Hindi Kahani: “विजय उठो विजय होश में आओ विजय , तुम्हें मालूम है विजय , आज पूरे दो दिन हो चुके हैं तुम्हें इस बेहोशी की हालत में तुम्हारे कपड़े कितने गंदे हैं और कमरे का सारा सामान देखो कैसे बिखरा पड़ा हुआ है , और यह इतनी सारी शराब की बोतलें , इतनी शराब तुमने पी है , तुम तो शराब को हाथ भी नहीं लगाते थे , तो फ़िर इतना नशा कैसे ? विजय कैसे ? ” अपने छोटे भाई विजय को शराब के नशे में बेहोश देखकर अंकिता उसे होश में लाने की कोशिश करती है , मगर स्वयं असफल होने पर वह डॉक्टर को फ़ोन करती है और उन्हें सारी जानकारी देकर जल्दी आने के लिए कहती है। अंकिता बहुत परेशान होने लगती है वह विजय का फोन लेकर उसके सभी दोस्तों से बात करना शुरू कर देती है , वह उनको भी जल्दी से जल्दी यहां आने के लिए बोल देती है। विजय की मंगेतर राधिका को इस बारे में कुछ भी पता नहीं था , वह अपने दफ़्तर के काम से विदेश गई हुई थी। उसको सब कुछ बताना अंकिता को सही नहीं लगा। सभी को आने में कुछ समय लगता है। इसी बीच वह बार – बार विजय को होश में लाने की कोशिश करती है। मगर शराब के अत्यधिक सेवन के कारण विजय स्वयं कोशिश करके भी होश में आने में असमर्थ था। जल्दी-जल्दी सफलता और पैसे कमाने की इस मानसिक इच्छा ने ” शारीरिक कामनाओं की पूर्ति ” का अत्यधिक वहन करके शराब की ” वासना ” को जन्म दे दिया जिसने आज विजय की यह हालत बना दी जो किसी ने सोची भी नहीं थी। एक अनजाना दृश्य अंकिता के सामने खड़ा हुआ था। जिसमें शामिल होकर वह अपने किरदार का अभिनय कर रही थी।
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कुछ देर बाद डॉक्टर और विजय के दोस्त घर आ जाते हैं , वह अंकिता को विजय के बारे में सब बता देते हैं , अंकिता को यह सब सुनकर एक सदमा – सा लगता है। उसका छोटा भाई विजय अपनी सभी ” शारीरिक कामनाओं की पूर्ति ” करने के चक्कर में आज ” वासना ” के जाल में पूरी तरह से फंस चुका है। उसकी यह हालत अंकिता देख नहीं पा रही थी। डॉक्टर ने उसका निरीक्षण किया और कुछ दवाईयां विजय को देने के लिए बताता है , अंकिता उनसे विजय की हालत के बारे में पूछती है – ” डॉक्टर , मेरा छोटा भाई विजय अब कैसा है ? कोई डरने वाली बात तो नहीं है , वह कब तक ठीक हो जाएगा ? डॉक्टर उसे विश्वास रखने के लिए कहता है , और कुछ पलों बाद वहां से चला जाता है। विजय का एक दोस्त दवाईयां लाने के लिए चला जाता है थोड़ी देर बाद दवाईयां आ जाती हैं , अंकिता दवाईयां ले लेती है और विजय के सभी दोस्तों के प्रति अपना आभार प्रकट करती है , सभी उसे हिम्मत रखने के लिए कहते हैं , और वहां से चले जाते हैं। अंकिता अब विजय के साथ में घर में अकेली थी , उसे बहुत रोना आ रहा था , वह बहुत दुखी होने लगी थी , वह सोचने लगी थी , ” कि अचानक यह सब कैसे हो गया ” ? वह वहीं ज़मीन पर बैठकर रोने लगती है।
कुछ घंटों के बाद शाम हो जाती है , सुबह का सूरज अब डूबने लगा था , अंकिता के मन में बसा हुआ दुख और दर्द भी अब उसके मन से बाहर निकलना चाहता था। अंकिता अब उन्हें बाहर निकलने की अनुमति देती है और साथ में ही वह विजय को भी उसकी ” शारीरिक कामनाओं की पूर्ति ” के लिए सही मार्ग पर लाने की तैयारी भी शुरू कर देती है , जिससे विजय ” वासना ” के इस जाल से स्वयं को बाहर निकाल सके और एक बेहतरीन, सफल और आदर्श जीवन का आनंद ले सके।
वह इस बारे में सोचने लगती है , विजय के दोस्तों से भी इस बारे में बात करती है , विजय के दोस्त अंकिता का इस कार्य में साथ देने के लिए तैयार हो जाते हैं वह उससे वादा करते हैं कि वह सब उसके इस कार्य में सदैव उसके साथ हैं और हर तरह से उसकी सहायता करने के लिए भी तत्पर हैं। अंकिता उनसे कुछ दिनों का समय मांगती है और अपनी योजना बनाना शुरू कर देती है। विजय की तबीयत में भी बहुत सुधार होता है , विजय धीरे – धीरे वापिस अपनी ज़िंदगी में आना शुरू कर देता है।
