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Daulat Aai Maut Lai Hindi Novel | Grehlakshmi
daulat aai maut lai by james hadley chase दौलत आई मौत लाई (The World is in My Pocket)

फ्रीमैन के केबिन में जौनी का आठ दिन का समय बहुत बोरियत से गुजरा। अब तक उसका टखना ठीक हो गया था और दाढ़ी भी काफी बढ़ चुकी थी। बाथरूम के शीशे में अपना प्रतिबिम्ब देखकर वह निश्चिन्त हो गया कि दाढ़ी के कारण उसे दूर से पहचान पाना अब कठिन था। फ्रीमैन

द्वारा वह कस्बे से अपने लिए दो जोड़ा खाकी ड्रिल की पोशाकें – एक बुश जैकेट – एक बुश हैट तथा टॉयलेट के सामान के अलावा एक सूटकेस भी खरीदकर मंगवा चुका था। कमीजें और मौजे भी मंगवाना वह नहीं भूला था।

हालांकि कभी-कभी अब भी उसके टखने में दर्द हो जाता था किंतु अब आराम से चल-फिर सकता था। उसने फ्री वे से साउथ की ओर जाने वाले ट्रक द्वारा जैक्शन विले पहुंचने का निश्चय किया। उसे विश्वास था कि फ्यूजैली के यहां उसे अवश्य शरण मिल जाएगी और जैसे ही सरगर्मी समाप्त हो जाएगी, वह वापस लौटकर अपनी रकम को निकाल लाएगा। वापस लौटने का रिस्क तो हर हालत में लेना जरूरी था। सैमी के धन का चुराया गया काफी बड़ा हिस्सा अभी तक उसके पास शेष बचा हुआ था। उसका इरादा एक सस्ती-सी पुरानी कार खरीदने का था लेकिन सबसे पहले सूचना प्राप्त करना आवश्यक था। अतः आठवें दिन, खाकी ड्रिक की पोशाक और बुश हैट पहनकर उसने फ्रीमैन से शहर पहुंचाने का अनुरोध किया।

‘मुझे फोन पर किसी से बात करनी है।’ उसने सफाई दी।

फ्रीमैन के यहां आठ दिन के प्रयास में भी वह उससे अधिक नहीं मिल पाता था। आमतौर पर दिन निकलते ही वह सांपों की तलाश में निकलकर दिन छुपने के बाद ही वापस घर लौटता था। सिर्फ खाने और सोने के समय ही दोनों ही मुलाकातें होती थी, परन्तु फ्रीमैन ने कभी भी उसके व्यक्तिगत जीवन से संबंधित कोई प्रश्न नहीं पूछा था। विभिन्न विषयों पर बातचीत करते हुए वह हमेशा जौनी को पुस्तकें पढ़ने के लिए उकसाता रहता था। स्वयं जौनी भी किताबों के जादू से स्वयं को अछूता नहीं रख सका। समुद्री यात्राओं से

संबंधित जितनी भी पुस्तकें वहां थीं जौनी बड़े मनायोग से उनका अध्ययन किया करता था।

‘जरूर।’ उसके प्रश्न का उत्तर देते हुए फ्रीमैन ने कहा – ‘कहीं तुम यहां से जाने के बारे में तो नहीं सोच रहे हो? जब तक तुम्हारा दिल चाहे जौनी, यहां ठहर सकते हो।’

‘नहीं – अब मुझे जाना ही पड़ेगा।’

‘मुझे हमेशा तुम्हारी याद आएगी।’

इतना प्यार तथा इतना मृदु व्यवहार जौनी को कभी नहीं मिला था, अतः भावावेश को छुपाने के विचार से उसकी बांह पर थपकी देते हुए बोला – ‘हां, मैं भी जीवन-भर तुम्हारे इस उपकार को नहीं भूल सकूंगा – सुनो

दोस्त…. मेरे पास इस समय काफी धन है और मैं चाहता हूं तुम उसमें से सौ डॉलर अपने लिए रख लो – उससे तुम अपने लिए टी.वी. या अन्य कोई आवश्यक वस्तु खरीद लेना ताकि मेरा निशानी के रूप में मेरी याद बनी रहे।’

फ्रीमैन हंस पड़ा- बोला – ‘तुम्हारी भावना की तो कद्र करता हूं किन्तु

धन लेना स्वीकार नहीं है मुझे, क्योंकि पैसा ही मात्र ऐसी चीज है। जिसकी मुझे आवश्यकता नहीं पड़ती। इसे अपने ही पास रखो – मेरे से ज्यादा यह तुम्हारे काम आएगा।’

