बचपन जीवन का वो सुनहरा दौर है, जो एक बार गुज़र जाए, तो फिर लौट कर वापिस नहीं आ पाता। बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा घर से ही हासिल होती हैं। ऐसे में आप बच्चों को जो विचार और आचरण सिखाएंगे बच्चे उसी के अनुरूप ढ़लते चले जाएंगे। अगर आप बच्चों को प्यार करेंगे, तो वो भी आपको बदले में प्यार ही देंगे और अगर आप उनसे मारपीट करेंगे और हर वक्त डांटेगे, तो उनका स्वभाव भी उसी के अनुरूप चिड़चिड़ा होना स्वाभाविक है। हमारा आचरण और बोलचाल का लहज़ा हमारे बच्चों पर अपनी छाप छोड़ जाता है और वो उम्र भर उसी शिक्षा के साथ अपना पूरा जीवन व्यतीत कर देते हैं। आइए जानते हैं बच्चों पर हमारा व्सवहार किस हद तक नकारात्मक प्रभाव डालता है

बच्चों का गुमसुम हो जाना

बहुत से ऐसे घर है, जहां कई कारणों से कलह कलेश रहता है। छोटी छोटी बातों पर होने वाली नोंक झोंक देखते ही देखते एक विशाल रूप धारण कर लेती है। मगर इन सब गतिविधियों को देखकर परिवार के छोटे बच्चों के मासूम चेहरे मुरझा जाते हैं और उनके चेहरों पर मायूसी छां जाती है। नतीजन बच्चे गुमसुम रहने लगते हैं और किसी से बात करने में कतराने लगते हैं। ऐसे में हमें बच्चों के सामने बहस और लड़ाई झगड़े से बचने की ज़रूरत है।

मिलने जुलने से कतराना

अगर हम बच्चों के सामने हर वक्त ज़ोर ज़ोर से बोलेंगे, तो बच्चा हर वक्त सहमा हुआ महसूस करेगा। साथ ही वो अन्य बच्चों यां फिर नाते रिश्तेदारों से मिलने जुलने में परहेज़ करेगा और उनके पास जाने से बचेगा। अगर आप बच्चों को घर में एक फ्रेंडली माहौल देंगे, तो बच्चा खुद को काफिडेंट महसूस करेगा और सब के साथ बातचीत करने में कर्फटेबल महसूस भी करेगा।

किसी काम में रूचि न लेना

अगर आप बच्चों पर हर वक्त सवार रहेंगे, तो बच्चे एक कठपुतली मात्र आपके अनुसार ही चलते रहेंगे। अब वक्त बदल रहा है, ऐसे में आपको बच्चों को आगे बढ़ाने का प्रयास करना है और कोशिश करनी है कि वे अपने हिसाब से कार्यों को अज़ाम दें। वे अपने मनमुताबिक चीजों का चुनाव करें, वे समझ पाएं कि हमें क्या करना है। माता पिता का फर्ज़ है कि वे बच्चों की इस प्रकार से परवरिश करें, ताकि वे जीवन के हर मोड़ पर अपने फैसले लेने में सक्षम हो पाएं।

दोस्तों के साथ वक्त बिताना

ऐसा देखा गया है कि अगर बच्चों को घर में हेल्दी माहौल नहीं मिल पाता है, तो वे दोस्तों के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिताने की कोशिश करते हैं। इसी के चलते बच्चे कई बार कुसंगति का भी शिकार हो जाते है, जो बच्चों की ग्रोथ के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

स्कूल एक्टिविटीज़ में हिस्सा न लेना

स्कूल में आए दिन कई तरह की प्रतियोगिताओं का मंचन होता रहता है। अगर बच्चे एक्टिव होते हैं, तो वे हर कार्य में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं। मगर जो बच्चे सहमे रहते हैं और हर वक्त गुमसुम रहते हैं, वे किसी भी गतिविधि में हिस्सा लेने में कतराने लगते हैं।

पढ़ाई में रूचि न लेना

बच्चे डांट और फटकार के कारण खुद को नकारा मानने लगते है। नतीजन पढ़ाई में उनका मन नहीं लग पाता और वो हर वक्त एक अजीब से उलझन में उलझे रहते हैं। ऐसे में बच्चा किसी भी विषय में रूचि नहीं ले पाता है और हर वक्त खुद में ही खोया हुआ महसूस करता है।

पेरेंटस से दूरी

अगर हम बच्चों को बात बात पर डांटेगे और उनसे अपनी बात मानवाने के लिए ज़ोर ज़बरदस्ती करेंगे, तो बच्चे माता पिता से दूर होने लगते है। वो अन्य लोगों को अपना हितैषी मानने लगते हैं।हांलाकि माता पिता अपने बच्चे को कभी भी बुरा नही सोच सकते। मगर बच्चे को परफेक्ट बनाने की चाह हमें उनसे वास्तव में दूर कर देती है। जो आज के दौर में एक बड़ा संकट साबित हो रहा है। 

बुजुर्गों का सम्मान न करना

घर के अन्य लोग अगर हर वक्त बच्चे को डांटेगे यां फिर आपस मं ही लडेगे झगड़ेगे, तो इससे बच्चे पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जिस प्रकार से अन्य लोग एक दूसरे से बातचीत करेंगे बच्चे भी उन्ही को देखकर वैसा व्यवहार करने लगेंगे और र्क बार गलत शब्दों का इस्तेमाल भी करने लगते है, जो बच्चे की ग्रेथ पर नकारात्मक प्रभाव छोड़ देता है।

कम्यूनिकेशन गैप

अक्सर माता पिता बच्चों से बातचीत नहीं करते हैं, कारण व्यस्त दिनचर्या। अगर बातचीत करते भी है, तो डांट से शुरू होकर मारपीट पर जाकर खत्म हो जाती है। इससे बच्चे के मन मस्तिष्क पर एक बुरा प्रभाव छोड़ जाती है। ऐसी परिस्थ्तियों में माता पिता और बच्चों के मध्य कम्यूनिकेशन गैप पैदा करता है, जो बच्चों को परिजनों से दूर कर देता हैं।

प्यार की भावना न पनपना

हम अगर बच्चों को स्नेह देंगे और उनसे बातचीत करेंगे, तो वे भी प्यार से भी हमें देखेंगे और हमसे बात करना चाहेंगे। प्रेम के ज़रिए हम बच्चों का उचित मार्गदर्शन कर सकते हैं। अगर आप बच्चों का दूसरों के सामने निरादर करेंगे, तो इससे बच्चे के मन में माता पिता के लिए क्रोध की भावना पनपने लगती है, जो आगे चलकर रौद्र रूप भी धारण कर सकत है। इस प्रकार बच्चे और माता पिता में  एक अलग सी दूरी आ जाती है और बच्चे माता पिता के नज़दीक जाने से कतराने लगते हैं। अगर आप भी बच्चों को इन्हीं कारणों से दूर हुए है, तो तुरंत अपना स्वभाव बदलिए और बच्चों को अपने नज़दीक ले आइए, अन्यथा बच्चों का एक गलत कदम आपके लिए परेशानी का सबब साबित हो सकता है।

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