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झूठ की सजा-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं मध्यप्रदेश: Hindi Katha
Jhooth ki Saja

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

Hindi Katha: कोरकू जनजाति मध्यप्रदेश में सतपुडा पर्वत माला पर जंगलों में निवास करती है। आजकल मवासी छिंदवाड़ा, भैंसदेही और चिचोली बैतूल, होशंगाबाद, भिंड, खंडवा, सीहोर हरदा आदि में इनका निवास है। लिंगादेव (निंगदेव, बड़ादेव, महादेव, शंकर) और उनका परम भक्त रावण इनके लिए पूजनीय है। बन्दया, रूमा और मवासी उपजातियों में विभाजित समृद्ध कोरकुओं राय कोरकू तथा निर्धन कोरकुओं को पथरिया कोरकू कहा जाता है।

एक समय की बात है कि भगवान शंकर और माता पार्वती मन बहलाने के लिए चौपड़ खेल रहे थे। खेल हो तो हार-जीत भी होती ही है। उस बाजी में पार्वती जी जीत गई। शंकर जी ने पार्वती जी को चिढ़ाने के लिए कहा कि वे जीते हैं। दोनों अपनी-अपनी जीत का दावा करते रहे। फैसला न हो सका तो तय हुआ कि नंदी की गवाही ली जाए जो चुपचाप बैठा हुआ खेल देख रहा था।

नंदी शंकर जी की सवारी है। उसने स्वामी भक्ति का परिचय देते हुए झूठ ही कह दिया कि शिव जी जीते हैं। जगत्पिता शिव जी और जगत्माता पार्वती दोनों ही सच जानते थे। उनका पारस्परिक विवाद भी प्रीतपरक और नकली था। नंदी के सच न कहने पर पार्वती जी रुष्ट हो गईं। झूठ बोलने का दंड नहीं देना भी गलत है। इसलिए पार्वती मैया ने नंदी के प्रति लाड होते हुए भी सीख देने के लिए शाप दिया कि तुमने अकारण झूठ बोला है इसलिए तुम कलियुग में जन्म लोगे और तुम्हें बहुत कष्ट उठाना पड़ेगा। तुम्हारे कंधे पर हमेश बोझ लदा रहेगा। भयभीत नंदी भागकर शिव जी के पास इस आशा से गए कि शंकर जी उन्हें माता पार्वती के शाप से बचा लेंगे।

शिव जी ने नंदी को सलाह दी कि उन्होंने पार्वती जी के प्रति अपराध किया है। इसलिए क्षमा प्रार्थना भी पार्वती जी से ही करें। नंदी फिर माता पार्वती जी के पास गए और उनके चरणों में लौटकर दीन भाव से क्षमा प्रार्थना करने लगे। इस पर कोमल मन की पार्वती जी द्रवित हो गई और उन्होंने कहा तुम्हें बोझ तो उठाना पड़ेगा पर तुम्हारी पूजा भी होगी। शिव जी के हर मंदिर में तुम्हें शिव जी के सामने स्थान मिलेगा। वर्ष में आज के दिन तुम्हारा पूजन सभी किसान करेंगे। उस दिन तुम्हें नहलाकर सजाया जाएगा और काम न करना होगा।

तब से भादों माह की अमावस्या को कोरकू अपना सबसे बड़ा त्यौहार ‘पोला’ मनाते हैं। इस दिन पुरुष पशुओं को नहला-धुलाकर, उनका पूजन कर घी-गुड तथा चावल और मूंग की खिचडी, पूरनपोली और खीर खिलाई जाती है। बच्चे लकड़ी या मिट्टी से बने पशुओं के खिलौने खरीदकर उनकी पूजा करते और उनके साथ खेलते हैं। महिलाएं अपने मैके जाती हैं और पुत्रादि की दीर्घायु के लिए चौंसठ योगिनी और पशुधन को पूजती हैं। पशुओं का मेला भरता है। सजाए हुए पशुओं की शोभायात्रा निकाली जाती है और दौड़ का आयोजन किया जाता है।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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