अगले दिन सुबह वे दोनों कार द्वारा कस्बे में जा पहुंचे। जौनी की नजरें दाएं-बाएं लगातार कुछ खोज रही थीं। बुश जैकेट के नीचे छुपे हुए पिस्तौल से उंगलियां पल-भर को भी अलग नहीं हुई थीं परन्तु कोई भी संदेहास्पद व्यक्ति उसे नजर नहीं आया। एक छोटे-से होटल में पहुंचकर उसने स्वयं को टेलीफोन बूथ में बंद कर दिया। इस समय आठ बजकर दस मिनट हो चुके थे। सैमी सोकर उठ चुका होगा, यह सोचकर उसने सैमी का नम्बर डायल किया और प्रतीक्षा करने लगा।

सैमी की ओर से तुरन्त जवाब मिला –

‘सैमी।’ जौनी ने कहा – ‘मैं जौनी बोल रहा हूं।’

सैमी के दीर्घ निःश्वास का स्वर उसे स्पष्ट सुनाई दिया।

‘मैं तुमसे बात नहीं करना चाहता मिस्टर जौनी।’ सैमी हकलाता हुआ-सा बोला-‘तुम अपने साथ-साथ मुझे भी मुसीबत में डाल सकते हो। मुझे तुमसे कुछ नहीं कहना है।’

‘सुनो।’ जौनी के स्वर में कटुता पैदा हो गई – ‘तुम मेरे दोस्त हो सैमी – याद करो मैंने तुम्हारे लिए क्या कुछ किया है – और अब तुम्हारी बारी है।’

प्रतिक्रिया स्वरूप सैमी का सहमा-सा पसीने से भीगा चेहरा जौनी के नेत्रों के सम्मुख नाच उठा।

‘हां, अब क्या है मिस्टर जौनी – तुमने मेरी सारी रकम तो पहले ही चुरा ली है – अगर उन लोगों को पता चल गया कि तुम मेरे साथ बातें कर रहे हो तो यकीनन मुझ पर भी विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ेगा।’

‘उन्हें पता नहीं लगेगा सैमी – मैंने मजबूरी में ही तुम्हारे यहां से चोरी की थी – मैं वायदा करता हूं कि तुम्हारी पाई – पाई लौटा दूंगा। अच्छा यह बताओ कि क्या मेरी तलाश अभी भी जारी है?’

‘हां। और यह काम उन्होंने मिस्टर तान्जा को सौंप दिया है। मैंने बॉस को उस वक्त तान्जा से बातें करते हुए सुना था जब मैं उन्हें कार द्वारा बाहर ले जा रहा था। उनके अनुसार वे लोग तुम्हें फ्लोरिडा में खोज रहे हैं। किसी फ्यूजैली नाम के व्यक्ति का भी उन्होंने जिक्र किया था। टोनी और अर्नी तुम्हें वहीं तलाश कर रहे हैं। तुम जहां भी हो बेहद सतर्क रहना मिस्टर जौनी।

जौनी के शरीर में तनाव-सा पैदा हो गया – इसका मतलब खोज पूरे जोर-शोर से चल रही थी – परन्तु मसीनो को फ्यूजैली का पता कैसे मालूम हो गया।

‘क्या तुम पागल हो गए हो मिस्टर जौनी? सैमी की हांफती हुई आवाज लाइन पर उभरी – मुझे यकीन नहीं आता कि वास्तव में तुम सेफ से सारा धन निकाल ले गए थे।’

‘ठीक है मैं तुम्हें फिर फोन करूंगा।’ जौनी ने शांत स्वर में कहा – ‘कान खोलकर सुन लो – तुम्हारी रकम तो वापस मिल जाएगी परन्तु बॉस की प्रत्येक बात गौर से सुनकर याद रखने की कोशिश करना – क्योंकि मुझे तुम्हारी मदद की जरूरत है।’

‘ईश्वर के लिए मिस्टर जौनी- मुझे तो माफ ही करो – बेशक मेरी रकम भी अपने ही पास रखो मगर मेहरबानी करके मुझसे दूर ही रहो।’ सैमी ने कहा और संबंध-विच्छेद कर दिया।

जौनी स्तब्ध-सा खड़ा रह गया। भय की ठंडी लहर उसकी रीढ़ की हड्डी से होकर गुजर गई। दिल बुरी तरह धड़कने लगा था। फ्यूजैली ही उसका एकमात्र सहारा था सो वह भी समाप्त हो गया। अब वह नितान्त अकेला था।