विजय अपने दफ़्तर में जाकर काम करने लगा था , सभी उसके व्यवहार से बहुत खुश थे , अंकिता भी यह सब देखकर बहुत खुश होती है। उसकी मंगेतर भी विदेश से वापिस आ जाती है , दोनों साथ में शादी की तैयारी करने लगते हैं। मगर कहते हैं , कि ” शारीरिक कामनाओं की पूर्ति ” करने के लिए अगर व्यक्ति सभी नियमों को तोड़ देता है , तो फिर ” वासना ” उसे अपने आगोश में लेने लगती है , ठीक यही होना शुरू हो चुका था विजय के साथ में। बाहर से कुछ और मगर अंदर से कुछ और। समय के साथ में व्यवहार में थोड़ा अंतर आने लगा रात देर से लौटना और फिर सोने चले जाना। यह सब संकेत अंकिता को डराने लगते हैं। अंकिता इस बारे में विजय से बात करने की कोशिश भी करती है , मगर विजय हर बार अनसुनी कर देता और ज्यादा बात करने पर नाराज़ होकर चला जाता। अंकिता उसका आंकलन करने लगी उसकी दिनचर्या पर विशेष ध्यान देने लगी और धीरे – धीरे सभी चीजें साफ – साफ दिखने लगीं और अंकिता यह सब जानकर बहुत नाराज होने लगी और बहुत गुस्से में वह विजय को फोन लगाती है। मगर विजय का फोन बंद आने लगता है। अंकिता सोचती है – ” कि अभी तो दफ़्तर में काम करने का समय है और दफ़्तर में फोन पर बात करने की अनुमति है तो फिर विजय का फोन बंद क्यों आ रहा है ” अंकिता विजय के दफ़्तर में फोन करती है तब उसे पता चलता है , कि विजय कुछ दिनों से दफ़्तर नहीं आ रहा है और उस पर दफ़्तर में चोरी का आरोप भी लगा है उसने दफ़्तर की फाइलों को किसी दूसरे दफ़्तर को बेचकर पैसे लिए हैं और उन पैसों से उसने जुआ खेला है जिसमें उसे बहुत नुकसान भी हुआ है। यह सुनकर अंकिता के पैरों के नीचे से ज़मीन खिसक जाती है।
अंकिता घबराने लगती है वह विजय के दोस्तों को इसकी जानकारी देती है। विजय के दोस्त यह सब सुनकर अंकिता को घर पर ही रहने की बोलते हैं और जल्दी विजय के घर पहुंचने के लिए निकल जाते हैं। विजय के घर पर पहुंचकर सभी विजय को ढूंढने की कोशिश करते हैं कोई फोन लगाता है तो कोई रेलवे स्टेशन , बस स्टेशन पर ढूंढता है मगर विजय की ख़बर नहीं मिलती है। सभी परेशान होने लगते हैं। तभी घर की घंटी बजती है अंकिता दरवाजा खोलती है , सामने खड़े कुछ पुलिसकर्मी अंकिता को बताते हैं – ” विजय को पुलिस ने चोरी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है , कल सुबह उसे अदालत में पेश करेंगे , इसलिए आप सभी कल अदालत में आ जाना “। यह सब सुनकर अंकिता रोने लग जाती है। सभी उसे संभालने की कोशिश करते हैं , मगर अंकिता जैसे एक मृत शरीर बन चुकी थी जिसकी आत्मा यह शरीर छोड़ चुकी थी। विजय की मंगेतर राधिका को सब पता चल जाता है वह भी विजय के घर आ जाती है और अंकिता को संभालने की कोशिश करती है। अंकिता को राधिका से थोड़ी हिम्मत मिलती है। यह सब ” शारीरिक कामनाओं की पूर्ति ” के लालच में ” वासना ” का हाथ थामने का ही नतीजा था।
अगले दिन अदालत में दोपहर को विजय के मुकदमे की कार्यवाही होती है। न्यायाधीश के सामने विजय अपने कर्मों के दंड के लिए आत्म समर्पण कर चुका था। आज उसे अपना जीवन याद आता है। अदालत में उस पर आरोप लगना शुरू हो जाते हैं और न्यायाधीश उसको आख़िरी अनुमति देते हैं अपने पक्ष में कुछ कहने के लिए। मगर विजय चुपचाप खड़ा रहता है। वह किसी से भी नज़रें नहीं मिला पाता है। अदालत उसे पांच साल कारावास की सजा देती है। पांच साल कारावास की सजा पूरी होने के बाद अंकिता , उसकी मंगेतर राधिका , उसके दोस्त उसे नया जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। वह उसे ध्यान केंद्र में ध्यान और योग करने के लिए भेजते हैं। कुछ ही समय बाद विजय एक नए रूप में दिखाई देता है। जैसे कि कहानी के किरदार में नया बदलाव आया हो अब कहानी नया रूप लेने लगती है। विजय का किरदार अब अपना नया अंश सभी के सामने लाने लगता है। जो अभी तक पर्दे पर नहीं आया था। जिससे सभी अनजान थे। वह अब सभी को ” शारीरिक कामनाओं की पूर्ति ” के लिए ” वासना ” के लालच से दूर रहने की सलाह देने लग जाता है। अंकिता , राधिका , उसके दोस्त यह सब देखकर बहुत खुश होते हैं और उनकी आँखों से खुशी के आंसू बहने लगते हैं।
