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संतोष से सिद्धि-21 श्रेष्ठ लोक कथाएं मध्यप्रदेश: Devotee Story
Santosh se Sidhi

भारत कथा माला

उन अनाम वैरागी-मिरासी व भांड नाम से जाने जाने वाले लोक गायकों, घुमक्कड़  साधुओं  और हमारे समाज परिवार के अनेक पुरखों को जिनकी बदौलत ये अनमोल कथाएँ पीढ़ी दर पीढ़ी होती हुई हम तक पहुँची हैं

Devotee Story: किसी समय घने जंगल में सबर नाम का एक वनवासी रहता था। वह दिन-भर मेहनत कर फल-फूल-पत्ते आदि जुटाता और उससे अपना और अपने परिवार का पेट भर भगवान का नाम जपता। उसकी संतोषी वृत्ति की परीक्षा लेने के लिए भगवान नारायण धरती पर आए। जिस रास्ते से सबर जंगल में जाता और लौटता था, उस पर नारायण भगवान के साथ आई लछमी जी ने सोने की मुहरें बिखेर दीं।

नारायण और लछमी छिपकर देखने लगे कि मुहरें देखकर सबर क्या करता है? सबर ने जैसे ही मुहरों को देखा उन्हें उठाया, यह देखकर लछमी जी मुस्कुराने लगीं। सबर ने इधर-उधर देखा और जब सुनसान पाया तो मुहरों को एक झाड़ के किनारे इस तरह रख दिया की खोजने पर मिल जाएँ किंतु अचानक किसी के पैरों में न पड़ें। ऐसा कर सबर आगे चल दिया। अब नारायण मुस्कुराए।

शाम को सबर लौटा तो रस्ते पर स्वादिष्ट फल पडे मिले। उसने फिर उन फलों को उठाकर किनारे रख दिया और आगे चल दिया। लछमी और नारायण ने प्रसन्न होकर उसे दर्शन दिए और वर माँगने को कहा। सबर ने नारायण से भक्ति का वर माँगा और लछमी से कहा कि उसका सबर कभी न चुके, ऐसा वर दें। वह रोज भगवान का नाम जपता रहता। वह योग से सिद्ध हो गया। उसकी मक्ति के बाद उस स्थान को सबरीनारायण कहा जाने लगा।

सबर के वंशज उड़ीसा में जाकर भगवान जगन्नाथ के पुजारी बने। कहीं-कहीं उन्हें ‘सौंर’ भी कहा जाता है।

भारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा मालाभारत की आजादी के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) पूर्ण होने पर डायमंड बुक्स द्वारा ‘भारत कथा माला’ का अद्भुत प्रकाशन।’

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