफ्तार धीमी करते हुए स्काट ने कहा – ‘करीब-करीब अब हम घर पहुंच ही चुके हैं। एक मील आगे दाईं ओर न्यू साईमारा है। यहीं से मुझे माल लादना होता है।’ ट्रक को मुख्य राजमार्ग से उतारकर धीरे-धीरे वह संकरी-सी रेतीली चढ़ाई चढ़ने लगा, जिसके दोनों ओर पाइन के दरख्तों की कतारें थीं। ‘यह रास्ता लिटिल क्रीक को जाता है। छोटी-सी इस जगह में एक स्टोर तथा कुछ केबिनों के अलावा सुन्दर झील भी है। दूर झील के किनारे पर हमारा हाउस बोट है। सबसे अलग-थलग-बिल्कुल एकांत में। रोजी-रोटी कमाने के चक्कर में यहां के आदमी इतने अधिक व्यस्त हैं कि एक-दूसरे से बात तक करने की फुर्सत उन्हें नहीं मिलती।’
जौनी के लिए यह एक शुभ संदेश था।
रेतीली सड़क के आगे जंगल इतना घना था कि जौनी को वह पूरी तरह से अंधकारमय प्रतीत हो रहा था।
सहसा वे झील के निकट पहुंच गए। जौनी को झील डेढ़ मील से कम नहीं लगी। नावों में बैठे बहुत से व्यक्ति मछलियां पकड़ने में तल्लीन थे। जैसे ही स्काट का ट्रक आगे बढ़ा, नाव में बैठे एक आदमी ने हाथ उठाकर उसका अभिवादन किया। जवाब में स्काट ने भी अपना हाथ हिला दिया।
‘शाम के भोजन का समय है।’ स्काट मूर्खतापूर्ण ढंग से मुस्कराते हुए बोला-‘लंच और डिनर के लिए यहां सभी मछलियां पकड़ते हैं। पता नहीं फ्रैडा ने कुछ पकड़ा होगा या नहीं।’
केबिनों को पीछे छोड़कर लगभग एक मील जंगल में घुसने के पश्चात् वे खुले स्थान पर पहुंचे। जौनी ने एक लम्बी मगर पुरानी सी भद्दी-सी बोट देखी। बीस फुट लम्बा टूटा-फूटा-सा तख्ता पुल की शक्ल में उसे किनारे से जोड़े हुए था।
‘हम यहां दो सालों से रह रहे हैं।’ बांसों के बने एक पार्किंग शेड में ट्रक रोकते हुए स्काट बोला-‘इसे वर्तमान स्थिति में लाने के लिए हमें बड़ी मेहनत करनी पड़ी थी लेकिन अब ज्यादा बुरा नहीं है। क्या तुम अधिक दिनों तक ठहर सकते हो?’
‘यह तो तुम्हारी पत्नी के व्यवहार और इच्छा पर निर्भर है।’ जौनी ने उसकी आंखों में झांकते हुए उत्तर दिया -‘मुमकिन है वह किसी अपरिचित को अपने यहां रखने के लिए तैयार ही न हो।’
स्काट ने अनिच्छापूर्वक अपने कंधे सिकोड़े। बोला-फ्रैडा की चिन्ता मत करो। वह भी दौलत की उतनी ही भूखी है जितना कि मैं हूं। मुझे तो पांच डालर प्रति सप्ताह मिलेंगे और उसे समय काटने के लिए एक अच्छा साथी मिल जाएगा। सारे दिन अकेली रहकर वह बोर हो जाती है।’
जौनी अधीरता से बोला-‘इस एकांत स्थान पर तुम्हारी पत्नी को पर-पुरुष की आवश्यकता क्यों हो सकती है? क्या इस बात से तुम्हें कोई परेशानी महसूस नहीं होती?’
‘मैं क्यों परेशान होऊंगा।’ स्काट ने सामान्य स्वर में कहा – ‘यदि तुम सोचते हो कि तुम उसे फंसा लोगे तो शौक से कोशिश करके देखो और अगर वह स्वयं ही तुमसे सहवास की इच्छा प्रगट करती है – तब भी मुझे कोई आपत्ति नहीं होगी। यकीन करो, शादी के बाद से आज तक मैं उसके साथ नहीं सोया हूं।’ वह कटाक्ष करता हुआ बोला -‘वासना की भूख मुझे ज्यादा नहीं है। फिर भी जब कभी जी चाहता है तो मैं रिचविले में अपनी इच्छापूर्ति कर लेता हूं। मुझ जैसे मेहनतकश आदमी के लिए एक महीने में एक बार ही बहुत है।’
जौनी हैरानी से उसका मुंह ताकने लगा। उसने पूछा – ‘तुम दोनों कैसे पति-पत्नी हो?’
