summary: गर्भावस्था में भावनात्मक खींचतान
गर्भवती महिला अक्सर मायके और ससुराल की अलग अपेक्षाओं के बीच मानसिक तनाव, अपराधबोध और अकेलेपन से जूझती है।
Pregnant Woman Family Balance: गर्भावस्था के दौरान हो रहे शारीरिक और मानसिक बदलावों के बीच मायके की याद और ससुराल के प्रति स्त्री की जिम्मेदारी यह दोनों भावना कई बार गर्भावस्था में महिला के लिए चुनौती बन जाते हैं। कई बार स्त्री समझ नहीं पाती वह किसकी ज्यादा सुने। उस मां की जिसने उसे पाला है या उस मां की जिसके साथ जीवन का बाकी समय बिताना है। अक्सर बाहर से दिखने में यह छोटी सी खींचतान गर्भवती महिला को अंदर से परेशान कर देती है। आइए इस लेख में जानते हैं किस तरह महिला मायके और ससुराल के बीच संतुलन बनाए।
मायके और ससुराल में खींचतान का करण
जिम्मेदारियां: जब महिला मायके में होती है तो वह, वहां खुद को ज्यादा आजाद और आराम की स्थिति में पाती है। क्योंकि वह समझती है कि वहां कोई उसको बुरा भला नहीं कहेगा। जबकि ससुराल में वह खुद पर घर की जिम्मेदारियों का दबाव महसूस करती है। साथ ही हमेशा अपने मन में यह डर रहता है कहीं कोई कुछ कह ना दे।

खानपान में अंतर: गर्भावस्था के दौरान कई बार महिला को अपने मां के हाथों के स्वाद की याद आती है और खाने की इच्छा होती है। यहां तक की मायके में उनकी हर खान की फरमाइश पूरी की जाती है। परंतु ससुराल में इस बात का महिला को संकोच रहता है।
भावनात्मक आजादी: महिला अपने मायके में खुलकर रो सकती है, हंस सकती है, बोल सकती है। जबकि ससुराल में महिला खुद को इस तरह भावनात्मक रूप से आजाद महसूस नहीं कर पाती है।
महिला का आंतरिक संघर्ष, इसका बच्चे पर असर
गर्भावस्था के दौरान इस तरह की खींचतान से महिला अक्सर तनाव में रहती है। वह सोचती है अगर मायके की ज्यादा सुनेगी तो ससुराल वाले नाराज होंगे। अगर मायके कि नहीं सुनेगी तो वह दुखी हो जाएंगे। आखिर मैं क्या करूं। कोई मुझसे क्यों नहीं समझता।
महिला के लगातार इस तरह के तनाव के कारण उसे नींद की कमी, एंजायटी जैसी परेशानियां बढ़ जाती है।
बच्चे पर इसका असर: वैज्ञानिक शोध से यह प्रमाणित हो चुका है की मां के मानसिक तनाव का सीधा असर शिशु के विकास पर पड़ता है। लगातार तनाव के कारण शिशु का विकास धीमा हो सकता है या फिर महिला को समय से पहले डिलीवरी हो सकती है।
महिला स्थिति को कैसे संभाले, परिवार की भूमिका
गर्भवती महिला सब की उम्मीदों को पूरा करने का दबाव न ले। हर समय मायके और ससुराल में तुलना ना करें। इस तरह महिला का तुलना करना स्थिति को गंभीर बनता है। अगर आपको परेशानी है तो सीधे अपनी बात रखें। अपनी बात रखते समय किसी पर आरोप लगाने के बजाय कहे, ‘मुझे ऐसा महसूस होता है’ जैसे वाक्य से अपनी बात की शुरुआत करें।
पति का सहयोग: गर्भावस्था में पति का समर्थन महिला को मजबूती प्रदान करता है। पति अपनी पत्नी की भावनाओं को समझे। उनसे संवाद करें। उन्हें भावनात्मक सपोर्ट प्रदान करें। दोनों परिवारों के बीच संतुलन बनाने का काम करें। पत्नी के निर्णय के समय उसका साथ दे। गर्भावस्था के दौरान पति का भावनात्मक सपोर्ट महिला की आधी परेशानी कम कर देता है।
परिवार का सहयोग: मायका और ससुराल दोनों परिवारों को तुलनात्मक व्यवहार से बचना चाहिए। आपको गर्भवती महिला की चिंता है यह दिखाने के लिए तुलनात्मक व्यवहार ना अपनाएं। एक दूसरे की आलोचना करने से बचें।