बूथ से निकलकर वह बाहर खड़ी फ्रीमैन की कार में आ बैठा।

‘चलें?’ फ्रीमैन ने पूछा और इंजिन स्टार्ट कर दिया।

जौनी कार्लो तान्जा के बारे में सोच रहा था। इसका अर्थ था – अब माफिया ऑर्गनाइजेशन उसकी तलाश में थी और किसी न किसी भांति वे समझ चुके थे कि वह दक्षिण में फ्यूजैली के पास पहुंचेगा। उसे अपने चारों ओर जाल-सा फैलता महसूस हुआ मगर अभी जाल से निकलने का रास्ता उसके सामने था।

‘तुम मेरे लिए अधिक परेशानी मत उठाओ।’ सिगरेट जलाते हुए जौनी ने कहा – ‘मैं आज रात चला जाऊंगा।’

फ्रीमैन ने उस पर नजर डाली – फिर खामोशी से कार चलाने लगा। अपने केबिन में पहुंचकर फ्रीमैन बोला – ‘देखो जौनी – एक से दो हमेशा भले होते हैं। तुम अपनी समस्या पर मुझसे विचार-विमर्श करना चाहते हो या फिर स्वयं अकेले ही उसका हल खोजना चाहते हो।’

पल-भर को उसके दिमाग में आया कि फ्रीमैन को सब-कुछ बता दे। फिर माफिया का विचार आते ही वह इच्छा को दबा गया। अगर माफिया को यह पता चल गया कि मैं यहां छुपा हुआ हूं तो वह इस देवता सरीखे इंसान का मुंह खुलवाने के लिए भयानक से भयानक यातनाएं देकर इसकी जान ही ले लेंगे।

‘मैं खुद ही संभाल लूंगा। तुम क्यों व्यर्थ ही इस बखेड़े में पड़ते हो।’

‘क्या वाकई परिस्थितियां इतनी ही भयंकर हैं? उसके चेहरे पर नजरें जमाकर फ्रीमैन ने पूछा।

‘तुम जितना सोचते हो उससे भी कहीं ज्यादा।’

‘तुम इस पर काबू पा लोगे जौनी। क्योंकि तुम्हारे अंदर आवश्यक खूबियां तथा हिम्मत है। मैं इस बारे में शर्त लगाने के लिए तैयार हूं।’

‘रहने दो हार जाओगे?’ जौनी ने जबरदस्ती मुस्कराने का प्रयास किया और अपने बैडरूम में जाकर दरवाजा बंद करके बिस्तर पर पड़ गया। अब वह क्या करे- जौनी ने स्वयं से प्रश्न किया। दक्षिण को जाए अथवा नहीं – सोचने वाली बात थी।

जाहिर था कि इसमें रिस्क बहुत था किन्तु रिस्क तो उठाना ही पड़ेगा, मुमकिन है कुछ दिनों बाद वे लोग यह सोचने लगें कि वह वहां गया ही नहीं तथा अन्य स्थानों पर मेरी तलाश करें। कुछ भी सही – वह जहां भी जाएगा ये लोग उसका पीछा नहीं छोड़ेंगे और साउथ जाने की अपनी तीव्र इच्छा को दबा पाना अब असंभव था।

न जाने वह कब तक विचार-सागर में गोते लगाता रहा। उसकी सोचें तभी टूटी जब फ्रीमैन वहां पहुंच गया।

‘मैं काम से जा रहा हूं जौनी।’ वह बोला – तुम यहीं क्यों नहीं ठहर जाते हो।’

‘नहीं।’ जौनी बिस्तर से उतर गया। ‘जैसा कि तुमने कहा था मैं इस पर काबू पा ही लूंगा। तुम्हारे यहां वापस लौटने से पहले ही मैं यहां से चला जाऊंगा। मैं तुम्हारा धन्यवाद करना चाहता हूं।’ फ्रीमैन को गौर से देखने के बाद वह बोला – ‘मैं आज तुम्हारी ही वजह से जिन्दा हूं। अगर तुमने मेरी मदद न की होती तो मैं अब तक कभी का मर चुका होता।’

‘मुझे पता नहीं था कि मामला इतना संगीन है – वे तीनों आदमी क्या तुम्हें….?’