‘इस बारे में तुम अपना भेजा खराब मत करो।’ ट्रक से उतरते हुए स्काट ने कहा – ‘अगर तुम यहां ठहरना चाहो तो उस समय तक रह सकते हो जब तक किराया देते रहोगे। आओ, मैं तुम्हें तुम्हारा कमरा दिखाता हूं।’
पायर पर चलते हुए एक जगह रुककर स्कटा ने उंगली से इशारा करके कहा -‘देखो वह वहां तैर रही है। अपना ज्यादातर समय झील में ही गुजारती है।’
‘आओ, अन्दर चलते हैं।’ स्काट ने कहा।
हाउस बोट के चारों ओर काफी बड़ा डैक था। दोनों ने साथ-साथ लिविंग रूम में प्रवेश किया। सजावट न होने के बावजूद भी वह आरामदायक प्रतीत हो रहा था। कोने में एक टी.वी. सैट भी मौजूद था।
‘यह तुम्हारा कमरा है।’ स्काट ने दरवाजा खोलते हुए कहा – ‘अपना सामान यहां रख दो और झील में तैरने का आनन्द उठाओ। हम बिल्कुल नग्न होकर तैरते हैं। इस बारे में फ्रैडा की फिक्र बिल्कुल मत करो। उसने अपने जीवन में इतने नंगे पुरुष देखे हैं जितने कि मैंने श्रिम्पस भी नहीं देखीं।’
जौनी ने उस कमरे में चारों ओर नजरें दौड़ाई। सामान के नाम पर वहां एक बैड-एक अलमारी-नाइट टेबिल तथा कुर्सी ही थी। खिड़की झील की ओर खुलती थी। कमरे की सफाई देखकर उसका दिल खुश हो गया।
‘कमरा सुन्दर है।’ वह बोला।
‘ठीक है फिर।’ स्काट ने कहा और चला गया।
जौनी ने खिड़की से बाहर झांका। तैरने की इच्छा तो उसकी भी थी – किंतु नंगा होकर नहीं। उसने देखा – स्काट बिल्कुल नंगी हालत में डैक पर प्रगट हुआ और झील में गोता लगा गया। वह तैरता हुआ फ्रैडा के पास पहुंचा – कुछ क्षण वहां रुका और फिर फ्रैडा हाउस बोट की ओर तैरती हुई आगे की ओर बढ़ने लगी।
खिड़की में खड़ा जौनी ध्यानपूर्वक देख रहा था। जैसे ही वह डैक पर पहुंची, जौनी ने अपने-आपको पर्दे की आढ़ में छिपा लिया। उसका कद ऊंचा-शरीर की रंगत ब्राउन थी। डैक पर चलते समय उसके कुल्हे तथा पुष्ट नितम्ब अनायास ही आमंत्रित करते प्रतीत होते थे। जौनी की आंखें उसके शरीर का सौन्दर्य देखने में इतनी व्यस्त थीं कि वह चेहरा भी नहीं देख सका। कंधों के बीच लटके उसके सुनहरी बाल बेहद लुभावने थे। असीम उत्तोजना के कारण जौनी का चेहरा पसीने से तर हो गया। पसीना पोंछते हुए उसने सोचा-कहां आ फंसा। ऐसी सुन्दर और आकर्षक शरीर की औरत उसने आज से पहले कभी नहीं देखी थी।
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ठंडे पानी की आवश्यकता महसूस करते हुए उसने तुरंत अपने कपड़े उतार फेंके। अंडरवीय पहने डैक पर आया और झील में छलांग लगा दी। वासना की जो आग उसके अंदर भड़क उठी थी उसे शांत करने का एकमात्र उपाय यही था।
काफी देर बाद जब उसने स्काट को लौटते देखा तो वह स्वयं भी तैरता हुआ उससे जा मिला।
‘मैं तौलिया लाता हूं तुम्हारे लिए।’ डैक पर पहुंचकर स्काट ने कहा और लिविंग रूम की ओर चला गया। कुछ ही देर बाद वह तौलिया लेकर पुनः लौट आया। शरीर पोंछकर जौनी अपने बैडरूम में जा पहुंचा। तली हुई प्याज की गंध सूंघकर उसके मुंह में पानी भर आया। सहसा उसे याद हो आया – फ्रीमैन के केबिन से निकलने के बाद अब तक उसने कुछ भी नहीं खाया था। अचानक ही उसे तेज भूख महसूस होने लगी।
कपड़े पहनकर वह लिविंग रूम में आ गया। स्काट सिगरेट पीते हुए खिड़की से बाहर झांक रहा था। आहट सुनकर उसने जौनी की ओर देखा।
‘तैरने में मजा आ गया था ना?’
‘हां, बहुत ज्यादा आनंद आया।’
‘हम ड्रिंक इस्तेमाल नहीं करते यहां।’ स्काट ने जानकारी दी -‘क्योंकि हम इसका खर्च वहन नहीं कर सकते। यदि तुम्हें ड्रिंक की आवश्यकता हो तो मोटर बोट द्वारा कल ही खरीद लेना।’
जौनी को ड्रिंक की इच्छा तो हो रही थी-मगर वह इस इच्छा को टालते हुए बैठ गया। ‘रसोई से बड़ी अच्छी सुगन्ध आ रही है।’ उसने स्काट से कहा।
‘हां, फ्रैडा खाना बहुत ही जायकेदार बनाती है।’
‘मेरे बारे में भी बता दिया है उसे तुमने?’
‘बिल्कुल।’ आगे झुककर टी.वी. का स्विच ऑन करते हुए स्काट ने कहा – ‘वह किचन में है – खुद ही जाकर बातें कर लो उससे।’
जौनी हिचकता-सा उठा और लिविंग रूम के दूसरे सिरे पर बना दरवाजा खोलकर किचन में झांका। छोटी-सी किचन में, ब्यूटेन गैस, कुकर, कप बोर्ड, मेज तथा रेफ्रिजरेटर के बीच घिरी खड़ी फ्रैडा कढ़ाई में पक रही किसी चीज को हिला रही थी।
उसने जौनी पर दृष्टि डाली। जौनी के समस्त शरीर में बिजली-सी दौड़ गई। फ्रैडा गजब की सुन्दर थी।
वास्तव में ही वह सौन्दर्य की साक्षात प्रतिमा थी। शाायद वह स्वीडिश (स्वीडन की रहने वाली) थी। जौनी लगातार आंखों ही आंखों में उसके सौन्दर्य का पान कर रहा था – किन्तु फ्रैडा उस पर उचटती-सी निगाह डालकर अपने काम में लग गई थी।
‘भूख लगी है शायद।’ उसके मधुर कंठ से निकली आवाज ने जौनी के मस्तिष्क में हलचल मचा दी-‘अब और देर नहीं लगेगी -सुनो, एड कह रहा था कि अब कुछ दिन तुम यहीं रहोगे।’
‘हां-अगर तुम्हें कोई परेशानी न हो तो।’ जौनी बोला।
वह पैंट और कमीज पहने थी। नितम्बों के उभार पर नजर गड़ाते हुए जौनी को उसके नहाने का दृश्य याद हो आया। ठोस एवं उन्नत उरोज कमीज से विद्रोह करके बाहर झांकने को तत्पर-से प्रतीत हो रहे थे।
‘हमें तो धन की जरूरत है।’ वह बोली – ‘वैसे एड का विचार है कि तुम मुझे अच्छी तरह कम्पनी दे सकते हो। छोड़ो इन बातों को, यह बताओ, करी पसन्द है तुम्हें?’
‘मुझे हर चीज पसन्द है।’
‘खाना तैयार होने में बीस मिनट और लगेंगे – तब तक तुम टी.वी. देखो। खाना तैयार करते समय मैं अकेली रहना ज्यादा पसन्द करती हूं।’

दोनों की आपस में निगाहें मिलीं। चमकीली नीली आंखें उसके मजबूत जिस्म का अवलोकन करती हुई चेहरे पर जा टिकीं। फिर वहीं उलझकर रह गईं। उसने होंठों पर जुबान फेरी।
‘मेरा नाम जौनी है।’ मुश्किल से उसके मुंह से अपना नाम निकला।
‘मैं फ्रैडा हूं।’ वह हाथ से इशारा करती हुई बोली – ‘जाओ एड के पास बैठो।’
जौनी को उसका स्वर कुछ कटुता भरा महसूस हुआ। वह तत्काल वहां से निकल आया और लिविंग रूम में पहुंचकर स्काट के पास बैठ गया।
दौलत आई मौत लाई भाग-17 दिनांक 04 Mar.2022 समय 08:00 बजे रात प्रकाशित होगा