जौनी ने हाथ उठाकर उसे रोक दिया, ‘जितना तुम कम से कम जानो उतना ही…।’

दोनों ने हाथ मिलाये और उसके बाद फ्रीमैन चला गया।

खिड़की के पास खड़ा जौनी उसे तब तक देखता रहा जब तक कि बोरे सहित वह जंगल में ओझल न हो गया।

सैंट क्रिस्टोफर वाला लॉकेट छूते हुए उसने सोचा-अंधेरा होने का इंतजार ही क्यों किया जाए, क्यों न वह इसी वक्त निकल पड़े। जंगल के इस उबाऊ माहौल से निकलकर मुख्य मार्ग पर पहुंचने की उसकी आकांक्षा हो उठी। उसे एक-एक क्षण असहाय लगने लगा। अपना सामान चैक करके सूटकेस उठाकर वह चल दिया। लगभग आधा घंटे बाद वह फ्रीमैन के केबिन से दो मील फ्री वे (मुख्य राजमार्ग) के निकट एक पेड़ के सहारे खड़ा था, ट्रकों व कारों के आते-जाते काफिले को हसरत भरी निगाहों से देखता हुआ। काफी दूर चलने के कारण उसका टखना फिर से दर्द करने लगा था। अब और पैदल चलने का साहस उसमें नहीं था। किसी भी सवारी की प्रतीक्षा करते-करते वह ऊब चुका था।

पेड़ के साए में खड़ा जौनी हार-थककर बैठने ही वाला था कि एक ट्रक उसके करीब बीस गज के फासले पर आकर रुका।

सूटकेस उठाकर लंगड़ाता हुआ वह ट्रक की ओर बढ़ा। ट्रक ड्राइवर नीचे उतरकर बोनट उठाए ट्रक को घूर रहा था।

उसके निकट पहुंचकर जौनी ने देखा, लम्बा, पतला, करीब सत्ताईस वर्षीय वह युवक गंदा-सा ओवर आल पहने हुए था। उसके बाल लम्बे-लम्बे ब्राउन रंग के थे। कुल मिलाकर वह जौनी को एक हानि-रहित जीव लगा।

‘तुम परेशान लगते हो।’ जौनी ने युवक के नजदीक पहुंचकर उससे कहा।

युवक ने उसकी ओर देखा। अजीब-सा चेहरा था उसका। शरीर की तरह बिल्कुल दुबला-पतला। जैसे वह जिन्दगी से निराश और पराजित होकर ऊब चुका हो।

‘मैं हमेशा परेशान रहता हूं।’ युवक बोला-‘अब देखो न यह प्लग ही परेशान करने लगा है। अब जब तक यह ठंडा नहीं हो जाएगा ट्रक आगे नहीं बढ़ेगा। तुम्हें शायद सवारी की तलाश है?’

जौनी ने अपना सूटकेस जमीन पर रख दिया। बोला-‘हां, तुम कहां तक जा रहे हो?’

‘लिटिल क्रीक तक-वहां मेरा घर है। यह स्थान न्यू साइमरा के नजदीक है।’

‘मैं अपना किराया चुका दूंगा।’

युवक की तीक्ष्ण निगाहें तुरंत जौनी की नई खाकी ड्रिल और बुश हैट का जायजा लेने लगीं।

‘ठीक है।’ वह बोला – ‘मैं प्लग बदलता हूं, तुम अंदर जाकर बैठो दोस्त।’

दस मिनट बाद वह युवक भी ड्राइविंग सीट पर आ बैठा और इंजन चालू करते हुए बोला – ‘मेरा नाम एड स्काट है।’

‘और मुझे जौनी वियान्को कहते हैं।’ जौनी ने साफ झूठ बोला।

ट्रक फ्री वे पर दौड़ने लगा।

‘तुम क्या बिजनेस करते हो एड?’ दो मील गुजर जाने के बाद जौनी ने खामोशी तोड़ी।

‘मैं श्रिम्पस ढोता हूं। श्रिम्पस केकड़े की तरह एक जलचर होता है, जिसे लोग बड़े शौक से खाते हैं। रिचविले के उत्तम दर्जे के कई रेस्टोरेंटों के साथ मेरा तीन वर्ष का अनुबंध है। उनमें श्रिम्पस की बहुत अधिक खपत है। शुरू-शुरू में तो मुझे यह ठेका बहुत ही अच्छा लगा था – किन्तु शीघ्र ही कड़ी मेहनत के कारण मैं इससे ऊब गया और अब मेरे विचार से यह काम बड़ा बकवास चीज है।’

उसकी बात सुनकर जौनी सोच रहा था कि जीविका-उपार्जन के लिए भी लोगों को न जाने क्या-क्या करना पड़ता है।

‘फ्रेडा, यानि मेरी पत्नी कहती है।’ स्काट बोले जा रहा था -‘कि मुझे अपने दिमाग की जांच करानी चाहिए – लेकिन औरतों की बातों पर ध्यान देना मेरी आदत नहीं है। बेकार की बातों के अलावा ये कुछ जानती ही नहीं हैं।’ जौनी पर नजरें डालकर उसने पूछा -‘तुम मेरी बात से सहमत हो न?’

‘हां!’ जौनी शांत स्वर में बोला। और उसे सिगरेट पेश करते हुए बोला – ‘पियोगे?’ ‘जरूर।’ वह बोला।

जौनी ने दो सिगरेटें जलाईं और उनमें से एक स्काट को थमा दी।

‘इसलिए मैंने कुछ धन जोड़कर यह ट्रक खरीद लिया है।’ स्काट ने कहना जारी रखा -‘और अब मैं सोचता हूं कि मैं भी बिजनेस करने लगा हूं। मुझे किसी भी किस्म का बोझा ले जाने में कोई हिचक नहीं होती। इसी वजह से मैंने श्रिम्पस का ठेका लिया था और अब रोज मुझे यह बेहूदा काम करना पड़ता है, वरना वे लोग मेरी जान को आफत खड़ी कर देंगे, परन्तु इतनी कड़ी मेहनत के बाद मुझे जो पैसा हासिल होता है वह बहुत ही कम है। फ्रेडा ने यह काम शुरू करने से पहले ही मुझे आगाह किया था -किन्तु उस वक्त मैंने उसकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया था और अब मैं अपनी गलती का अहसास कर रहा हूं। मुझे हफ्ते में सिर्फ डेढ़ सौ डॉलर प्राप्त होते हैं इस धंधे से। इसी में मुझे अपना, बीवी का तथा घर-गृहस्थी के अन्य खर्चों के अलावा ट्रक की टूट-फूट वगैरह भी ठीक करानी पड़ती है।’

‘वास्तव में ही इतनी कड़ी मेहनत के बाद तुम्हें बहुत थोड़ी आमदनी होती है।’ जौनी ने अपनी राय जाहिर की।

‘तुम क्या करते हो?’ स्काट ने जौनी से पूछा।

‘फिलहाल मैं बिल्कुल बेकार हूं’ जौनी उसे मनगढ़ंत कहानी सुनाने लगा – ‘कई वर्षों तक रेंट कलैक्टर का काम करते-करते अचानक मैं ऊब गया। मैंने अपनी नौकरी छोड़ दी और अपना सभी सामान कार-टी.वी. आदि बेच डाले। मेरी पूरी जिन्दगी नार्थ में गुजरी है और अब सैर-सपाटे के लिए साउथ में चला आया हूं। अब जब तक मेरी जेब में धन मौजूद है -मैं कोई काम नहीं कर सकूंगा और जेब खाली होते ही कोई नौकरी ढूंढ लूंगा।’

‘तुम शादीशुदा नहीं हो?’

‘नहीं।’

‘बहुत भाग्यशाली हो, वरना शादी के बाद तो आदमी को मजबूरन काम करना पड़ता है।’

‘तुम्हारे बच्चे हैं?’ जौनी ने पूछा।

‘नहीं-फ्रैडा बच्चे पैदा नहीं करना चाहती और वर्तमान स्थिति को देखते हुए मैं भी उसके विचारों से सहमत हूं। जिस तरह से हम जीवन यापन कर रहे हैं उसमें बच्चों का न होना ही बेहतर है।

‘बच्चे पैदा करने के लिए तो अभी तुम्हारे पास काफी समय पड़ा है।’ जौनी ने कहा – ‘अभी तो तुम खूब जवान हो।’

स्काट हंसा -बोला -‘मुझे लगता है कि अब हमारे यहां बच्चे नहीं होंगे। कम से कम उस वक्त तक तो मुमकिन नहीं-जब तक मैं श्रिम्पस ढोता रहूंगा’

जौनी खामोश हो गया। पैदल चलने के कारण उसे थकान हो गई थी। थोड़ी देर के बाद वह ऊंघने लगा। करीब आधा घंटा सोने के बाद जब वह जागा तो ट्रक मुख्य राजमार्ग (फ्री वे) के दोनों ओर स्थित जंगल से गुजर रहा था। स्काट के चेहरे पर थकान के लक्षण स्पष्ट दीख रहे थे। स्टेयरिंग पर जमे उसके हाथों और बांहों में तनाव-सा उत्पन्न हो गया था।

‘मेरे विचार में तुम थोड़ी देर सुस्ता लो।’ जौनी बोला – ‘ट्रक मैं चलाता हूं।’

‘क्या तुम इसे ड्राइव कर सकते हो?’ स्काट ने आशापूर्वक उससे पूछा।

‘मैं चार पहियों वाले हर वाहन को चला सकता हूं।’ जौनी ने उत्तर दिया।

स्काट ने स्पीड कम करके ट्रक रोक दिया। आपस में सीटें बदल लेने के बाद वह बोला – ‘यदि मुझे नींद आ जाए तो तुम सीधे ही चलते रहना – जैसे ही तुम ईस्टलिंग का साइनपोस्ट क्रॉस करने लगो -मुझे जगा देना। ओ.के.।’

जौनी सहमति देकर ट्रक ड्राइव करने लगा। स्काट थोड़ी ही देर में नींद की गोद में समा गया।

आठ दिन तक निठल्ला पड़े रहने के बाद इस काम को करते हुए उसे आनन्द आ रहा था। साथ ही वह पूरी तरह से सतर्क भी था, क्योंकि कोई मामूली-सी भी दुर्घटना उसके अब तक के किये हुए काम पर पानी फेर सकती थी।

सहसा उसका विचार लगेज लॉकर में पड़े हुए नोटों के थैलों की ओर घूम गया। एक लाख बयासी हजार डालर की भारी रकम उसका इंतजार कर रही थी – लेकिन वह उसे प्राप्त कब करेगा – कर भी पायेगा या नहीं। कोई नहीं जानता था कि माफिया के आदमी कौन-कौन हैं और कहां-कहां हैं – परन्तु इतना निश्चित था कि माफिया के आदमी प्रत्येक बार-कैफे-गैरेज-सस्ते होटल-ढाबे तथा अन्य ऐसी ही जगहों पर मौजूद थे।

लिटिल क्रीक पहुंचकर वह क्या करेगा, यह प्रश्न उसके दिमाग में उभरा। वह वहां पूर्णतया अपरिचित के रूप में प्रकट होगा। माफिया संगठन की कार्यप्रणाली से भी वह परिचित था। उसके ऊपर किसी इनाम की घोषणा की जाएगी। कोने में सोये पड़े मरियल से युवक पर उसने नजर डाली। सचमुच अजीब दिमाग था उसका, अपनी किस्म का अलग ही जीव है, उसने सोचा। एक ऐसा व्यक्ति जो निजी व्यवसाय में विश्वास रखता था, क्योंकि वह अनुशासन में नहीं रह सकता था और अपनी इसी आदत के कारण गुलामों जैसा जीवन जीने के लिए मजबूर था। अपनी समस्या को भूलकर वह स्काट की कही बातों पर विचार करता रहा।

अचानक उसे समुद्र की सी गंध महसूस हुई। वह इस प्रकार सांस लेने लगा जैसे किसी बहुत ही सुगंधित चीज को सूंघ रहा हो। समुद्र की याद आते ही उसके मस्तिष्क में रह-रहकर उथल-पुथल मचने लगी। पैंतालीस फुट लम्बी नौका का सपना सजीव-सा होने लगा। वह मीठी-मीठी कल्पनाओं का मन ही मन रसास्वादन लेने पर विवश हो गया।

सामने ईस्टलिंग का साइन पोस्ट देखकर उसने स्काट को हिलाकर जगा दिया।

‘जागो स्काट, हम ईस्ट लिंग पर पहुंच गये हैं।’

‘गाड़ी रोक दो।’ स्काट ने जागकर कहा – ‘लगता है जैसे मैं पांच मिनट ही सो पाया हूं।’

दोनों ने फिर सीटें बदल लीं।

‘क्या मुझे सोने के लिए कोई जगह मिलेगी वहां?’ जौनी ने पूछा।

स्काट ने उसकी ओर देखा।

‘मेरे पास एक फालतू कमरा है, मगर उसका किराया पांच डॉलर प्रति सप्ताह के हिसाब से देना होगा। बोलो, मंजूर है?’

‘मंजूर है।’ जौनी ने सहमति जताई।

स्काट ट्रक को राजमार्ग पर दौड़ाने लगा।

दौलत आई मौत लाई भाग-16 दिनांक 03 Mar.2022 समय 08:00 बजे रात प्रकाशित होगा

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